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इंफ्रा सेक्टर में मांग बढ़ने से मिलेगा सपोर्ट:सीमेंट कंपनियों की बिक्री 13% बढ़ सकती है, एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है

3 महीने पहले
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  • डीजल, पेट कोक या कोयले और पॉलिप्रॉपिलीन जैसे कच्चे माल के महंगा होने से लागत 150 से 200 रुपए प्रति टन बढ़ सकती है
  • 2021-22 में इंफ्रा सेक्टर के बजट प्रावधान में 26% बढ़ोतरी के हिसाब से इंफ्रा डेवलपमेंट पर होने वाला खर्च ज्यादा रह सकता है

सीमेंट इंडस्ट्री की सेल्स वॉल्यूम ग्रोथ अगले वित्त वर्ष में एक दशक के उच्चतम स्तर 13% पर पहुंच सकती है। इसमें इंफ्रा सेक्टर और अर्बन हाउसिंग सेक्टर की मांग में उम्मीद के मुताबिक होने वाली रिकवरी का बड़ा योगदान होगा। यह अनुमान ग्लोबल रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स ने दिया है।

क्रेडिट आउटलुक में स्थिरता रहेगी, मार्जिन घटेगा

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक सेल्स वॉल्यूम में बढ़ोतरी बिजली और इंधन की लागत में इजाफे से कैश अक्रुअल पर पड़ने वाले असर को काट देगी। इससे सीमेंट कंपनियों के क्रेडिट आउटलुक में स्थिरता बनी रहेगी। क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, 'उनके सेल्स वॉल्यूम में रिकवरी होगी लेकिन कॉस्ट ज्यादा होने से अगले वित्त वर्ष में प्रॉफिट मार्जिन घटेगा।'

लागत 150 से 200 रुपए प्रति टन बढ़ सकती है

क्रिसिल रेटिंग्स का कहना है कि डीजल, पेट कोक या कोयले और पॉलिप्रॉपिलीन जैसे कच्चे माल के महंगा होने से सीमेंट कंपनियों की लागत 150 से 200 रुपए प्रति टन बढ़ सकती है। इनकी कुल लागत में ढुलाई, बिजली और इंधन का हिस्सा लगभग 55% होता है।

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, 'इंफ्रा सेक्टर और अर्बन हाउसिंग की तरफ से सीमेंट की मांग बढ़ने का मतलब उनको ज्यादा सेल्स प्राइस पर खूब ध्यान देने वाले नॉन ट्रेड चैनल से मिलेगी। इससे सीमेंट का कम दाम मिल सकता है।'

गांवों में आमदनी बढ़ने से मांग में मजबूती रह सकती है

क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर नितेश जैन ने रिपोर्ट के बाबत कहा कि गांवों में आमदनी बढ़ने से सीमेंट की मांग में मजबूती बनी रह सकती है। ग्रामीण इलाकों की मजबूत मांग ने कोविड-19 से प्रभावित वित्त वर्ष 2020-21 में सीमेंट कंपनियों को बड़ा सहारा दिया है।

शहरों में मकानों की दबी मांग निकलने से सेल्स बढ़ेगी

जैन ने कहा, '2021-22 में इंफ्रा सेक्टर के बजट प्रावधान में 26% बढ़ोतरी के हिसाब से इंफ्रा डेवलपमेंट पर होने वाला खर्च ज्यादा रह सकता है। कोविड-19 के चलते शहरी इलाकों में मकानों की दबी मांग निकलने से भी सीमेंट की सेल्स बढ़ेगी।'

ऑपरेटिंग प्रॉफिट 200-250 रुपए प्रति टन घट सकता है

क्रिसिल रिसर्च की डायरेक्टर ईशा चौधरी कहती हैं कि लागत बढ़े होने और दाम कम मिलने से सीमेंट कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 200-250 रुपए प्रति टन घट सकता है। लेकिन इसका उनके कैश अक्रुअल पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि ज्यादा सेल्स वॉल्यूम से कम प्रॉफिट मार्जिन की भरपाई हो जाएगी।

सेल्स वॉल्यूम में इस वित्त वर्ष दो पर्सेंट कमी आ सकती है

रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 के चलते वित्त वर्ष 2021 में सीमेंट इंडस्ट्री का सेल्स वॉल्यूम दो पर्सेंट घट सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जून तिमाही के वॉल्यूम में 31% की रिकवरी होने से पूरे वित्त वर्ष में सेल्स में गिरावट 1-2% तक सिमट सकती है।

मजबूत बैलेंसशीट होने से क्रेडिट प्रोफाइल पर कम असर

रिपोर्ट के मुताबिक सीमेंट कंपनियां मांग में गिरावट आने के चलते पूंजी निवेश घटाते हुए कैश बचाकर रख रही हैं। पर्यात नकदी और मजबूत बैलेंसशीट होने से सीमेंट कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल पर कोविड-19 का कम असर हुआ है।

डिमांड में रिकवरी से विस्तार योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा

क्रिसिल अपनी रिपोर्ट में लिखती है, 'अर्बन हाउसिंग और इंफ्रा सेक्टर की मांग में गिरावट की भरपाई ग्रामीण इलाकों की मांग में बढ़ोतरी से हो गई। डिमांड में रिकवरी होने से सीमेंट कंपनियों की विस्तार योजनाओं को बढ़ावा मिल सकता है।'

अहम इंफ्रा प्रोजेक्ट के लिए समय पर फंड जारी होना जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमेंट की मांग में बढ़ोतरी के लिए बजट में घोषित अहम हाउसिंग और इंफ्रा प्रोजेक्ट के लिए समय पर फंड जारी होना जरूरी है। अगर कोविड-19 के मामलों में उछाल आती है तो इकोनॉमिक रिकवरी बेपटरी हो जाएगी।

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