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कोविड का सकारात्मक असर:सब्सक्रिप्शन मॉडल को सहूलियत और आर्थिक अनिश्चितता दे रही बढ़ावा, प्रॉडक्ट की ओनरशिप के बजाय सर्विस लेने में बढ़ी ग्राहकों की दिलचस्पी

नई दिल्ली12 दिन पहले
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कोरोना काल में दुनियाभर की अर्थव्यवस्था तो सुस्त रही, लेकिन सब्सक्रिप्शन बेस्ड मॉडल चल पड़े। दरअसल, कोविड पर काबू पाने के लिए दुनियाभर में अलग-अलग पैमाने पर लॉकडाउन किए गए। इसके चलते आर्थिक गतिविधियां घटीं और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी। इससे कंपनियां और ग्राहक, दोनों का जोर सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाने पर बढ़ा।

18% की चक्रवृद्धि दर से बढ़ रही सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी

ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म यूबीएस के मुताबिक, 2020 से सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी 18% की चक्रवृद्धि दर से बढ़ रही है। 2025 तक इसका साइज 1.5 लाख करोड़ डॉलर (109.42 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच सकता है। जानकारों के मुताबिक, कंपनियों और ग्राहकों, दोनों का झुकाव सब्सक्रिप्शन मॉडल की तरफ बढ़ने की वजह उनकी पसंद और उम्मीदों में हो रहे बदलाव हैं।

ओनरशिप के बजाय सर्विस लेने में बढ़ रही ग्राहकों की दिलचस्पी

ग्राहकों की दिलचस्पी अब प्रॉडक्ट की ओनरशिप के बजाय उनकी सर्विस लेने में बढ़ने लगी है। यह कंपनियों के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि उनको नियमित रूप से कमाई होती है। साल की शुरुआत में Zuora की तरफ से जारी सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी इंडेक्स (SEI) के मुताबिक, मार्च तक पिछले नौ साल में ग्लोबल सब्सक्रिप्शन इकोनॉमी में लगभग चार गुना से ज्यादा की ग्रोथ हुई है।

2023 में 75% हो जाएगा सब्सक्रिप्शन वाली कंपनियों का प्रतिशत

जहां तक सब्सक्रिप्शन बेस्ड इकोनॉमी की फ्यूचर ग्रोथ की बात है, तो गार्टनर ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि दुनियाभर में सीधे कस्टमर्स को सर्विस दे रहीं कंपनियों में से सब्सक्रिप्शन सर्विस ऑफर करने वाली कंपनियों का प्रतिशत 2023 में 75 पर्सेंट तक पहुंच जाएगा। उधर, IDC का कहना है कि 2022 तक सॉफ्टवेयर कंपनियों को 53% रेवेन्यू सब्सक्रिप्शन से आने लगेगा।

मुंबई-पुणे में बीयर की होम डिलीवरी के लिए सब्सक्रिप्शन सर्विस

दिलचस्प बात यह है कि यह सब्सक्रिप्शन मॉडल सिर्फ एंटरटेनमेंट, ओटीटी वगैरह तक सीमित नहीं है। कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान टैप्ड फ्लाइट नाम की ई-कॉमर्स कंपनी ने मुंबई और पुणे में बीयर की बोतलें घर तक पहुंचाने के लिए सब्सक्रिप्शन बेस्ड सर्विस शुरू की। उसमें हर महीने चार ब्रांड की तीन बोतलों (12 या 24 बोतल) वाले दो बॉक्स एक या दो बार मंगाई जा सकती हैं।

ट्रैक्टर और खेती-किसानी के उपकरण के लिए कमीशन बेस्ड रेंटल सर्विस

ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट मार्केट में यह मॉडल पहले से चल रहा है। पांच साल पहले महिंद्रा एंड महिंद्रा ने ट्रैक्टर और फार्म मैकेनाइजेशन सर्विस के लिए सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाया था। कंपनी ने खास तौर पर शुरू पूरे मालिकाना हक वाली कंपनी ट्रिंगो के जरिए ट्रैक्टर और खेती-किसानी के उपकरण किराए पर दिलाने के लिए कमीशन बेस्ड रेंटल सर्विस शुरू की थी। टैफे की JFarm सर्विस भी राजस्थान में किसानों को ट्रैक्टर और खेती किसानी के सामान किराए पर दिलाती है।

