रेटिंग एजेंसी का अनुमान /मोराटोरियम से बढ़ेगी बैंकों की मुसीबत, वित्त वर्ष 2021 में पांच बड़े प्राइवेट बैंकों का एनपीए हो जाएगा दोगुना से ज्यादा 

लोन की मांग कम होने के कारण बैंक अपनी अतिरिक्त लिक्विडिटी को लो-यील्ड जैसे विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। इसमें सरकारी बॉन्ड और अच्छी रैंकिंग वाली कॉरपोरेट सिक्युरिटीज शामिल हैं।  लोन की मांग कम होने के कारण बैंक अपनी अतिरिक्त लिक्विडिटी को लो-यील्ड जैसे विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। इसमें सरकारी बॉन्ड और अच्छी रैंकिंग वाली कॉरपोरेट सिक्युरिटीज शामिल हैं। 

  • बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में 4 फीसदी की कमी होगी: इंडिया रेटिंग्स
  • लोन की मांग कम होने के कारण दूसरे विकल्पों में निवेश कर रहे हैं बैंक

मनी भास्कर

Jul 11,2020 12:04:06 PM IST

नई दिल्ली. कोविड-19 से निपटने के लिए लागू की गई लोन मोराटोरियम की सुविधा बैंकों के लिए मुसीबत बन सकती है। इंडिया रेटिंग्स की ओर से शुक्रवार को जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मोराटोरियम के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन और लोन वितरण में कमी के चलते देश के पांच बड़े बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) बढ़कर 5 फीसदी से ज्यादा हो सकता है। इसमें एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और इंडसइंड बैंक शामिल हैं। इन पांचों बैंकों की सामूहिक रूप से बैंकिंग सिस्टम में 25 फीसदी और प्राइवेट बैंकिंग स्पेस में 75 फीसदी हिस्सेदारी है।

वित्त वर्ष 2020 में 2.7 फीसदी रहा इन बैंकों का एनपीए

इंडिया रेटिंग्स की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इन बैंकों का एनपीए वित्त वर्ष 2020 के 2.7 फीसदी से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 5 फीसदी के करीब पहुंच सकता है। वित्त वर्ष 2019 में इन बैंकों का एनपीए 2.3 फीसदी रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, एनपीए की बढ़ोतरी भले ही कम हो सकती है लेकिन रिफाइनेंसिंग की चुनौती बनी रहेगी। इसका नतीजा यह होगा कि नेट इंटरेस्ट मार्जिन में 4 फीसदी की कमी होगी। लोन की मांग कम होने के कारण बैंक अपनी अतिरिक्त लिक्विडिटी को लो-यील्ड जैसे विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। इसमें सरकारी बॉन्ड और अच्छी रैंकिंग वाली कॉरपोरेट सिक्युरिटीज शामिल हैं।

वित्त वर्ष 2020 में डिपॉजिट में 18.8 फीसदी की ग्रोथ

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में इन पांच बैंकों की डिपॉजिट ग्रोथ 18.8 फीसदी रही है। वित्त वर्ष 2019 में डिपॉजिट ग्रोथ 18.5 फीसदी रही थी। वहीं, इस अवधि में लोन ग्रोथ 19.1 फीसदी से घटकर 15 फीसदी पर आ गई है। इसके अतिरिक्त पिछले 6 महीनों में आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में 1.7 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी डाली है। यह लिक्विडिटी ओपन मार्केट ऑपरेशन और सेकेंडरी मार्केट पर्चेस के जरिए डाली गई है।

अर्थव्यवस्था में संकट के कारण नाजुक एसेट्स में बढ़ोतरी होगी

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि कोविड-19 महामारी का बैंकिंग क्षेत्र की जीडीपी पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। इससे अर्थव्यवस्था पर गहरी मुसीबत आ जाएगी और नाजुक एसेट्स में बढ़ोतरी होगी। इसके अतिरिक्त बैंकों ने अपनी सरप्लस लिक्विडिटी में से एक बड़ा हिस्सा रिवर्स रेपो रेट में लगाया है। पिछले एक साल में रिवर्स रेपो रेट 215 बेसिस पॉइंट घटकर 3.35 फीसदी पर आ गया है। इसके अलावा कॉस्ट ऑफ फंड्स में 5 से 6 फीसदी की गिरावट आई है। यह नकारात्मकता की ओर ले जा सकता है।

आरबीआई गवर्नर ने भी दिए एनपीए बढ़ने के संकेत

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर ने भी कोरोना महामारी के कारण एनपीए बढ़ने का संकेत दिया है। शनिवार को एसबीआई की ओर से आयोजित 'कोविड-19 का कारोबार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव' वर्चुअल कॉन्क्लेव में बोलते आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण एनपीए में बढ़ोतरी होगी और कैपिटल में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि महामारी के कारण उभरते जोखिम की पहचान के लिए ऑफसाइट सर्विलांस मैकेनिज्म को मजबूत किया जा रहा है।

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लोन की मांग कम होने के कारण बैंक अपनी अतिरिक्त लिक्विडिटी को लो-यील्ड जैसे विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। इसमें सरकारी बॉन्ड और अच्छी रैंकिंग वाली कॉरपोरेट सिक्युरिटीज शामिल हैं। लोन की मांग कम होने के कारण बैंक अपनी अतिरिक्त लिक्विडिटी को लो-यील्ड जैसे विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। इसमें सरकारी बॉन्ड और अच्छी रैंकिंग वाली कॉरपोरेट सिक्युरिटीज शामिल हैं। 

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