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बोर्ड ने दी मंजूरी:IDFC म्यूचुअल फंड बिकने की तैयारी में, 6000-7000 करोड़ रुपए में हो सकती है डील

मुंबईएक महीने पहले
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IDFC म्यूचुअल फंड बिकने की तैयारी में है। IDFC के बोर्ड ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। इसे 6 से 7 हजार करोड़ रुपए में बेचा जा सकता है।

IDFC 9 वें नंबर की कंपनी है

देश में म्यूचुअल फंड बिजनेस में IDFC 9 वें नंबर की कंपनी है। इसका असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जून तिमाही में 1.26 लाख करोड़ रुपए था। इसमें से 27 हजार करोड़ रुपए इक्विटी का AUM है। बाकी AUM डेट और हाइब्रिड स्कीम में है। IDFC बोर्ड ने इसके लिए एक पैनल बनाया है जो इन्वेस्टमेंट बैंकर की नियुक्ति से लेकर इसकी हर प्रक्रिया को पूरी करेगा। AUM मतलब निवेशकों का जितना पैसा कंपनी के पास होता है।

2018 में भी IDFC बिकने की कगार पर थी

साल 2018 में भी IDFC म्यूचुअल फंड बिकने की कगार पर थी। उस समय अवेंडस के साथ इसकी डील हो रही थी। पर वैल्यूएशन महंगा होने के कारण यह डील नहीं हो पाई थी। उसके बाद से ही बोर्ड इसके वैल्यूएशन को लेकर डील की तलाश में था। साथ ही इसकी IPO लाने की भी तैयारी थी। हालांकि वह भी पूरी नहीं हो पाई।

इंस्टीट्यूशनल निवेशक निकलना चाहते हैं

दरअसल IDFC म्यूचुअल फंड में जो इंस्टीट्यूशनल निवेशक हैं, वे इसमें से निकलना चाहते हैं। इसलिए वे इसके IPO या फिर किसी और डील के लिए बोर्ड पर दबाव डाल रहे हैं। कुछ निवेशकों ने IDFC बोर्ड के मैनेजमेंट से इसकी डील को लेकर समय का भी खुलासा करने को कहा है। निवेशक चाहते हैं कि जो भी समय तय हो, उस पर डील हो जाए। सूत्रों के मुताबिक, इस बार IDFC बोर्ड किसी तरह से इसे बेचने की प्रक्रिया को पूरी कर लेगा।

AUM के आधार पर होता है वैल्यूएशन

म्यूचुअल फंड बिजनेस का वैल्यूएशन उसके AUM के आधार पर होता है। AUM की तुलना में 5 से 6% के वैल्यूएशन पर डील होती है। इक्विटी और डेट में IDFC के पास अच्छी मैनेजमेंट टीम है। IDFC म्यूचुअल फंड फायदा कमानेवाला फंड हाउस है। मार्च 2021 में खत्म हुए वित्त वर्ष में कंपनी को 144 करोड़ रुपए का फायदा हुआ था। एक साल पहले की तुलना में यह 81% ज्यादा था।

देश में फायदा कमाने वाले फंड हाउस में SBI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल, HDFC म्यूचुअल फंड, निप्पोन इंडिया, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, बिरला म्यूचुअल फंड जैसे दो दर्जन फंड हाउस हैं।

कई कंपनियां आई हैं फंड बिजनेस में

म्यूचुअल फंड बिजनेस में तेजी की वजह से कई नई कंपनियां इस बिजनेस में आई हैं। इसमें जीरो ब्रोकरेज ऑफर करने वाली ब्रोकरेज फर्म जेरोधा, सैमको, नावी और एनजे शामिल हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों में कई फंड हाउस बिक भी गए हैं जबकि कुछ की स्थिति काफी खराब है। हालांकि IDFC म्यूचुअल फंड को खरीदने में वर्तमान फंड हाउसेस को दिक्कत हो सकती है। क्योंकि मार्केट रेगुलेटर सेबी के नियमों के मुताबिक, कोई भी फंड एक कैटेगरी में एक से ज्यादा स्कीम नहीं रख सकता है। जो भी फंड हाउस IDFC को खरीदेगा, उसके पास उसी कैटेगरी में कई स्कीम हो जाएंगी। फिर उसे स्कीम को मर्ज करना होगा। ऐसे में उस फंड हाउस के लिए दिक्कत हो सकती है।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की ग्रोथ अच्छी खासी रही है

देश की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की ग्रोथ अच्छी खासी रही है। पिछले 10 सालों में इसमें सात गुना की ग्रोथ रही है। 2016 में फंड इंडस्ट्री का AUM 15.18 लाख करोड़ रुपए था। अगस्त 2021 में यह इंडस्ट्री 36 लाख करोड़ रुपए के पार हो गई है। ICICI सिक्योरिटीज ने अनुमान लगाया है कि भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का साइज 2030 तक 100 लाख करोड़ रुपए हो सकता है। यानी अगले 9 सालों में यह इंडस्ट्री तीन गुना की ग्रोथ कर सकती है।