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देश को मिला पहला इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज:इससे गोल्ड इंपोर्ट में होगी आसानी, पीएम मोदी ने किया शुरू; जानिए IIBX के बारे सब कुछ

नई दिल्ली16 दिन पहले
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भारत के ज्वैलर्स के लिए विदेशों से सोने का इंपोर्ट आसान होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत के पहले इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज को लॉन्च किया। पीएम ने गांधीनगर के पास इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में इस एक्सचेंज को लॉन्च किया है। यह एक्सचेंज फिजिकल गोल्ड और सिल्वर की बिक्री करेगा।

इस एक्सचेंज को शंघाई गोल्ड एक्सचेंज और बोर्सा इंस्तांबुल की तर्ज पर स्थापित किया गया है जो भारत को बुलियन के रीजनल हब के रूप में मजबूत स्थिति प्रदान करेगा।। ये एक्सचेंज एक साल की देरी, कई ट्रायल और ड्राई रन के बाद लॉन्च हुआ है।

पीएम मोदीIIBX और NSE IFSC-SGX कनेक्ट लॉन्च करते हुए।
पीएम मोदीIIBX और NSE IFSC-SGX कनेक्ट लॉन्च करते हुए।

इसी को देखते हुए हम यहां आपको आखिर यह बुलियन एक्सचेंज क्या है, इससे क्या होगा, ट्रेडिंग कैसे होगी और इससे क्या फायदा होगा इसके बारे में बता रहे हैं...

क्या होता है बुलियन?
बुलियन का मतलब है उच्च शुद्धता का फिजिकल गोल्ड और सिल्वर, जिसे बार, सिल्लियों या सिक्कों के रूप में रखा जाता है। बुलियन को कभी-कभी लीगल टेंडर माना जा सकता है। इसे अक्सर सेंट्रल बैंकों गोल्ड स्टोरेज के रूप में रखती है या फिर संस्थागत निवेशकों रखते हैं।

क्या है बुलियन एक्सचेंज का उद्देश्य
साल 1990 के दशक में नॉमिनेटड बैंकों और एजेंसियों से सोने के आयात का उदारीकरण हुआ था। उसके बाद पहली बार भारत में कुछ ज्वैलर्स को IIBX के माध्यम से सीधे सोना आयात (Gold Imports) की अनुमति दी गई थी। इसलिए यह एक्सचेंज अपने आप में काफी उपयोगी है। इसके लिए ज्वैलर्स को एक मौजूदा ट्रेडिंग मेंबर का ट्रेडिंग पार्टनर या क्लाइंट होना जरूरी है। एक्सचेंज ने फिजिकल गोल्ड और सिल्वर के स्टोरेज के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर लगाए हैं।

डॉलर में भी हो सकेगी ट्रेडिंग
IIBX के CEO और MD अशोक गौतम ने इस महीने की शुरुआत में टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया था, "इसे लाने के पीछे की वजह है कि एक एक्सचेंज पर कमोडिटीज की ट्रेडिंग को सक्षम बनाया जाए। चूंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज है, इसलिए ट्रेडिंग अमेरिकी डॉलर में भी हो सकती है। हम खुद को एशिया के सबसे बड़े ट्रेडिंग हब के रूप में देखेंगे। IIBX पर कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग के कारण इंटरनेशनल प्लेयर्स हमारी सेवाओं का उपयोग करके खुश होंगे। इसके अलावा, इसके एक मुक्त व्यापार क्षेत्र होने के कारण कोई शुल्क नहीं देना होगा।"

क्या होगा फायदा?
IIBX की ग्रोथ केवल गिफ्ट सिटी तक ही सीमित नहीं होगी, बल्कि यह देशभर के सभी ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग हब्स तक होगी। योग्य ज्वैलर्स को IIBX के जरिए सोना आयात करने की अनुमति होगी। IIBX मेंबर के क्लाइंट ज्वैलर्स को यह सुविधा होगी। एक्सचेंज पर ज्वैलर्स उपलब्ध स्टॉक देख सकते हैं और ऑर्डर भेज सकते हैं। इससे ज्वैलर्स का इन्वेंट्री मैनेजमेंट काफी आसान हो जाएगा। इससे कीमत और ऑर्डर सिक्वेंसिंग में काफी अधिक पारदर्शिता आएगी। साथ ही सप्लायर अथवा लॉजिस्टिक एजेंसी द्वारा गलत तरीके से किसी को वरीयता देने के मामले भी खत्म हो जाएंगे।

अब तक कैसे होता था काम
अभी, भारत में सोने का इंपोर्ट एक कंसाइनमेंट मॉडल पर कई सिटी में नामित बैंकों और RBI से मन्यता मिली एजेंसियों से किया जाता था। इसके बाद ट्रेडर्स/ज्वैलर्स को सप्लाई की जाती थी। बैंकों और अन्य एजेंसियों को हैंडलिंग, स्टोर के लिए सोने के एक्सपोर्टर से टैक्स मिलता है।

घरेलू खरीदारों के साथ लेनदेन करते समय सोने में प्रीमियम भी जोड़ा जाता है। खरीदार इस शुल्क को वैल्यू चेन में तब तक ट्रांसफर करता है, जब तक कि वह अंतिम ग्राहक तक नहीं पहुंच जाता है। IIBX के आज चालू होने के साथ योग्य घरेलू खरीदार गिफ्ट सिटी की एक ब्रांच के माध्यम से एक इंटरनेशनल सप्लायर से बार और सिक्के खरीद सकते हैं, जो उनके साथ IIBX का मेंबर होगा।