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गौतम अडाणी की बड़ी योजना:29 हजार करोड़ रुपए के IPO की तैयारी, अडाणी एयरपोर्ट होगी लिस्ट, 6 एयरपोर्ट को करती है ऑपरेट

मुंबई5 दिन पहले
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  • देश में कुल 6 एयरपोर्ट 50 सालों के लिए अडाणी की कंपनी को अलॉट हुए थे
  • लखनऊ, मंगलुरू, जयपुर, गोवाहाटी, तिरुअनंतपुरम और अहमदाबाद एयरपोर्ट शामिल

एशिया के दूसरे और विश्व के 14 वें सबसे अमीर बिजनेसमैन गौतम अडाणी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उनकी बड़ी योजना है। खबर है कि वे अपनी ग्रुप कंपनी अडाणी एयरपोर्ट को शेयर बाजार में लिस्ट कराएंगे। इसके जरिए वे 25 से 29 हजार करोड़ रुपए की भारी-भरकम रकम जुटाएंगे।

अडाणी की 6 कंपनियां हैं लिस्टेड

फिलहाल अडाणी ग्रुप की कुल 6 कंपनियां लिस्टेड हैं। इनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 8.50 लाख करोड़ रुपए है। मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से अडाणी ग्रीन एनर्जी है। इसका मार्केट कैप 1.93 लाख करोड़ रुपए है। पिछले हफ्ते यह 2 लाख करोड़ रुपए था। कंपनी की योजना अडाणी एयरपोर्ट होल्डिंग को ग्रुप की अलग एयरपोर्ट बिजनेस वाली होल्डिंग कंपनी बनाना है।

इंफ्रा किंग ऑफ इंडिया बनना चाहते हैं अडाणी

दरअसल अडाणी भारत का इंफ्रा किंग बनना चाहते हैं। उनकी ज्यादातर कंपनियां इसी सेक्टर में काम करती हैं। कोयले के बिजनेस से लेकर खनन, पोर्ट और पावर प्लांट में उनकी कंपनियां अच्छा खासा बिजनेस कर रही हैं। अब नए बिजनेस उनकी नजर में एयरपोर्ट के अलावा रक्षा और डाटा सेंटर पर है।

2019 में एयरपोर्ट बिजनेस में प्रवेश किया

साल 2019 में अडाणी एयरपोर्ट ने एयरपोर्ट बिजनेस में प्रवेश किया था। इसे देश में कुल 6 एयरपोर्ट 50 सालों के लिए अलॉट हुए थे। इसमें लखनऊ, मंगलुरू, जयपुर, गोवाहाटी, तिरुअनंतपुरम और उनके खुद के राज्य गुजरात का अहमदाबाद एयरपोर्ट शामिल था। इसके अलावा उनकी मुंबई एयरपोर्ट में भी हिस्सेदारी है। मुंबई एयरपोर्ट देश का दूसरा सबसे व्यस्ततम एयरपोर्ट है। इसमें 74% उनकी हिस्सेदारी है। इससे नई मुंबई में बनने वाले नए एयरपोर्ट में भी उनकी हिस्सेदारी तय हो चुकी है।

बहुत ही कम समय में अडाणी ग्रुप ने एयरपोर्ट बिजनेस में देश में अपनी पैठ बना ली है। भारत के एयर ट्रैवेल के यात्रियों के मामले में उनकी करीबन 10% हिस्सेदारी है।

हिस्सेदारी बेचकर जुटाई है रकम

हाल में अडाणी ने अपनी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर टॉप वैश्विक निवेशकों से अच्छी खासी रकम जुटाई है। इसमें अडाणी ग्रीन एनर्जी, अडाणी पावर ट्रांसमिशन, अडाणी टोटल गैस आदि हैं। टोटल कंपनी फ्रांस की है जो गैस बिजनेस में अडाणी के साथ है। अडाणी के फोकस में एयरपोर्ट नया ही है। अडाणी ग्रुप में जो बढ़त दिखी है, वह इसलिए क्योंकि ग्रुप पूरी तरह से मोदी की योजनाओं पर काम कर रहा है।

