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  • The new e commerce policy draft includes steps to help local startups and monitor companies' data

अमेजन, गूगल और फेसबुक का असर होगा कम /नई ई-कॉमर्स पॉलिसी ड्रॉफ्ट में स्थानीय स्टार्टअप्स को मदद करने और कंपनियों के डेटा पर निगरानी रखने जैसे कदम शामिल

विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को यह विकल्प देना होगा कि ग्राहक रेगुलेटेड पेमेंट चैनल के माध्यम से इस तरह के लेनदेन के रूट का चुनाव करें विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को यह विकल्प देना होगा कि ग्राहक रेगुलेटेड पेमेंट चैनल के माध्यम से इस तरह के लेनदेन के रूट का चुनाव करें

  • सरकार इस पॉलिसी पर दो साल से काम कर रही थी
  • ई-कॉमर्स रेगुलेटर नियुक्त करने की सरकार की योजना

मनी भास्कर

Jul 06,2020 04:51:14 PM IST

मुंबई. देश में नई ई-कॉमर्स पॉलिसी के ड्रॉफ्ट में ऐसे कदम शामिल किए गए हैं जो स्थानीय स्टार्टअप्स की मदद कर सकते हैं। साथ ही कंपनियां डेटा को कैसे संभालती हैं, इस पर सरकारी निगरानी लागू कर सकते हैं। अमेजन डॉट कॉम इंक, अल्फाबेट इंक के गूगल और फेसबुक इंक जैसे वैश्विक टेक्नोलॉजी दिग्गजों के असर को कम करने के लिए सरकार कम से दो साल से इस नीति पर काम कर रही है।

15 पेज के ड्रॉफ्ट में नियमों को तय किया गया

15 पेज के ड्रॉफ्ट में निर्धारित नियमों के तहत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए एक ई-कॉमर्स रेगुलेटर नियुक्त करेगी कि उद्योग सूचना संसाधनों तक पहुंच के साथ प्रतिस्पर्धी बने। उद्योग और आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कॉमर्स मंत्रालय द्वारा इस पॉलिसी ड्रॉफ्ट को तैयार किया गया है। प्रस्तावित नियमों में ऑनलाइन कंपनियों के सोर्स कोड और एल्गोरिदम तक सरकार का एक्सेस होगा।

देश में 50 करोड़ डिजिटल यूजर्स

भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में 50 करोड़ यूजर्स हैं। इसमें तेजी से इजाफा हो रहा है। यह ऑनलाइन खुदरा और कंटेंट स्ट्रीमिंग से लेकर मैसेज और डिजिटल भुगतान तक हर चीज में अपना वर्चस्व स्थापित कर रही है। ग्लोबल कॉरपोरेशन इन क्षेत्रों में से प्रत्येक में लीड कर रहे हैं। जबकि स्थानीय स्टार्टअप्स सरकारी मदद के भरोसे बैठे हैं। गौरतलब है कि हाल ही में चीनी टेक्नोलॉजी दिग्गजों द्वारा समर्थित दर्जनों ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

लोगों की राय के लिए वेबसाइट पर डाला जाएगा पॉलिसी ड्रॉफ्ट

लोगों की राय मांगने के लिए मंत्रालय सरकारी वेबसाइट पर पॉलिसी का ड्रॉफ्ट पेश करेगा। ड्रॉफ्ट में कहा गया है कि कुछ प्रमुख कंपनियों के बीच सूचना भंडार (information repository) पर नियंत्रण रखने का एकाधिकार देखा गया है। इसमें कहा गया है कि यह भारतीय ग्राहकों और स्थानीय इकोसिस्टम (local ecosystem) के हित में है कि हमारे पास अधिक सेवा प्रदाता हैं। नेटवर्क प्रभावों से प्रमुख बाजार की स्थिति का दुरुपयोग करते हुए डिजिटल मोनोपोली का निर्माण नहीं होता है।

विदेशों में डेटा होस्टिंग करना भी विवाद में रहा है

डेटा कहां रखा जाता है, इसके मुद्दे पर ड्रॉफ्ट यह बताता है कि किस ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को स्थानीय स्तर पर जानकारी रखनी होगी। विदेशों में डेटा होस्टिंग करना पिछले ड्रॉफ्ट में एक विवादित मसला रहा है। इसकी यह कह कर आलोचना हुई कि सरकार स्थानीय स्टार्टअप्स को सहायता देने के बजाय विदेशी कंपनियों पर ज्यादा भरोसा दिखा रही है। ई-कॉमर्स कंपनियों को 72 घंटे के भीतर सरकार को डेटा उपलब्ध कराना जरूरी होगा, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, टैक्सेशन और कानून व्यवस्था से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है।

ई-कॉमर्स ग्राहकों को सभी डिटेल्स देना होगा

ड्रॉफ्ट पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों को ग्राहकों को फोन नंबर, ग्राहक शिकायत संपर्क, ईमेल और पते सहित विक्रेताओं का डिटेल्स प्रदान करना आवश्यक होगा। पॉलिसी में कहा गया है कि इंपोर्टेड सामानों के बारे में भी खुलासा करना होगा। इसके अलावा, पेमेंट टोकन का उपयोग कर लाइव स्ट्रीमिंग सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को यह भी विकल्प देना होगा कि ग्राहक रेगुलेटेड पेमेंट चैनल के माध्यम से इस तरह के लेनदेन के रूट का चुनाव करें।

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विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को यह विकल्प देना होगा कि ग्राहक रेगुलेटेड पेमेंट चैनल के माध्यम से इस तरह के लेनदेन के रूट का चुनाव करेंविदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को यह विकल्प देना होगा कि ग्राहक रेगुलेटेड पेमेंट चैनल के माध्यम से इस तरह के लेनदेन के रूट का चुनाव करें

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