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एफपीआई फ्लो:लगातार तीन महीने तक निवेश करने के बाद विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय पूंजी बाजार से 3,419 करोड़ रुपए निकाल लिए

नई दिल्ली2 महीने पहले
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विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका में हो रहे राष्ट्र्रपति चुनाव और कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के कारण अनिश्चितता बढ़ने से विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसे निकाले हैं
  • एफपीआई ने पिछले महीने 7,783 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध बिक्री की
  • उन्होंने डेट सेगमेंट में इस दौरान 4,364 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया

विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय पूंजी बाजार (शेयर और डेट बाजार) से बड़े पैमाने पर पैसे निकाले। इससे पहले लगातार तीन महीने उन्होंने भारतीय बाजार में पैसे लगाए थे। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने पिछले महीने भारत से शुद्ध 3,419 करोड़ रुपए निकाले।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने पिछले महीने 7,783 करोड़ रुपए के शेयरों की शुद्ध बिक्री की। उन्होंने डेट सेगमेंट में इस दौरान 4,364 करोड़ रुपए का निवेश किया। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका में राष्ट्र्रपति चुनाव और कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के कारण अनिश्चितता की स्थिति को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने पैसे निकाले हैं।

जून, जुलाई और अगस्त में एफपीआई ने भारत में बढ़ाया था निवेश

जून, जुलाई और अगस्त में एफपीआई भारतीय बाजार में शुद्ध निवेशक बने हुए थे। अगस्त में उन्होंने भारत में 46,532 करोड़ रुपए का निवेश किया था। उन्होंने जुलाई में 3,301 करोड़ रुपए और जून में 24,053 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया था।

कोरोना संक्रमित क्षेत्रों में फिर से लॉकडाउन लगने की आशंका

मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका में हो रहे राष्ट्रपति चुनाव के कारण एफपीआई सतर्कता बरत रहे हैं। इसके साथ ही कई देशों में कोरोनावायरस महामारी फिर से तेजी से फैलने लगी है। इसके कारण निवेशकों में यह डर समा गया है कि संक्रमित क्षेत्रों में फिर से लॉकडाउन लगाया जा सकता है।

भारत का यील्ड आकर्षक होने से डेट सेगमेंट में विदेशी निवेश बढ़ा

श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले कुछ महीने में शेयर बाजार में आए उछाल और डॉलर के मुकाबले रुपए में मजबूती आने से विदेशी निवेशकों ने आगामी अनिश्चितता से पहले इसे मुनाफावसूली करने का सही मौका समझा होगा। डेट सेगमेंट में निवेश को लेकर उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व द्वारा बांड की आक्रामक खरीदारी किए जाने से अमेरिका में बांड की यील्ड काफी घट गई है। ऐसे में निवेशकों ने भारत जैसे देशों के डेट बाजार में निवेश करना वाजिब समझा होगा, जहां यील्ड बेहतर है।

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