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  • The possibility of loss in the aviation sector increased in FY 2021, earlier it was estimated at $ 3.6 billion, now it has increased to $ 4 billion

घाटा /एविएशन सेक्टर में वित्त वर्ष 2021 में नुकसान की आशंका बढ़ी, पहले 3.6 अरब डॉलर का था अनुमान, अब यह बढ़कर 4 अरब डॉलर हुआ

दूसरी तिमाही की तरह तीसरी तिमाही भी एयरलाइंस सेक्टर के लिए खराब रह सकती है दूसरी तिमाही की तरह तीसरी तिमाही भी एयरलाइंस सेक्टर के लिए खराब रह सकती है

  • एयरलाइंस उद्योग को 3.5 अरब डॉलर पूंजी की जरूरत
  • भविष्य में दो से तीन विमान कंपनियां ही रह सकती हैं

मनी भास्कर

Jul 03,2020 08:59:38 PM IST

मुंबई. सलाहकार फर्म सीएपीए (CAPA) इंडिया ने कहा है कि भारतीय एविएशन सेक्टर को वित्त वर्ष 2021 में 4 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है। इससे पहले 3.6 अरब डॉलर के घाटे की आशंका जताई गई थी। एक रिपोर्ट में सीएपीए इंडिया ने भारतीय एयरलाइनों के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत की भी बात कही है। यह जरूरत अब 2.5 अरब डॉलर से बढ़कर 3.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

आगे चलकर कम हो सकती है विमान कंपनियों की संख्या

इस फर्म ने कहा है कि फिलहाल इंडिगो एयर इंडिया स्पाइसजेट और गो एयर जैसी आधा दर्जन विमानन कंपनियां चल रही हैं। आगे चलकर यह सेक्टर सिर्फ दो या तीन कंपनियों तक ही सिमट सकता है। इसने आगे कहा कि विमानन क्षेत्र में कंसोलिडेशन की ज्यादा संभावनाएं हैं। इससे पूरे उद्योग का पुनर्गठन हो सकता है। अगर इनका समय पर पुनर्पूंजीकरण (recapitalisation) नहीं हुआ तो एयरलाइन मार्केट में सिर्फ दो या तीन कंपनियां ही बच सकती हैं।

25 मई से शुरू हैं उड़ानें

घरेलू मार्केट में मांग में नरमी दिख रही है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पहली तिमाही जैसी दूसरी तिमाही भी बिल्कुल वॉश आउट हो सकती है। गौरतलब है कि लॉकडाउन के बाद 25 मई से विमानन कंपनियों को उड़ान भरने की अनुमति दी गई है। हालांकि ज्यादातर अति आवश्यक ट्रैफिक के लिए ही इस सेक्टर को खोला गया है। यह उनके लिए खोला गया जो अचानक से लगाए गए लॉकडाउन के कारण जगह-जग पर फंस गए थे।

फिलहाल वनवे बुकिंग ही ज्यादा हो रही है

रिपोर्ट में कहा गया है कि यात्रा सीमित की गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना प्रकोप के पहले 40% बुकिंग दोनों तरफ की यात्रा के लिए होती थी परंतु कोरोना के बाद अब 90 प्रतिशत बुकिंग सिर्फ एक तरफ की यात्रा अर्थात वनवे के लिए हो रही है। हालांकि सरकार ने एयरलाइनों को 45 प्रतिशत तक काम करने की अनुमति दी है। इससे थोड़ा फर्क पड़ा है। CAPA इंडिया ने कहा कि किराया अभी सीमित किया गया है। यह अगर रेगुलेटर की सीमा नहीं होती तो कुछ भी हो सकता था। इससे एयरलाइंस को फायदा भी हो सकता था

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