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लॉन्ग टर्म इनवेस्टर हो जाएं तैयार:ग्रोथ के फास्ट ट्रैक पर आएंगी भारतीय कंपनियां, 2030 तक डबल हो सकता है मार्केट कैप

9 दिन पहले
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शेयर बाजार में लंबे समय के लिए पैसा लगाने वालों के लिए अच्छी खबर है जो ICICI सिक्योरिटीज से लेकर मॉर्गन स्टैनली तक के ब्रोकरेज फर्मों के एनालिस्टों से मिल रही है। उनका यह यकीन पक्का होता जा रहा है कि इंडिया इंक प्रॉफिट ग्रोथ के उस दौर में पहुंच गया है, जो पिछले दशक में कभी नहीं देखा गया था।

एनालिस्टों के भरोसे को इन उम्मीदों से बल मिल रहा है कि भारत सहित दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं जल्द कोविड के असर से उबर कर अपार आर्थिक समृद्धि के दौर में प्रवेश कर जाएगी। मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक 2030 तक भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन डबल से ज्यादा होकर 6.4 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है।

प्रॉफिट ग्रोथ को लेकर पिछले सात साल से बना निराशा का दौर खत्म होने ही वाला है

ICICI सिक्योरिटीज के विनोद कर्की और सिद्धार्थ गुप्ता कहते हैं, 'दुनियाभर की सरकारें काउंटर साइकलिक फिस्कल पॉलिसी को बढ़ावा दे रही हैं, जिनको भारतीय रिजर्व बैंक जैसे केंद्रीय बैंकों की वित्तीय राहत से सपोर्ट दिया जा रहा है। इससे दुनियाभर में मांग में सुधार आने की संभावना बढ़ी है।'

प्रॉफिट ग्रोथ को लेकर इंडिया इंक में पिछले सात साल से बना निराशा का दौर खत्म होने ही वाला है। एनालिस्टों ने बरसों में पहली बार सितंबर तिमाही के बाद से इंडिया इंक के प्रॉफिट अपग्रेड किए हैं।जब सरकार काउंटर साइकलिकल फिस्कल पॉलिसी अपनाती है तो आर्थिक सुस्ती में खर्च बढ़ाती है, जबकि तेजी के दौर में उसे घटाते हुए टैक्स बढ़ा देती है।

प्रॉफिट के मामले में इंडिया इंक के निराश करने वाले परफॉर्मेंस से निफ्टी बेपरवाह

2014 के बाद से कंपनियों की प्रॉफिट ग्रोथ का अनुमान देना मुश्किल काम हो गया है। वे वित्त वर्ष की शुरुआत में मजबूती ग्रोथ का अनुमान देते और बाद के महीनों में कमजोर फाइनेंशियल रिजल्ट होने पर उसको घटा देते।

लेकिन पिछले सात साल से प्रॉफिट के मामले में इंडिया इंक के निराश करने वाले परफॉर्मेंस का निफ्टी पर कोई असर नहीं हुआ है। इस दौरान तो यह डबल हो गया, जिससे जमीनी हकीकत से स्टॉक मार्केट के परफॉर्मेंस का कनेक्शन टूट गया और चुनिंदा शेयरों का रिटर्न ज्यादा रहा।

इंडिया इंक की प्रॉफिट ग्रोथ में सालाना 23% की बढ़ोतरी होगी, अगर...

वक्त के साथ पिछले और अगले 12 महीनों के प्रॉफिट का अनुमान जस का तस रहने लगा जबकि असल प्रॉफिट के आंकड़े निराश करते रहे। साइकलिकल सेक्टर के अलावा टेलीकॉम और फार्मा जैसे डिफेंसिव कंपनियां प्रॉफिट में उतार-चढ़ाव के चलते डाउनग्रेड हुईं।

मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक प्रॉफिट ग्रोथ का नया दौर आने के सारे संकेत मिल रहे हैं। उसका कहना है कि अगर कंपनियों के प्रॉफिट और GDP का अनुपात ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर से 3.5% के औसत तक आ जाता है तो इंडिया इंक के प्रॉफिट में सालाना 23% की बढ़ोतरी होगी।’

2030 तक मार्केट कैप डबल से ज्यादा होकर 476.03 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है

कर्की और गुप्ता का मानना है कि निफ्टी की 61% साइकलिकल कंपनियों का प्रॉफिट फिर से बढ़ना शुरू हुआ है। यह भारतीय शेयर बाजार को बरसों तक बेस्ट रिटर्न दिलाने वाले दौर में ला सकती है। मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक 2030 तक भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन डबल से ज्यादा होकर 6.4 लाख करोड़ डॉलर (476.03 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच सकता है।

फॉरेन ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पांच साल के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद इंडिया इंक के प्रॉफिट में बढ़ोतरी और उसके हिसाब से वैल्यूएशन में हो रहे इजाफे के अलावा पॉलिसी लेवल पर मिल रही मदद से आने वाले वर्षों में इंडिया इमर्जिंग मार्केट में सबसे आगे रह सकता है।

लेबर और एग्री रिफॉर्म्स, सरकारी खर्च में बढ़ोतरी से खत्म होगा ग्रोथ में गिरावट का ट्रेंड

लेकिन बाजार में सदी का बुल रन आने का एनालिस्टों का अनुमान कितना सही रहता है यह एक्सपोर्ट इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की कामयाबी के अलावा इस पर निर्भर करता है कि ग्लोबल इकोनॉमी कोविड की शुरुआती बाधा कैसे पार करती है।

लेबर और एग्री मार्केट में हुए हालिया सुधारों के अलावा खर्च बढ़ाकर इकोनॉमी को राहत देने पर सरकार का फोकस होने से उम्मीद की जा रही है कि GDP के लॉन्ग टर्म ग्रोथ में आ रही गिरावट का ट्रेंड दूर हो जाएगा।

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