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तिमाही में अच्छा रहा प्रदर्शन:कंपनियों की सेल्स और प्रॉफिट ग्रोथ दिसंबर क्वॉर्टर में बढ़ी, सस्ते कच्चे माल और खर्च घटाने से मिला फायदा

मुंबई16 दिन पहले
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  • इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने वाला बजट आने से फाइनेंशियल रिजल्ट पर कंपनियों की मैनेजमेंट रिपोर्ट जोश से लबरेज रही
  • BFSI को छोड़ बाकी निफ्टी कंपनियों की सेल्स 2.5% घटी, ऑयल एंड गैस कंपनियों और बैंकों को हटाने पर सेल्स ग्रोथ 10% रही

इंडिया इंक की आमदनी और उसके मुनाफे में चल रहा बढ़ोतरी का दौर दिसंबर क्वॉर्टर यानी मौजूदा वित्त वर्ष तीसरी तिमाही में तेज हुआ है। कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने की कवायद के बीच धीरे-धीरे अनलॉकिंग शुरू होने से इकोनॉमिक एक्टिविटी में रिकवरी हुई है। इन सब में फेस्टिव सीजन की मांग से बने उत्साह के माहौल का बड़ा हाथ रहा है। इंडिया इंक का मतलब भारतीय कंपनियों से है।

आमदनी और मुनाफे में उम्मीद से ज्यादा सुधार

दिसंबर तिमाही के दौरान इंडिया इंक की आमदनी और मुनाफे में बाजार की उम्मीदों से ज्यादा सुधार आया। उसको पिछली तिमाही में भी सस्ते कच्चे माल और खर्च घटाने की कवायद में मिली कामयाबी का फायदा मिला। ग्रोथ को बढ़ावा देने वाला बजट आने से फाइनेंशियल स्टेटमेंट को लेकर कंपनियों की मैनेजमेंट रिपोर्ट जोश से लबरेज रही। आने वाले समय में इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने वाला अनुकूल मैक्रोइकोनॉमिक माहौल उनका उत्साह बढ़ा रहा है।

निफ्टी कंपनियों की सालाना सेल्स ग्रोथ रही 10%

BFSI को छोड़ दें तो तीसरे क्वॉर्टर में निफ्टी कंपनियों की नेट सेल्स में सालाना आधार पर 2.5% की कमी आई। इसकी वजह क्रूड की कीमत में आई कमजोरी के बीच ऑयल एंड गैस कंपनियों की सेल्स में 10% से ज्यादा की गिरावट रही। ऑयल एंड गैस और बैंकिंग कंपनियों को हटा दें तो निफ्टी कंपनियों की सालाना सेल्स ग्रोथ 10% रही।

कंपनियों को मिला सस्ते कच्चे माल का फायदा

निफ्टी कंपनियों का इबिट्डा मार्जिन सालाना आधार पर 310 बेसिस प्वाइंट यानी 3.10 पर्सेंटेज प्वाइंट बढ़कर 18.9% रहा। कंपनियों के लिए कच्चा माल तीसरे क्वॉर्टर में भी सस्ता बना रहा। उसका खर्च सेल्स के 45.9% के बराबर और पिछले वित्त वर्ष के दिसंबर क्वॉर्टर से 6 पर्सेंटेज प्वाइंट कम रहा। तीसरे क्वॉर्टर में इंडिया इंक का मुनाफा सालाना आधार पर 28% उछल गया। उसकी वजह ऑपरेटिंग मार्जिन में इजाफे के साथ ब्याज और डेप्रिसिएशन पर कड़ा नियंत्रण रहा।

ऑटोमोबाइल सेल्स वॉल्यूम सालाना पर 10.5% बढ़ा

अगर इंडिया इंक के परफॉर्मेंस को सेक्टर के हिसाब से देखें तो दिसंबर क्वॉर्टर में बैंकों के ग्रॉस NPA में 30-50 बेसिस यानी 0.30- 0.50 पर्सेंटेज प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई। ऑटोमोबाइल सेक्टर का रिजल्ट मजबूत रहा और उनका टोटल सेल्स वॉल्यूम सालाना आधार पर 10.5% की बढ़ोतरी के साथ 72.8 लाख यूनिट रहा। दिसंबर तिमाही में कैपिटल गुड्स कंपनियों का एग्जिक्यूशन तेज हुआ और उस दौरान नए ऑर्डर की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई।

FMCG कंपनियों को गांवों में ज्यादा मांग का सपोर्ट

तीसरे क्वॉर्टर में FMCG सेक्टर की कंपनियों की आमदनी और मुनाफा सितंबर क्वॉर्टर के मुकाबले अच्छा खासा बढ़ा। इसमें कोविड-19 के बाद सरकार की तरफ से खर्च बढ़ाए जाने के चलते ग्रामीण भारत में मांग में हुई ठोस बढ़ोतरी का बड़ा हाथ रहा।

18 महीनों में 16,300 तक जा सकता है निफ्टी

निफ्टी कंपनियों का प्रॉफिट मौजूदा वित्त वर्ष से लेकर दो फाइनेंशियल ईयर यानी FY2021 से 2023 के बीच 24.2% के CAGR से बढ़ सकता है। FY23 तक अगले 12 से 18 महीनों के लिए 740 रुपये के अनुमानित EPS यानी प्रति शेयर प्रॉफिट के मुताबिक निफ्टी का टारगेट 22 गुना यानी 16,300 और सेंसेक्स का 54,600 होता है।

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