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अमेरिका और चाइना आमने-सामने /चीन किसी भी कीमत पर माइक्रोसॉफ्ट को नहीं खरीदने देगा टिक टॉक, वॉशिंगटन के खिलाफ एक्शन की दी धमकी

टिक टॉक को भारत में बैन किया जा चुका है जबकि कई देशों में इसके खिलाफ अभियान चल रहे हैं टिक टॉक को भारत में बैन किया जा चुका है जबकि कई देशों में इसके खिलाफ अभियान चल रहे हैं

  • ग्लोबल टाइम्स ने लिखा चीन के पास कंपनियों की रक्षा करने के लिए सीमित क्षमता है
  • अगर डील नहीं होती है तो गूगल और एपल जैसे ऐप से टिक टॉक को हटाया जा सकता है

मनी भास्कर

Aug 04,2020 06:14:55 PM IST

मुंबई. चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली ने मंगलवार को संपादकीय में कहा कि चीन की सरकार माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प द्वारा टिक टॉक को खरीदने की मंजूरी नहीं देगी। चीन अमेरिकी अधिग्रहण को स्वीकार नहीं करेगा। अगर उसे बेचने के लिए मजबूर किया जाता है तो वह वॉशिंगटन के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

15 सितंबर से बैन हो जाएगा टिक टॉक

यह बीजिंग द्वारा बाइट डांस लिमिटेड और उसके वायरल वीडियो के लिए अब तक का सबसे मजबूत डिफेंस है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह कह कर टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है कि इसे माइक्रोसॉफ्ट या एक और अमेरिकी कंपनी को बेचने का सौदा 15 सितंबर से पहले हो जाना चाहिए।

ग्लोबल टाइम्स ने कहा जबरन खरीदने की कोशिश स्वीकार नहीं होगी

ग्लोबल टाइम्स जैसे प्रमुख सरकारी मीडिया के हवाले से कहा गया है कि यह प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर स्वीकृत चोरी के समान है। चाइना डेली ने कहा कि चीन किसी भी तरह से एक चीनी आईटी कंपनी को जबरन खरीदने जैसी हरकतों को स्वीकार नहीं करेगा। अगर प्रशासन अपनी योजनाबद्ध लूट और हड़प को अंजाम देता है तो इसका जवाब देने के लिए बहुत सारे तरीके हैं।

टिक टॉक के जरिए बाइट डांस सबसे बड़ी स्टार्टअप कंपनी

टिक टॉक के देश विदेश में सफलता की बदौलत बाइटडांस दुनिया की सबसे बड़ी स्टार्टअप बन गई है। इसे अमेरिकी सांसदों ने डेटा को वैक्यूम करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया। ट्रम्प अब अमेरिकी एंटिटी लिस्ट में टिक टॉक को जोड़कर बाइटडांस की बेशकीमती संपत्ति को संभावित रूप से माइक्रोसॉफ्ट के जरिए अधिग्रहण करना चाहते हैं। अगर ऐसा नहीं भी होता है तो फिर एप्पल इंक और गूगल जैसी अमेरिकी कंपनियों को अपने ऐप स्टोर्स से ऐप को हटाने के लिए मजबूर भी किया जा सकता है।

ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने कहा कि यह खुली डकैती जैसा है

अमेरिका की कार्रवाई को अलग-अलग तरीके से देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे फ्री स्पीच और पूंजीवाद के साथ धोखा बता रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक दुश्मनी और उसकी आईटी इंडस्ट्री को वश में क़रने के लिए जायज ठहरा रहे हैं। ट्रम्प ने सोमवार को कई बार जोर देकर कहा कि टिक टॉक के अमेरिकी अभियानों की किसी भी बिक्री में अमेरिका को पर्याप्त पेमेंट करना होगा। कम्युनिस्ट पार्टी के पीपुल्स डेली के ग्लोबल टाइम्स के एडिटर-इन-चीफ हू शी जिन ने ट्वीट किया कि यह एक खुली डकैती है।

दोहरे मापदंड के लिए वॉशिंगटन की आलोचना

अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि चीन क्या तरीका अपना सकता है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीन के पास अपनी कंपनियों की रक्षा करने के लिए सीमित क्षमता है। चीन के विदेश मंत्रालय ने पहले टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश में दोहरे मापदंड के लिए वाशिंगटन की आलोचना की है। लेकिन सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में ताजा घटनाक्रम के बारे में पूछे जाने पर एक प्रवक्ता ने कहा कि हम भी संबंधित कंपनियों की विशेष व्यवसायिक गतिविधियों पर कमेंट नहीं करते हैं।

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टिक टॉक को भारत में बैन किया जा चुका है जबकि कई देशों में इसके खिलाफ अभियान चल रहे हैंटिक टॉक को भारत में बैन किया जा चुका है जबकि कई देशों में इसके खिलाफ अभियान चल रहे हैं

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