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प्रतिस्पर्धा विरोधी व्यवहार /छोटी कंपनियों का बेरहमी से गला घोंटा, तब दुनिया की दिग्गज कंपनियां बनीं फेसबुक, अमेजन, गूगल और एपल

अमेरिकी कांग्रेस की प्रतिस्पर्धा संबंधी जांच में सामने आया सच अमेरिकी कांग्रेस की प्रतिस्पर्धा संबंधी जांच में सामने आया सच

  • पुराने ईमेल व अन्य डॉक्यूमेंट्स कंपनियों के प्रतिस्पर्धा विरोधी व्यवहार का खुलासा करते हैं
  • चारो कंपनियों के सीईओ ने आरोप को खारिज किया और कहा कि उन्होंने कंपनियों के हित के लिए काम किया

मनी भास्कर

Jul 31,2020 03:06:51 PM IST

नई दिल्ली. फेसबुक, अमेजन, गूगल और एपल आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां बन गई हैं। लेकिन ये कंपनियां सिर्फ अपने टेक्नोलॉजी कारोबार की वजह से इस मुकाम पर नहीं पहुंची हैं। इन्होंने प्रतियोगिता को नष्ट किया और कई छोटी कंपनियों को गला घोंट दिया। एक जांच के दौरान सामने आए पुराने ईमेल व अन्य डॉक्यूमेंट्स से इन बातों का पता चलता है।

अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों को इन चार कंपनियों से जुड़े कई ईमेल, मेमो व इंटरनल स्टडीज हाथ लगे थे। इन्हें बुधवार को सार्वजनिक किया गया। बुधवार को ही कांग्रेस की एक प्रतिस्पर्धा जांच समिति ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इन चारो कंपनियों के सीईओ से प्रतिस्पर्धा को दबाने संबंधी सवालों के जवाब लिए थे।

इंस्टाग्राम से मिल रही प्रतिस्पर्धा से चिंतित जुकरबर्ग ने उसका अधिग्रहण कर लिया

फेसबुक ने एक अरब डॉलर में इंस्टाग्राम का अधिग्रहण किया था। इस अधिग्रहण से पहले फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने एक ईमेल में लिखा था कि इंस्टाग्राम हमें बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। एक अन्य मेल में उनके सहयोगी ने पूछा था कि वह इंस्टाग्राम को क्यों खरीदना चाहते हैं। वे सिर्फ प्रतियोगिता खत्म करना चाहते हैं या फेसबुक में सुधार करना चाहते हैं।

मेल के जवाब में जुकरबर्ग ने लिखा कि दोनों ही मकसद हैं। इसके 45 मिनट बाद उन्होंने फिर लिखा कि वह प्रतियोगिता को खत्म नहीं करना चाहते हैं। बुधवार की सुनवाई के दौरान वाशिंगटन से डेमोक्रैटिक पार्टी की कांग्रेस सदस्य प्रमीला जयपाल ने जुकरबर्ग पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रतियोगित देने वाली कंपनियों का अधिग्रहण करने की नीति अपनाई है। जकरबर्ग ने अपने जवाब में कहा कि वह सम्मानपूर्वक इस धारणा से असहमति जताते हैं।

अमेजन ने डायपर्स डॉट कॉम से मिली प्रतियोगिता को दबाने के लिए उसका अधिग्रहण कर लिया

कांग्रेस द्वारा प्रकाशित एक अन्य ईमेल से पता चलता है कि डायपर्स डॉट कॉम और सोप डॉट कॉम को प्रतियोगिता से हटाने के लिए अमेजन ने पहले तो नुकसान में सामान बेचे और बाद में वर्ष 2010 में 54.5 करोड़ डॉलर में उनकी पेरेंट कंपनी क्विड्सी का अधिग्रहण कर लिया।

पुराने ईमेल में अमेजन के रिटेल एक्जीक्यूटिव डो हेरिंगटन ने 2010 में कहा था कि डायपर्स को पछाड़ने के लिए हमने आक्रामक योजना पर काम शुरू किया है। इससे डायपर्स डॉट कॉम का डायपर कारोबार खराब होगा और सोप डॉट कॉम का विकास धीमा हो जाएगा।

पेंसिल्वेनिया की डेमोक्रैटिक सांसद मैरी गे स्कैनलॉन ने अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस पर आरोप लगाया कि अमेजन ने लगातार अपने प्रतियोगियों को कमजोर करने क लिए सस्ते में और यहां तक कि नुकसान में भी माले बेचे। जवाब में जेफ बेजोस ने कहा कि उन्हें उस वक्त की बातें याद नहीं है। वह सिर्फ इतना कह सकते हैं कि उनकी कंपनी ग्राहकों को लेकर बेहद संजीदा है।

एपल ने एप स्टोर के जरिये डेवलपर्स को दबाया

एपल से जुड़े एक पुराने ईमेल के मुताबिक उस वक्त के सीईओ स्टीव जोब्स एपल के एप स्टोर के जरिये डेवलपर्स को दंडित करते थे। 2010 के एक ईमेल के मुताबिक एपल ने एक डेवलपर जो हेविट को एप स्टोर से इसलिए अलग कर दिया, क्योंकि उसने अपने एप पर आईफोन एप्स लिखने से इनकार कर दिया था।

गूगल ने जिन कंपनियों को खतरा समझा उन्हें सर्च इंजन से हटा दिया

एक दशक से ज्यादा पुराने कुछ ईमेल बताते हैं कि गूगल उन कंपनियों को अपने सर्च इंजन लिस्ट से हटा देने का विकल्प अपनाती थी, जिन्हें वह अपने लिए खतरा समझती थी। इससे जुड़े सवाल पर गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचई ने कहा कि कंपनी यूजर्स के एक्सपीरिएंस को प्राथमिकता देती है। उन्होंने प्रतिस्पर्धा विरोध के आरोपों का सीधा जवाब नहीं दिया।

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