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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा:निवेशकों के लिए बनेगा सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम, दफ्तरों के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति

नई दिल्ली7 महीने पहले
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केंद्र सरकार देश में कारोबार को बढ़ावा देने में जुटी है। इसके लिए ईज ऑफ डूइंग के तहत कई प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। अब सरकार निवेशकों के लिए 15 अप्रैल से सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लाने जा रही है। इस सिस्टम के लागू होने के बाद निवेशकों को कारोबार शुरू करने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के सचिव गुरुप्रसाद मोहपात्रा का कहना है कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सिंगल-विडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू किया जा रहा है।

केंद्र-राज्यों के सभी विभागों को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा

मोहपात्रा ने कहा कि नया कारोबार शुरू करने के लिए इस सिंगल-विंडो पोर्टल पर सभी प्रकार की मंजूरियां मिलेंगी। इसके लिए केंद्र-राज्यों के सभी विभागों को इसी पोर्टल पर लाया जाएगा। मोहपात्रा ने कहा कि हमने निवेशकों का हाथ पकड़कर काफी मदद की है। अब हम निवेशकों के लिए नेशनल सिंगल-विंडो पोर्टल लॉन्च करने जा रहे हैं। इसके लिए हमने 15 अप्रैल का लक्ष्य तय किया है। शुरुआत में केंद्र सरकार और 14 राज्य सरकारों के विभाग इस पोर्टल पर उपलब्ध होंगे।

अपने आवेदन की निगरानी कर सकेंगे निवेशक

DPIIT सचिव गुरुप्रसाद मोहपात्रा ने कहा कि यह सिस्टम शुरू होने के बाद निवेशक एक तरफ होंगे और केंद्र-राज्य सरकारों की सभी प्रकार की मंजूरियां दूसरी तरफ होंगी। मोहपात्रा ने कहा कि इस पोर्टल पर निवेशक अपने आवेदन की निगरानी कर सकेंगे। वह देख सकेंगे कि उनका आवेदन कहां अटका हुआ है? संबंधित विभाग या राज्य ने उनके आवेदन पर क्या कार्यवाही की है? उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अब राज्य सरकारों को अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मंजूरियों से संबंधी बोझ कम करना चाहिए।

दो चरणों में की जा रही है तैयारी

मोहपात्रा ने कहा कि कारोबार संबंधी मंजूरियों का बोझ कम करने के लिए दो चरणों में तैयारी की जा रही है। पहला चरण 31 मार्च तक पूरा हो जाएगा, जबकि दूसरे चरण को पूरा करने के लिए 15 अगस्त 2021 की डेडलाइन तय की गई है। पहले चरण में 6 क्षेत्रों में रेगुलेटरी बोझ को घटाने का कम चल रहा है। इसमें लाइसेंस का रिन्युअल, आकस्मिक निरीक्षण, रिटर्न-फाइलिंग के लिए समान मानक, डिजिटाइजेशन और सभी प्रकार के मैन्युअल रिकॉर्ड-प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है।

अप्रैल के अंत तक जारी हो जाएगा PLI संबंधी नोटिफिकेशन

प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के बारे में बोलते हुए मोहपात्रा ने कहा कि यह कुल 1.97 लाख करोड़ रुपए की स्कीम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अप्रैल के अंत तक प्रत्येक सेक्टर के लिए अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी हो जाएगा। इस स्कीम में सबसे पहले मोबाइल और कुछ निश्चित इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को शामिल किया गया था। इसके बाद API, मेडिकल डिवाइसेज और फार्मा को इस स्कीम में शामिल किया गया। नवंबर 2020 में 10 और सेक्टर्स को इस स्कीम में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सेक्टर में यह स्कीम 5 साल के लिए लागू की जाएगी। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और कंपनियों को सूचना दे दी गई है।

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