पैसेंजर कार सेगमेंट में बढ़ रही सब्सक्रिप्शन मॉडल की पॉपुलैरिटी

अगर इंडियन मार्केट की बात करें तो ऑटो सेक्टर यानी इसके पैसेंजर कार सेगमेंट में सब्सक्रिप्शन मॉडल काफी पॉपुलर हो रहा है। देश के सबसे बड़े ब्रांड मारुति सुजुकी ने हाल ही में 'मारुति सुजुकी सब्सक्राइब' को विस्तार देने का ऐलान किया है। इसमें कस्टमर ब्रांड न्यू S-क्रॉस, इग्निस और वैगन-आर कार बिना खरीदे मंथली सब्सक्रिप्शन चार्ज देकर तय समय तक यूज कर सकते हैं। स्कीम के तहत कंपनी दिल्ली में ग्राहकों को WagonR Lxi हर महीने 12,722 रुपए के सब्सक्रिप्शन चार्ज पर ऑफर कर रही है। इग्निस सिग्मा के लिए उसने 48 महीनों के लिए 13,772 रुपए का मंथली चार्ज तय किया है।

गाड़ियों के 'ऐड-ऑन फीचर्स' में शामिल हो सकता है सब्सक्रिप्शन मॉडल

मारुति सुजुकी की तरह दिग्गज कोरियाई कार कंपनी हुंडई ने भी रेव के साथ पार्टनशिप में सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू किया है। जानकारों का कहना है कि 2021 में दूसरी कार कंपनियां भी सब्सक्रिप्शन मॉडल को अपना सकती हैं। और-तो-और आने वाले समय में गाड़ियों की बिक्री के लिए 'ऐड ऑन फीचर्स' में कंपनियां सब्सक्रिप्शन मॉडल को भी शामिल कर सकती हैं।

IT ने खत्म की पेमेंट कलेक्शन की दिक्कत, दिया सब्सक्रिप्शन मॉडल को बढ़ावा

यूं तो सब्सिक्रप्शन बेस्ड मॉडल दशकों से चला आ रहा है लेकिन इसमें पेमेंट कलेक्शन को लेकर बड़ी दिक्कत आती थी। टेक्नोलॉजी ने उस समस्या का समाधान कर दिया। इसमें फाइनेंशियल मार्केट भी एक बड़ा फैक्टर रहा है जो नियमित आमदनी वाली कंपनियों को खूब भाव देता है। कंपनियों पर ज्यादा से ज्यादा कस्टमर बनाने और उनको बनाए रखने का दबाव भी अहम रोल अदा कर रहा है।

ग्राहकों को मिलता है एकमुश्त भुगतान और लॉन्ग टर्म कमिटमेंट से छुटकारा

सब्सक्रिप्शन बेस्ड मॉडल ग्राहकों और सर्विस/प्रॉडक्ट को सर्विस के तौर पर ऑफर करने वाली कंपनियों, दोनों के लिए फायदेमंद है। कंपनियों को सब्सक्रिप्शन पीरियड तक कमाई का पक्का जरिया मिल जाता है। उन्हें यह भी पता रहता है कि कितनी कमाई होने वाली है। जहां तक ग्राहकों की बात है, तो इस मॉडल में उनको सर्विस लेने और पेमेंट करने में सहूलियत होती है।

हेल्थ-फिटनेस ऐप और म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विसेज के यूज में सहूलियत

ओटीटी की मिसाल लेते हैं: आप किसी फेवरेट सीरीज के लिए ओटीटी का तीन महीने का सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं। यह हर महीने अपने आप रिन्यू हो जाएगा, आपको पेमेंट डेट याद रखने की माथापच्ची करने की जरूरत नहीं होती। हेल्थ और फिटनेस ऐप और म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप जैसे लाइफस्टाइल सर्विसेज के साथ भी ऐसा ही है।

कॉस्मेटिक्स से कंसल्टिंग और बैंकिंग तक में आ सकता है सब्सक्रिप्शन मॉडल

डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम ने वन टाइम पेमेंट की जगह सब्सक्रिप्शन वाले मॉडल को बढ़ावा दिया है। आनेवाले समय में इसका असर सिर्फ ओटीटी प्लेटफॉर्म को (एंटरटेनमेंट के लिए) किए जाने वाले पेमेंट तक सीमित नहीं रहेगा। जानकारों के मुताबकि, 'पेट फूड' से लेकर कॉस्मेटिक्स, एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर से कंसल्टिंग, यहां तक कि बैंकिंग सर्विसेज तक में सब्सक्रिप्शन बेस्ड मॉडल आ सकता है।

साइबर अटैक होने पर कस्टमर की डिटेल गलत हाथों में जाने का रिस्क

सब्सक्रिप्शन वाले मॉडल में कुछ दिक्कतें भी हैं। इसमें ग्राहक की पेमेंट डिटेल मर्चेंट के प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहती है। साइबर अटैक होने पर डिटेल के गलत हाथों में जाने का रिस्क होता है। ऐसी सूरत में उपभोक्ताओं को किसी तरह के फर्जीवाड़े से बचाने के लिए रिजर्व बैंक ने कुछ नियम बनाए हैं। इसमें ऑटो रिन्यूअल के लिए बैंक या कार्ड कंपनी के लिए कस्टमर की इजाजत मांगना जरूरी बना दिया गया है।

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