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कोरोना ने बिगाड़ा हाल:आंशिक लॉकडाउन से आर्थिक रफ्तार पड़ी धीमी, फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन से लेकर रोजगार पर बुरा असर

मुंबई10 दिन पहले
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कोरोना की रफ्तार रोकने के लिए प्रमुख शहरों में लगे आंशिक लॉकडाउन से इकोनॉमी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। नतीजा यह रहा कि अप्रैल में फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन से लेकर रोजगार पर बुरा असर पड़ा।

यही नहीं, ई-वे बिल कलेक्शन, फ्यूल और इलैक्ट्रिसिटी डिमांड भी कमजोर हुए। देश में बढ़ते कोरोना के प्रसार से अन्य देशों के साथ हो रहे कारोबार की रफ्तार भी धीमी पड़ गई। हालांकि, वैक्सीनेशन की गति बढ़ने से इकोनॉमी में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

अप्रैल में आर्थिक कमजोरी को मापने वाले 5 इंडिकेटर से समझते हैं...

  • बेरोजगारी: कोरोना की दूसरी लहर को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन से रोजगार पर बुरा असर पड़ा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) बेरोजगारी दर भी चार महीने के उच्च स्तर को पार करते हुए 8% के करीब पहुंच गई है। अप्रैल में 75 लाख लोगों की नौकरी चली गई। मार्च में राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 6.50% रही थी।
  • ई-वे बिल कलेक्शन: अप्रैल में कलेक्शन पिछले साल नवंबर के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया। यह 5.9 करोड़ रुपए का रहा, जो मार्च में 7.1 करोड़ रुपए था।
  • फ्यूल डिमांड: लॉकडाउन का ही असर रहा कि पेट्रोल-डीजल जैसे प्रोडक्ट्स की डिमांड कमजोर हुई है। ब्लूमबर्ग डेटा के मुताबिक पेट्रोल की डिमांड अगस्त 2020 के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है। यह मार्च के मुकाबले अप्रैल में 6.3% कम हुआ है। डीजल की डिमांड भी 1.7% घटी है।
  • फॉरेन ट्रेड: 2 मई को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने की तुलना में अप्रैल में ट्रेड का आंकड़ा कमजोर हुआ है। अप्रैल में एक्सपोर्ट 30.21 अरब डॉलर का रहा, जो मार्च में 34.4 अरब डॉलर का था। इसी तरह इंपोर्ट भी अप्रैल में घटकर 45.45 अरब डॉलर का रहा, जबकि मार्च में 48.4 अरब डॉलर का था।
  • मैन्युफैक्चरिंग हालत: देश में मैन्युफैक्चरिंग को मापने वाला IHS मार्किट का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 55.5 रहा, जो मार्च में 55.4 रहा था। यानी यहां स्थिति काबू में है। यहां 50 से ज्यादा नंबर को पॉजिटिव माना जाता है। लेकिन पाबंदियों के चलते नए ऑर्डर और प्रोडक्शन की ग्रोथ रेट 8 महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया है।

इन आंकड़ों को देखते हुए ज्यादातर इकोनॉमिस्ट इसे कुछ समय की सुस्ती मान रहे, क्योंकि लॉकडाउन से लगभग सभी सेक्टर पर बुरा असर पड़ा है। मजदूर अपने घरों की ओर लौटे हैं, जिससे कारखानों में कामकाज धीमा हुआ है। इसके अलावा खपत भी पहले से कमजोर हुआ है।