नेटवथ4 के मामले में अडाणी ग्रुप के गौतम अडाणी रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी से थोड़ा सा पीछे हैं।
नेटवथ4 के मामले में अडाणी ग्रुप के गौतम अडाणी रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी से थोड़ा सा पीछे हैं।

मोदी और अडाणी एक ही राज्य से आते हैं

मोदी और अडाणी एक ही राज्य से आते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजदीकियों के कारण अडाणी हमेशा विपक्ष के निशाने पर भी रहे हैं। अडाणी की नेटवर्थ बढ़ाने में ग्रुप के एनर्जी सेक्टर और उसमें भी रिन्युएबल कंपनी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बिजनेस के नजरिए से सरकार की कई पॉलिसी अडाणी ग्रुप के अनुकूल रही हैं।

1980 में कमोडिटी के बिजनेस से शुरू हुआ अडाणी ग्रुप

1980 में कमोडिटी का बिजनेस शुरू करने वाले गौतम अडाणी दुनिया में तब चर्चा में आए, जब वे ऑस्ट्रेलिया में 2010 में कोयला प्रोजेक्ट को जीतने में कामयाब रहे। हालांकि यह प्रोजेक्ट पर्यावरणवादियों के निशाने पर है। देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अभी तक इसे लोन देने से कतरा रहा है। यही कारण है कि यह प्रोजेक्ट अभी भी फंसा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया के कोयला प्लांट के लिए अडाणी 86 कंपनियों के टेंडर में से एक चुने गए थे।

1.47 लाख करोड़ रुपए का है कर्ज

अडाणी समूह पर कुल 1.47 लाख करोड़ रुपए का बैंकों का और अन्य कंपनियों का कर्ज है। इस चालू वर्ष यानी अप्रैल से मार्च 2022 तक कंपनी ने 12 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है और इसे एयरपोर्ट बिजनेस में खर्च करेगी। अगले 3-5 सालों में कंपनी 30 हजार करोड़ रुपए एयरपोर्ट बिजनेस पर निवेश करेगी। इससे उसके ऊपर कर्ज बढ़ कर 21 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा। अडाणी ग्रुप ने श्रीलंका में पोर्ट टर्मिनल को डेवलप करने का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है।

ग्रुप की कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने देशभर में डेटा सेंटर डेवलप और ऑपरेट करने के लिए EdgeConneX के साथ पिछले महीने ही समझौता किया।

इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से बने मजबूत

IEEFA में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के डायरेक्टर टिम बकले ने कहा कि अदाणी समझदार कारोबारी हैं और लंबे समय से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश करते आ रहे हैं। जब तक भारत मजबूत विकास की गति को बनाए रखता है, तब तक इस ग्रुप के उनकी लीडरशिप में बहुत आगे जाने की संभावना है। अडाणी ने सितंबर में जेपी मॉर्गन इंडिया समिट में कहा था कि भारत के बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करना हमारे राष्ट्र निर्माण के दर्शन का मोटो है। हमारे ग्रुप ने हजारों नौकरियां पैदा की हैं। अपने शेयरधारकों को अच्छा रिटर्न दिया है।

अडाणी की दिलचस्पी केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं के साथ मिलती है

विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए अडाणी की दिलचस्पी भी केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं के साथ मिलती है। वारबर्ग ने इस महीने अडाणी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन में 110 करोड़ डॉलर का निवेश किया। फ्रांस की कंपनी टोटल ने अडाणी ग्रीन में कुल 1.81 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया। आने वाले समय में अडाणी ग्रुप इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर जनरेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में अपनी अच्छी खासी पैठ बनाने के लिए पूरी कोशिश में है, जिसका नतीजा आने वाले वक्त में देखने को मिलेगा।