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सरकार के बढ़ते कर्ज की समस्या /आरबीआई यदि सरकार के घाटे की भरपाई करता है, तो फाइनेंशियल सिस्टम को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और यह हमेशा नहीं चल सकता है : राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर राजन ने कहा कि जब लोग मोनेटाइजेशन को जारी रखने से डरने लगें, जब महंगाई का डर सताने लगे, जब यह चिंता होने लगे कि कर्ज चुकाया जा सकेगा या नहीं या फिर जब अर्थव्यवस्था का विकास होने लगे और बैंकों को अपने पैसे को आरबीआई के पास रखने के बजाए दूसरे उपयोग दिखने लगे, तब सरकार के कर्ज की भरपाई करना बंद कर दिया जाना चाहिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर राजन ने कहा कि जब लोग मोनेटाइजेशन को जारी रखने से डरने लगें, जब महंगाई का डर सताने लगे, जब यह चिंता होने लगे कि कर्ज चुकाया जा सकेगा या नहीं या फिर जब अर्थव्यवस्था का विकास होने लगे और बैंकों को अपने पैसे को आरबीआई के पास रखने के बजाए दूसरे उपयोग दिखने लगे, तब सरकार के कर्ज की भरपाई करना बंद कर दिया जाना चाहिए

  • कई उभरते बाजारों में केंद्रीय बैंक सरकार के कर्ज की भरपाई करने के लिए उसे फंड देते हैं
  • सरकार के कर्ज का मोनेटाइजेशन मुफ्त में नहीं होता, फाइनेंशियल सिस्टम को इसकी कीमत चुकानी होती है

मनी भास्कर

Jul 23,2020 07:30:31 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने गुरुवार को कहा कि आर्थिक सुस्ती और नकदी में भारी बढ़ोतरी के बीच रिजर्व बैंक सरकार के कर्ज खरीद रहा है और अपने बैलेंस शीट का आकार बढ़ाता जा रहा है। लेकिन फाइनेंशियल सिस्टम पर इसका असर पड़ता है और अंतिम समाधान के तौर पर हमेशा इस उपाय को नहीं अपनाया जा सकता है।

राजन ने कहा कि कई उभरते बाजारों में केंद्रीय बैंक सरकार के कर्ज की भरपाई करने के लिए उसे फंड देते हैं। उन्होंने हालांकि मॉडर्न मोनेटरी थ्योरी के समर्थकों से असहमति जताया और स्पष्ट कहा कि यह मुफ्त में नहीं होता। जो भी ऐसा करते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होती है।

कर्ज खरीदने के लिए आरबीआई बैंकों से रिवर्स रेपो दर पर पैसा लेकर सरकार को देता है

सिंगापुर के डीबीएस बैंक द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में राजन ने कहा कि आरबीआई अपने बैलेंस शीट का विस्तार कर रहा है और वह सरकार के कर्ज को बोझ अपने ऊपर ले रहा है। ऐसा करने के लिए वह रिवर्स रेपो दर पर बैंकों से पैसा लेता है और सरकार को फंड देता है।

लोग बचत कर रहे हैं और कर्ज नहीं ले रहे, इसलिए बैंकों में बढ़ गई है नकदी

राजन ने कहा कि अभी बैंकों में बहुत अधिक नकदी मौजूद है। क्योंकि लोग पैसे को कहीं लगाने का जोखिम नहीं उठा रहे। वे पैसे को अकाउंट में जमा कर रहे हैं। साथ ही लोग अभी कर्ज भी नहीं ले रहे हैं। बैंक ये पैसे रिवर्स रेपो दर पर आरबीआई के पास रख रहे हैं। इस पर बैंकों को बहुत कम ब्याज मिलता है।

मोनेटाइजेशन एक सीमा तक और सीमित अवधि तक ही हो

कई अर्थशास्त्री यह सलाह देते हैं कि मौजूद समय से निपटने के लिए आरबीआई को सरकार को वित्तीय मदद करनी चाहिए। इसे मोनेटाइजेशन कहा जाता है। राजन ने कहा कि मोनेटाइजेशन एक सीमा तक ही किया जाना चाहिए। और यह एक सीमित अवधि के लिए ही होना चाहिए।

मोनेटाइजेशन की प्रक्रिया कब रोक देनी चाहिए?

मोनेटाइजेशन की प्रक्रिया कब रोक देनी चाहिए? इस सवाल के जवाब में राजन ने कहा कि जब लोग मोनेटाइजेशन को जारी रखने से डरने लगें। जब महंगाई का डर लगने लगे। जब उन्हें यह चिंता होने लगे कि कर्ज चुकाया जा सकेगा या नहीं। या फिर जब अर्थव्यवस्था का विकास होने लगे और बैंकों को अपने पैसे को आरबीआई के पास रखने के बजाए दूसरे उपयोग दिखने लगे।

इकॉनोमी के खुलने पर लॉकडाउन से कॉरपोरेट सेक्टर को हुए नुकसान का पूरा ब्योरा सामने आएगा

राजन ने कहा कि अर्थव्यवस्था जब पूरी तरह से खुल जाएगी, तब लॉकडाउन से कॉरपोरेट सेक्टर को हुए सभी नुकसान का ब्योरा सामने आएगा। ये नुकसान फाइनेंशियल सेक्टर को ट्रांसफर किए जाएंगे। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि तब बैंकों के पास समुचित पूंजी रहे और फाइनेंशियल सेक्टर समस्या में न फंसे।

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आरबीआई के पूर्व गवर्नर राजन ने कहा कि जब लोग मोनेटाइजेशन को जारी रखने से डरने लगें, जब महंगाई का डर सताने लगे, जब यह चिंता होने लगे कि कर्ज चुकाया जा सकेगा या नहीं या फिर जब अर्थव्यवस्था का विकास होने लगे और बैंकों को अपने पैसे को आरबीआई के पास रखने के बजाए दूसरे उपयोग दिखने लगे, तब सरकार के कर्ज की भरपाई करना बंद कर दिया जाना चाहिएआरबीआई के पूर्व गवर्नर राजन ने कहा कि जब लोग मोनेटाइजेशन को जारी रखने से डरने लगें, जब महंगाई का डर सताने लगे, जब यह चिंता होने लगे कि कर्ज चुकाया जा सकेगा या नहीं या फिर जब अर्थव्यवस्था का विकास होने लगे और बैंकों को अपने पैसे को आरबीआई के पास रखने के बजाए दूसरे उपयोग दिखने लगे, तब सरकार के कर्ज की भरपाई करना बंद कर दिया जाना चाहिए

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