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उपलब्धि /दुनिया के टॉप 10 रिच लोगों के एक्सक्लूसिव क्लब में आरआईएल चेयरमैन मुकेश अंबानी एकमात्र एशियाई अमीर बिजनेस मैन

हाल में आरआईएल के शेयरों में दोगुना उछाल, जियो में निवेश से मुकेश अंबानी की संपत्ति में इजाफा हुआ है हाल में आरआईएल के शेयरों में दोगुना उछाल, जियो में निवेश से मुकेश अंबानी की संपत्ति में इजाफा हुआ है

  • मुकेश अंबानी की नेटवर्थ हाल के दिनों में बढ़कर 64.5 अरब डॉलर हुई
  • ओरैकल कॉर्प के साथ फ्रांस की सबसे धनवान महिला को पीछे छोड़ा

मनी भास्कर

Jun 20,2020 07:27:50 PM IST

मुंबई. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी की नेटवर्थ 64.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इससे वह दुनिया के टॉप 10 सबसे अमीर लोगों के एक्सक्लूसिव क्लब में एकमात्र एशियाई बिजनेस मैन बन गए हैं। वे ओरेकल कॉर्प के लैरी एलिसन और फ्रांस की सबसे धनवान महिला फ्रैंकोइस बेटनकोर्ट मेयर्स को पीछे छोड़कर अब नंबर 9 पर पहुंच गए हैं। ब्लूमबर्ग की अरबपतियों लिस्ट से यह जानकारी मिली है।

जियो में निवेश से फायदा हुआ अंबानी को

रिलायंस में 42 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से के मालिक अंबानी को कंपनी की डिजिटल यूनिट जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड में निवेश की आई बाढ़ से फायदा हुआ है। रिलायंस ने मार्च 2021 के लक्ष्य से पहले इसे नेट-डेट फ्री कर दिया है। इसी दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर भी मार्च रे स्तर से दोगुना बढ़ गया है। दूसरी ओर कई अन्य अरबपति कोरोनावायरस महामारी के प्रभाव से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

कोरोना की मंदी में अंबानी का बेहतरीन प्रदर्शन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में योजना केंद्र की अध्यक्ष जयति घोष ने कहा कि कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए लॉकडाउन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लगभग तबाह कर दिया है। पर अंबानी की कंपनियाँ (विशेष रूप से दूरसंचार कंपनी जियो) और मजबूत हुई हैं, और उनकी व्यक्तिगत संपत्ति में काफी वृद्धि हुई है। दुनिया की अब तक की सबसे खराब मंदी में 63 वर्षीय बिजनेस मैन अंबानी ने पैसे जुटाने और निवेशकों को रिटर्न देने के मामले में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

तीन रूफटॉप हेलीपैड, 50 सीटर थिएटर बॉलरूम वाली एंटीलिया के हैं मालिक

अंबानी मुंबई के 27 मंजिला आलीशान टॉवर में रहते हैं, जिसे एंटीलिया के नाम से जाना जाता है। इसमें तीन रूफटॉप हेलीपैड, 168 कारों के लिए पार्किंग है। इसमें एक 50 सीटर मूवी थियेटर, क्रिस्टल झूमर के साथ एक भव्य बॉलरूम, बेबीलोन से प्रेरित हैंगिंग गार्डन, एक योगा स्टूडियो और एक हेल्थ स्पा तथा फिटनेस सेंटर आदि हैं। एक तरफ जहां तेल की कीमतों में कमी के कारण रिलायंस के तेल और केमिकल डिवीजन की हिस्सेदारी बिक्री में अनिश्चितता पैदा हुई, वहीं सिर्फ दो महीने में जियो ने 15 अरब डॉलर का निवेश हासिल किया है।

मोबाइल फोन सब्सक्राइबर के 48 प्रतिशत बाजार पर कब्जे की योजना

दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऑनलाइन कॉमर्स मार्केट्स जियो में फेसबुक इंक, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक पार्टनर्स, केकेआर एंड कंपनी और सऊदी अरब के सॉवरेन वेल्थ फंड भागीदार बनने वालों की लिस्ट में हैं। सैनफोर्ड सी बर्नस्टीन की एक जून की रिपोर्ट में भविष्यवाणी की गई थी कि जियो द्वारा 2025 तक भारत के मोबाइल सब्सक्राइबर के 48 प्रतिशत मार्केट शेयर पर कब्जा करने की उम्मीद है। अंबानी के ई-कॉमर्स के लक्ष्यों को और मजबूत करने के लिए नए संभावित सौदों में रिलायंस, फ्यूचर ग्रुप की कुछ इकाइयों में हिस्सेदारी हासिल करने के करीब है। इसकी पहले से ही Amazon.com इंक के साथ साझेदारी है।

1980 में शुरू किया था कंपनी में काम

अंबानी को 1980 के दशक की शुरुआत में परिवार के कारोबार में एंट्री मिली, जब उनके पिता धीरूभाई अंबानी ने उन्हें स्टैनफोर्ड बिजनेस स्कूल से एक साल बाद पॉलिएस्टर मिल के निर्माण की देखरेख के लिए भारत वापस बुलाया। अंबानी ने पेट्रोकेमिकल और तेल रिफाइनरियों को खरीदना शुरू किया। बाद में कंपनी को कपड़े और ऊर्जा के साम्राज्य के रूप में स्थापित किया। धीरूभाई की 2002 में बिना किसी वसीयत के एक स्ट्रोक से मृत्यु हो गई। इसके बाद यहीं से मुकेश और उनके भाई अनिल के बीच विवाद शुरू हो गया।

दोनों भाइयों में हुआ बंटवारा

मां कोकिलाबेन के बीच बचाव के बाद हुए एक समझौते में भाइयों ने पारिवारिक कारोबार को बांट लिया। मुकेश के हिस्से में रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, ऑयल एंड गैस और टेक्सटाइल ऑपरेशंस आए, जबकि अनिल ने टेलीकॉम असेट मैनेजमेंट, मनोरंजन और बिजली उत्पादन के कारोबार को संभाला। 2013 में भाइयों ने फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क साझा करने के लिए 22 करोड़ डॉलर समझौते की घोषणा की, जो रिलायंस साम्राज्य के बंटवारे के बाद से उनका पहला सौदा था।

इंडियन ऑयल को पीछे छोड़ आरआईएल बनी नंबर वन कंपनी

अनिल अंबानी के कमान संभालने के बाद उन्होंने कारोबार में संघर्ष किया। रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड पिछले साल दिवालियापन के लिए फ़ाइल किया। जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज आधिकारिक तौर पर नंबर 1 पिछले साल ही बन गई, जब वह सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल के रेवेन्यू को पार कर देश की सबसे बड़ी कंपनी बन गई। अगस्त में रिलायंस की एजीएम में मुकेश अंबानी ने इसे रिलायंस के लिए गोल्डन डिकेड कहा।

डिजिटल विस्तार ज्यादा अच्छा होता है- अंबानी

उन्होंने समूह द्वारा एक के बाद एक हासिल की गई सफलताओं का जश्न मनाया। अंबानी ने उस समय कहा था, "हम नए विकास इंजनों को भी इनक्यूबेटिंग कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि डिजिटल विस्तार ज्यादा अच्छा हो सकता है और कोई शक्ति भारत को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। अब कम से कम ग्लोबल वेल्थ रैंकिंग मामले में यह सच सही हो रहा है।

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