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कारों के लिए 22 महीने तक की वेटिंग:पेट्रोल-डीजल कारों का उत्पादन बढ़ाने के लिए 21,000 करोड़ खर्च करेंगी ऑटो कंपनियां

नई दिल्ली23 दिन पहले
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इलेक्ट्रिक कारें भविष्य का ट्रांसपोर्ट हो सकती हैं, लेकिन पेट्रोल-डीजल कारों की डिमांड कम नहीं हुई है। बड़ी घरेलू कंपनियां पारंपरिक कारों का उत्पादन बढ़ाने पर 21,000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने वाली हैं। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, किआ मोटर्स, ह्युंडई, टोयोटा जैसी कंपनियां पेट्रोल-डीजल कारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में जुटी हैं।

पेट्रोल-डीजल कारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर 20 हजार करोड़ खर्च करेंगी कंपनियां
ऐसी कारों की डिमांड का हाल ये है कि इनके लिए 20-22 महीने की वेटिंग चल रही है। 8 लाख से ज्यादा कारों की डिलीवरी पेंडिंग है। इसमें 99% पेट्रोल-डीजल कारें हैं। इसीलिए मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर्स के मुताबिक, ये कंपनियां पेट्रोल-डीजल कारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर करीब 20 हजार करोड़ खर्च करेंगी।

लगातार बढ़ रही SUV की डिमांड, तैयारी में कंपनियां

महिंद्रा एंड महिंद्रा: अगले एक-डेढ़ साल में SUV मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाकर सालाना 6 लाख करेगी। अभी कंपनी हर साल 3-3.5 लाख SUV बनाती है। उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनी 3 साल में 8,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

टाटा मोटर्स: उत्पादन क्षमता सालाना 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख करने करेगी। साणंद प्लांट चालू होने के बाद मासिक उत्पादन क्षमता 25-30 हजार बढ़ेगी। उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर कंपनी 6,000 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है।

मारुति सुजुकी: देश की सबसे बड़ी कार कंपनी ने हरियाणा में नए प्लांट के निर्माण सहित क्षमता विस्तार की अन्य योजनाएं भी बनाई है। इन पर 7,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। कंपनी पेट्रोल-डीजल वेरिएंट में नए मॉडल लॉन्च करेगी।

नई कारों की बिक्री में EV की हिस्सेदारी 1% भी नहीं
अप्रैल-सितंबर के बीच देश में 18,142 EV बिकीं। दूसरी तरफ इसी दौरान 19,36,740 कारें बिकीं। नई कारों की बिक्री में EV की हिस्सेदारी सिर्फ 0.93% रही।

...उधर अमेरिकी बाजार में मुख्यधारा में आ रही EV
अमेरिका में EV मुख्यधारा में शामिल हो रही है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद बड़े पैमाने पर लोग EV अपना रहे हैं। जनवरी-सितंबर के बीच EV की बिक्री 70% बढ़ी। नई कारों की बिक्री में भी EV की हिस्सेदारी एक साल में दोगुनी हो गई है। बीते साल ये 2.9% थी, जो 5.6% हो गई है।