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सहारा ने लगाया आरोप:मैने सेबी को 22 हजार करोड़ रुपए दिया, सेबी ने निवेशकों को केवल 106 करोड़ दिया

मुंबई15 दिन पहले
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Sebi ने अदालत को बताया था कि सहारा ग्रुप की दो कंपनियां सहारा इंडिया रियल एस्टेट ने 19,400.97 करोड़ और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 6,380.50 करोड़ रुपए 3.07 करोड़ निवेशकों से अलग-अलग माध्यमों से जुटाए थे
  • कंपनी ने विज्ञापन में कहा है कि ग्रुप पर या सहारा के चेयरमैन पर केवल एक आरोप है जो पेमेंट में देरी का है
  • ग्रुप लगातार पेमेंट और उसकी देरी पर जो भी ब्याज है, उसका पेमेंट भी कर रहा है

सहारा ग्रुप ने पूंजी बाजार नियामक सेबी पर बड़ा आरोप लगाया है। सहारा ने कहा है कि उसने 8 सालों में सेबी को 22 हजार करोड़ रुपए दिया है। जबकि सेबी ने निवेशकों को केवल 106.10 करोड़ रुपए दिया है। सहारा केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहा है।

सहारा ने दिया अखबारों में विज्ञापन

सहारा इंडिया परिवार की ओर से अखबारों में दिए गए विज्ञापन में कहा गया है कि कंपनी के प्रमुख सुब्रतो राय सहारा या सहारा इंडिया परिवार के खिलाफ केवल एक आरोप है। वह आरोप यह है कि वह निवेशकों का पैसा चुकाने में समय ले रहा है। हालांकि वह इस देरी का ब्याज भी दे रहा है।

8 सालों से शर्त का पालन कर रहा है सहारा

सहारा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 8 सालों से जो शर्त रखी है, उसी के मुताबिक कंपनी अपनी असेट्स बेचकर पैसा चुका रही है। सुप्रीम कोर्ट की शर्त के अनुसार, पूरे सहारा ग्रुप की किसी भी संपत्ति की बिक्री से मिले पैसों, ज्वाइंट वेंचर्स से मिले पैसों को सहारा-सेबी के खाते में जमा कराना होगा। सहारा ने कहा है कि उसने 8 सालों में एक भी पैसे का उपयोग नहीं किया है। सभी पैसा इसी खाते में जमा किए गए हैं।

22 हजार करोड़ में ब्याज भी है

सहारा ने कहा है कि उसने जो 22 हजार करोड़ रुपए अब तक भरा है उसमें ब्याज भी है। यह राशि उसकी दो समूह कंपनियों के बॉंडधारकों को लौटाने के लिये जमा की गई है। सेबी ने पिछले 8 सालों में 4 चरणों में 154 अखबारों में इससे संबंधित विज्ञापन दिया है। बावजूद इसके उसने केवल 106 करोड़ रुपए ही निवेशकों को लौटाया है।

पेमेंट के लिए अब कोई दावेदार नहीं

समूह का कहना है कि इससे उसके इस दावे की ही पुष्टि होती है कि भुगतान के लिये कोई भी दावेदार नहीं बचा है। क्योंकि नियामक द्वारा सहारा समूह को धन उसके पास जमा करने के लिये कहने से पहले ही समूह अधिकतमर बॉंडधारकों को उनका धन लौटा चुका था। बता दें कि सहारा ग्रुप में ऐसे 4 कोऑपरेटिव सोसाइटीज में करीब 4 करोड़ डिपॉजिटर्स ने अपनी बचत के लिए पैसे जमा कर रखे है। सहारा ग्रुप ने इन डिपॉजिटर्स से 86,673 करोड़ रुपए जुटाए और फिर इसमें से 62,643 करोड़ रुपए एम्बी वैली लिमिटेड में इन्वेस्ट कर दिया।

देरी के पेमेंट की शिकायत केवल 0.07 पर्सेंट है

इससे पहले समूह ने एक बयान में कहा था कि सहारा के देशभर के 8 करोड़ निवेशकों में से देरी से भुगतान की शिकायत करने वाले मात्र 0.07 पर्सेंट हैं। समूह ने बयान में कहा था कि सहारा ने पिछले 10 साल के दौरान अपने 5.76 करोड़ निवेशकों को 1 लाख 40 हजार 157 करोड़ रुपए की राशि का मैच्योरिटी का पेमेंट किया है।

फरवरी में कहा था 15,448 करोड़ लौटाया है

इससे पहले फरवरी 2020 में सहारा ने कहा था कि निवेशकों को लौटाने के लिए 15,448 करोड़ रुपए उसने जमा किए गए हैं। यह राशि सेबी-सहारा रिफंड अकाउंट में जमा की गई है। Sebi ने अदालत को बताया था कि सहारा ग्रुप की दो कंपनियां सहारा इंडिया रियल एस्टेट ने 19,400.97 करोड़ और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 6,380.50 करोड़ रुपए 3.07 करोड़ निवेशकों से अलग-अलग माध्यमों से जुटाए थे। इस दौरान इन कंपनियों ने निवेश के जरूरी नियमों का पालन नहीं किया था।