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भारत में टेस्ला:टैक्स रियायतों के लिए टेस्ला की रणनीति, डच कंपनी के जरिए भारत में करेगी निवेश

मुंबई5 महीने पहले
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इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला की भारत में इंट्री हो चुकी है। बहुचर्चित कंपनी ने भारत में टैक्स रियायतों के लिए खास रणनीति अपनाई है। अमेरिकी कंपनी टेस्ला भारत में इन्वेस्टमेंट नीदरलैंड स्थित अपनी सहायक कंपनी के जरिए करेगी। इसे रूट इन्वेस्टमेंट कहा जाता है। इससे टेस्ला को भारत में कैपिटल गेन और डिविडेंड भुगतान टैक्स पर फायदा मिलेगा।

रूट इन्वेस्टमेंट से टेस्ला को फायदा

एलन मस्क की टेस्ला अमेरिका के कैलिफोर्निया में रिजस्टर्ड है। इसकी सहायक कंपनी नीदरलैंड में टेस्ला मोटर्स एम्सटर्डम के नाम से रजिस्टर्ड है। यह भारत में टेस्ला मोटर्स एंड एनर्जी के नाम से रजिस्टर हुई है। डच सब्सिडियरी से भारतीय सब्सिडियरी में निवेश पर टेस्ला को टैक्स संबंधित कई फायदे होंगे। इससे पहले 2017 में एमजी (MG) मोटर्स ने चीन के जरिए और किआ (KIA) मोटर्स ने साउथ कोरिया से भारत में इंट्री ली थी।

टेस्ला को भारत-नीदरलैंड टैक्स समझौता का मिलेगा फायदा

टैक्स एक्सपर्ट कहते हैं कि भारत-नीदरलैंड के साथ समझौता के तहत अगर विदेशी कंपनी अपनी भारतीय कंपनी की हिस्सेदारी किसी अन्य विदेशी कंपनी को बेचती है तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। वैसे भी नीदरलैंड की आकर्षक टैक्स रेट और मजबूत इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) के चलते यह देश अमेरिकी कंपनियों की पहली पसंद में शुमार है। इसी कारण टेस्ला ने नीदरलैंड के जरिए भारत में निवेश का रास्ता चुना है।

कंपनी को होने वाला मुनाफे पर भी टैक्स में रियायत

इसी तरह अगर निवेशक नीदरलैंड के जरिए आना चाहता है तो उसको कम डिविडेंड टैक्स और विथहोल्डिंग्स टैक्स कम रहेगा। विथहोल्डिंग्स टैक्स का अर्थ विदेशी कंपनियों को होने वाला प्रॉफिट या डिविडेंड पर लगने वाले टैक्स राशि को कहा जाता है। मौजूदा टैक्स कानूनों पर जानकार कहते हैं कि एंटी-अवॉइडेंस लॉ के साथ आने वाली कंपनियों के लिए अब रूट इन्वेस्टमेंट से टैक्स बचत करना आसान नही रह गया है।