पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Market Watch
  • SENSEX48832.030.06 %
  • NIFTY14617.850.25 %
  • GOLD(MCX 10 GM)470210.83 %
  • SILVER(MCX 1 KG)689701.52 %
  • Business News
  • Bad Loans Of Banks May Rise Sharply, To Reach 10.2% In March 2022, Estimates ICRA

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

राहत बंद होने से बढ़ेगी बैंकों की मुश्किल:इस साल ऊंचे लेवल पर रहेगा बैड लोन, मार्च 2022 में 10.2% तक पहुंच सकता है: इकरा

12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • वित्त वर्ष 2020-21 के अंत में कुल बैड लोन बढ़कर 9.7% तक जा सकता है
  • कुल बैड लोन मार्च 2020 में 8.6% जबकि दिसंबर 2020 के अंत में 8.3% था

कोविड क्राइसिस के बीच इकोनॉमी को सपोर्ट के लिए सरकार और रिजर्व बैंक ने जो राहत दिए थे उनके खत्म होने से इस साल बैंकों के कुल बैड लोन में तेज उछाल आ सकता है। घरेलू रेटिंग एजेंसी इकरा ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा है कि वित्त वर्ष 2020-21 के अंत में कुल बैड लोन बढ़कर 9.6-9.7% तक जा सकता है। इंटरनेशनल रेटिंग एजेंसी मूडीज की इंडियन यूनिट ने वित्त वर्ष 2022 के अंत तक बैंकों के कुल बैड लोन के 9.9-10.2% तक पहुंचने का अनुमान लगाया है।

मोरैटोरियम हटने के बाद कुल बकाया लोन का लेवल बढ़ा है

इकरा रेटिंग्स के फाइनेंशियल सेक्टर रेटिंग्स- हेड अनिल गुप्ता ने कहा, 'मोरैटोरियम हटने के बाद कुल बकाया लोन का लेवल बढ़ा है। इन सबका असर पिछले और इस वित्त वर्ष में लंबे समय तक दिखेगा। इकोनॉमी को राहत देने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक की तरफ से किए उपायों से बैंकों का प्रॉफिट मार्जिन और पूंजी बड़े झटकों से बचे रहे हैं।'

दिसंबर 2020 के अंत में 8.3% था बैंकों का कुल बैड लोन

बैंकों का कुल बैड लोन मार्च 2020 में 8.6% जबकि दिसंबर 2020 के अंत में 8.3% था। इस कमी की वजह मार्च 2021 को खत्म वित्त वर्ष में नौ महीनों के दौरान किए गए 1.1 लाख करोड़ रुपए के लोन राइट ऑफ थे। यानी इतनी रकम के लोन वसूली लायक नहीं होने के चलते बट्टे खाते में डाले गए थे। रेटिंग फर्म के मुताबिक लोन रिस्ट्रक्चरिंग कुल लोन के 1.3-1.5% बराबर रह सकता है जो शुरुआती अनुमान से काफी कम है।

पहले नौ महीनों में नया बैड लोन कम रहने की बड़ी वजह लोन मोरैटोरियम

कोविड के चलते लोगों की उधार चुकाने की कैपेसिटी घटने के बावजूद बैंकों का नया बैड लोन दिसंबर 2020 के अंत में काफी कम 1.8 लाख करोड़ रूपए रहा जो साल भर पहले दोगुना यानी 3.6 लाख करोड़ रुपए था। पहले नौ महीनों में नया बैड लोन कम रहने की वजह लोन मोरैटोरियम, एसेट क्लासिफिकेशन पर लगी रोक और गारंटीड इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन (GECL) के अंदर बॉरोअर को दी गई राहत है।

पुराने बैड लोन पर बड़े प्रोविजन के चलते नेट एनपीए पिछले साल से कम रहेगा

वैसे भी प्रोविजन वाला बैड लोन यानी नेट एनपीए पिछले साल के मुकाबले कम रह सकता है क्योंकि बैंकों ने पुराने बैड लोन के लिए बड़े प्रोविजन किए हुए हैं। प्रोविजनिंग वह रकम होती है जो बैंक किसी लोन के डूबने पर उसकी भरपाई के लिए अलग रखती है। उस रकम से वह लोन नहीं बांट सकता।

खबरें और भी हैं...