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आर्थिक तस्वीर:उम्मीद से बेहतर हुई रिकवरी, लेकिन कोरोना संक्रमण फिर बढ़ने से गिरावट का बढ़ा जोखिम : शक्तिकांत दास

नई दिल्ली7 महीने पहले
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त्योहारों के बाद मांग बने रहने और वैक्सीन को लेकर बाजार की उम्मीदों में संभावित बदलावों को लेकर हमें सतर्क रहना होगा - Money Bhaskar
त्योहारों के बाद मांग बने रहने और वैक्सीन को लेकर बाजार की उम्मीदों में संभावित बदलावों को लेकर हमें सतर्क रहना होगा
  • RBI के गवर्नर ने कहा, अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोलते जाने से घरेलू बचत बढ़ाने और विकास के लिए जरूरी फंड हासिल करने में मदद मिल सकती है
  • बाजार के सभी सगेमेंट में स्थिरता और तेजी आई है और एक्सटर्नल बैलेंस और करेंट अकाउंट सरप्लस ने सुविधाजनक स्थिति बनाई है

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि इस कारोबारी साल की पहली तिमाही में GDP में भारी गिरावट आने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर रिकवरी दिखाई है। उन्होंने हालांकि कहा कि कोरोनावायरस संक्रमण के मामलों में फिर से हो रही बढ़ोतरी से गिरावट का जोखिम बना हुआ है। त्योहारों के बाद मांग बने रहने और वैक्सीन को लेकर बाजार की उम्मीदों में संभावित बदलावों को लेकर हमें सतर्क रहना होगा।

फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FEDAI) के चौथे एनुअल डे में शक्तिकांत दास ने कहा कि अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोलते जाने से घरेलू बचत बढ़ाने में मदद मिल सकती है और विकास के लिए जरूरी फंड भी मिल सकता है। बाजार के प्रतिभागियों ने भी तेजी के साथ प्रतिक्रिया की है और उनके साथ मिलकर हमने बाजार के सभी सगेमेंट में स्थिरता और तेजी सुनिश्चित की है। इसके साथ ही बेहतर एक्सटर्नल बैलेंस और करेंट अकाउंट सरप्लस ने सुविधाजनक स्थिति बनाई है।

वित्तीय बाजारों के अंतरराष्ट्रीयकरण से ट्रांजेक्शन कॉस्ट घट सकता है और कार्यक्षमता बढ़ सकती है

गवर्नर ने आगे कहा कि वित्तीय बाजारों के अंतरराष्ट्रीयकरण से ट्रांजेक्शन कॉस्ट घट सकता है और कार्यक्षमता बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि कैपिटल अकाउंटल आज काफी हद तक कन्वर्टिबल है। उन्होंने यह भी कहा कि उदारीकरण की गति को तेज करने के लिए RBI ने अगले चरण के सुधारों के लिए कदम उठाए हैं।

हाल के सुधार 4 प्रमुख थीम पर आधारित हैं

शक्तिकांत दास ने कहा कि हाल के सुधार 4 प्रमुख थीम के आधार पर किए गए हैं। ये हैं- 1. वित्तीय बाजारों का उदारीकरण और मार्केट रेगुलराइजेशन का सरलीकरण, 2. फाइनेंशियल मार्केट्स का अंतरराष्ट्रीयकरण, 3. बाय साइड की सुरक्षा- यूजर प्रोटेक्शन और 4. रिजाइलिएंस और सेफ्टी सुनिश्चित करना।

ऑपरेटिंग कंडीशन बेहतर हुआ है

RBI के गवर्नर ने साथ ही कहा कि रेगुलेशन सरल करने आौर प्रोसीजरल फ्लेक्सिबिलिटी देने से ऑपरेटिंग कंडीशन बेहतर हुआ है और इसके कारण कॉस्ट और अक्षमता घटी है। लक्षित परिणाम का हासिल होना इस बात पर निर्भर करेगा कि फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और बाजार रिफॉर्म एजेंडा को आगे बढ़ाएं, ताकि भारत का फाइनेंशियल मार्केट वाइब्रेंट हो और फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन सक्षम हो।

बैंकिंग में कारोबारी घरानों को प्रवेश देने की सलाह सुनने में तो अच्छा लेकिन गलत दिशा में : कौशिक बसु

इस बीच विश्व बैंक के पूर्व चीफ इकॉनोमिस्ट कौशिक बसु ने गुरुवार को RBI के इंटर्नल वर्किंग ग्रुप की सलाह की आलोचना करते हुए कहा कि बैंकिंग में कारोबारी घरानों को प्रवेश देने की सलाह सुनने में तो अच्छी लगती है, लेकिन यह गलत दिशा में है। इससे क्रोनी कैपिटलिज्म को बढ़ावा मिलेगा तथा इसके कारण वित्तीय अस्थिरता बढ़ेगी। सभी सफल अर्थव्यवस्थाओं में एक ओर उद्योग व कॉरपोरेशन और दूसरी ओर बैंक और कर्जदाता संस्थानों के बीच एक स्पष्ट विभाजन रेखा है।

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