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  • Fresh Lockdowns Push Jobless Rate To Over 8% In The First Two Weeks This Month: CMIE

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रोजगार पर दिखने लगा लॉकडाउन का असर:अप्रैल के पहले दो हफ्तों में 8% बढ़ी बेरोजगारी, नौकरीपेशा लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान

एक महीने पहले
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  • पहले कोविड से जुड़ी सख्त पाबंदी और फिर लॉकडाउन लगना शुरू होने से अप्रैल के पहले हफ्ते से बढ़ने लगी बेरोजगारी
  • CMIE के मुताबिक मार्च 2021 को 7.62 करोड़ लोग नौकरी में थे, जबकि पिछले वित्त वर्ष में उनकी संख्या 8.59 करोड़ थी

कोविड की दूसरी लहर पर काबू पाने के लिए कई राज्यों में लॉकडाउन हुए हैं। इससे अप्रैल के पहले दो हफ्तों में बेरोजगारी दर बढ़कर 8% से ज्यादा हो गई। यह बात सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने कही है। उसके मुताबिक, लॉकडाउन की वजह से इकोनॉमिक रिकवरी कमजोर हो सकती है। उससे असंगठित क्षेत्र के 12 करोड़ वर्कर्स पर बुरा असर हो सकता है।

लेबर पार्टिसिपेशन रेट घटकर 40% रह गया

CMIE के मुताबिक, 'लॉकडाउन के चलते बनी अनिश्चितता से हो रहा नुकसान आंकड़ों के रूप में नजर आने लगा है। अप्रैल के पहले दो महीनों में बेरोजगारी दर 8% से ज्यादा हो गई। लेबर पार्टिसिपेशन रेट भी घटकर 40% रह गया।' देश में काम करने लायक उम्र के सभी लोगों में जितने लोग काम कर रहे होते हैं, उनका प्रतिशत पार्टिसिपेशन रेट कहलाता है।

14 अप्रैल को बेरोजगारी दर 7.2% रही

आंकड़ों के मुताबिक, 14 अप्रैल को बेरोजगारी दर 7.2% रही, जिसमें शहरी बेरोजगारी की दर 8.4% जबकि ग्रामीण बेरोजगारी 6.6% रही थी। मार्च में बेरोजगारी दर 6.52% रही थी, जिसमें शहरी बेरोजगारी का आंकड़ा 7.24% जबकि ग्रामीण बेरोजगारी का 6.17% था।

अप्रैल के पहले हफ्ते से बढ़ने लगी बेरोजगारी

CMIEके मुताबिक राज्यों में पहले कोविड से जुड़ी सख्त पाबंदी और फिर आंशिक या पूर्ण लॉकडाउन लगना शुरू होने से अप्रैल के पहले हफ्ते से बेरोजगारी बढ़ने लगी। CMIE अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में लिखता है कि अगर लॉकडाउन जारी रहा तो इस महीने और आगे शहरों में बेरोजगारी बढ़ेगी। नौकरीपेशा लोगों के दफ्तर लौटने और नई अच्छी नौकरी मिलने की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं।

इस लॉकडाउन पिछली बार जितना नुकसान नहीं होगा

CMIE का कहना है कि इस बार के लॉकडाउन में पिछली बार जितना नुकसान नहीं होगा लेकिन रिकवरी प्रोसेस को जरूर सुस्त कर देगा जो पूरा नहीं हुआ है। मार्च 2021 में 39.80 करोड़ वर्कर्स को रोजगार मिल हुआ था जबकि 2019-20 में 40.35 करोड़ लोग रोजगार में लगे हुए थे। इस हिसाब से पिछले एक साल में 54 लाख लोग बेरोजगार हुए हैं और सबसे ज्यादा नुकसान नौकरीपेशा लोगों को हुआ है।

एक साल में 98 लाख नौकरीपेशा लोग बेरोजगार हुए

CMIE के मुताबिक मार्च 2021 को 7.62 करोड़ लोग नौकरी में थे, जबकि पिछले वित्त वर्ष में उनकी संख्या 8.59 करोड़ थी। इस हिसाब से पिछले एक साल में 98 लाख नौकरीपेशा लोग बेरोजगार हुए थे। अगर गांवों की बात करें तो वहां मार्च 2021 तक 60 लाख लोगों की नौकरियां गईं थीं जबकि 30 लाख कारोबारी बेरोजगार हुए थे। इस तरह पिछले एक साल में गांवों में कुल 90 लाख रोजगार खत्म हो गए। मुमकिन है कि ये लोग खेती या दूसरे कम उत्पादक कामों में लगे हैं।

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