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निवेश की बात:म्यूचुअल फंड में निवेश करने का बना रहे हैं प्लान तो बिजनेस साइकिल फंड हो सकता है बेहतर विकल्प

नई दिल्ली12 दिन पहले
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अर्थव्यवस्था में तेजी और मंदी का क्रम चलता रहता है। जिस तरह मौसम का एक चक्र होता है यानी सर्दी के बाद गर्मी और उसके बाद बरसात उसी प्रकार अर्थव्यवस्था में भी अलग अलग चरण होते हैं और हर चरण में एक अलग बिजनेस साइकिल होती है। इसके साथ ही उद्योग जगत में अलग-अलग सेक्टर होते हैं जैसे की बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल, एफएमसीजी, आईटी, इत्यादि और हर एक सेक्टर में कई कम्पनियां होती हैं।

जिस तरह मौसम बदलने पर हमारे रहन-सहन खान-पान इत्यादि में बदलाव आता है उसी प्रकार अलग-अलग बिजनेस साइकिल में ये सेक्टर एक दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। बिजनेस साइकिल के हिसाब से यदि सेक्टर का चुनाव करके निवेश के लिए उस सेक्टर से जुड़े शेयरों का पोर्टफोलियो बनाया जाए तो बेहतर मुनाफा मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।

बिजनेस साइकिल फंड की विशेषता
बिजनेस साइकिल फंड एक तरह के थीमैटिक फंड हैं। थीमैटिक फंड कुछ चुनिंदा सेक्टर में ही निवेश करते हैं और ये सेक्टर ऐसे होते हैं जिनका एक समान मकसद होता है। उदाहरण के तौर पर यदि हम एक मैन्युफैक्चरिंग थीम की बात करें तो उसमें मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हुए बिजनेस ही शामिल होंगे। वहीं यदि हम ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक की बात करें तो उसके पोर्टफोलियो में ऑटोमोबाइल और उससे संबंधित कंपनियों के शेयर होंगे।

हालांकि बिजनेस साइकिल फंड भी एक थीमैटिक ट्रांसपोर्ट है लेकिन यह कई मायनों में दूसरे थीमैटिक फंड से अलग है। बिजनेस साइकिल फंड में बिजनेस साइकिल के मुताबिक अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं और समय-समय पर उनमें बदलाव भी किया जा सकता है। इसके साथ ही एक बिजनेस साइकिल फंड का निवेश सभी तरह के मार्केट कैप वाले शेयरों में हो सकता है।

इसमें क्यों करें निवेश?
शेयर बाजार का प्रदर्शन काफी हद तक बिजनेस साइकिल पर निर्भर होता है और क्योंकि एक बिजनेस साइकिल फंड में सेक्टर्स का रोटेशन होता है इसलिए इस श्रेणी के फंड सभी परिस्थियों में अच्छा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। एक बिजनेस साइकिल में 4 चरण होते हैं एक्सपान्सन यानी विस्तार, पीक यानी तेजी, कॉन्ट्रैक्शन यानी संकुचन और स्लंप यानी मंदी। अक्सर देखा गया है कि बिजनेस साइकिल के बदलाव पर कुछ शेयरों का प्रदर्शन भी बदल जाता है। ऐसे में यदि निवेश का पोर्टफोलियो बिजनेस साइकिल के अनुरूप हो तो इससे बेहतर रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।

क्या है जोखिम?
वैसे तो सभी म्यूचुअल फंड बाजार जोखिमों के आधीन होते हैं किन्तु एक बिजनेस साइकिल फंड में जोखिम एक डाइवर्सिफाइड फंड के मुकाबले अधिक हो सकता है। शेयर बाजार बेहद संवेदनशील होता है। किसी भी प्रकार के भौगोलिक, राजनीतिक कारणों से या सरकार की पॉलिसी में बदलाव से शेयर बाजार में उतार चढ़ाव संभव है। डाइवर्सिफाइड फंड में कई सेक्टर होने के कारण यह असर कम दिखाई देता है किन्तु एक बिजनेस साइकिल फंड में किसी एक वक्त पर चुनिंदा सेक्टर होने के कारण यह असर अधिक हो सकता है, यदि यह बदलाव उन सेक्टर्स से संबंधित हो।

इसमें किसे करना चाहिए निवेश?
ऐसे निवेशक जो शेयर बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव को समझते हैं और उससे संबंधित जोखिम को सहने की क्षमता रखते हैं वे 5 साल या उससे अधिक अवधि के नजरिए से इस तरह के फंड में निवेश करके अच्छे लाभ की उम्मीद कर सकते हैं।

एक मुश्त और SIP के जरिए कर सकते हैं निवेश
बिजनेस साइकिल फंड में एक मुश्त और SIP के जरिए किस्तों में निवेश किया जा सकता है किन्तु वर्तमान स्थिति में जब बाजार अपने उच्चतम स्तरों के आसपास है तब SIP के जरिए निवेश करना बेहतर साबित हो सकता है। इस कैटेगरी में अब तक ICICI प्रूडेंशियल बिजनेस साइकिल फंड, और टाटा बिजनेस साइकिल फंड जैसे कुछ चुनिंदा फंड हैं और अब 15 नवम्बर से आदित्य बिरला सन लाइफ का न्यू फंड ऑफर यानी कि NFO खुला है जो कि 29 नवंबर तक खुला रहेगा। यह एक ओपन एंडेड फंड है इसलिए NFO बंद होने के बाद भी यह फंड खरीदी और बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा।