डील /रिलायंस जनरल इंश्योरेंस की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी, कर्जदार कंसोर्टियम बनाकर करेंगे इसका सौदा

भारी-भरकम कर्ज में फंसे अनिल अंबानी कई कंपनियों में हिस्सेदारी बेच चुके हैं भारी-भरकम कर्ज में फंसे अनिल अंबानी कई कंपनियों में हिस्सेदारी बेच चुके हैं

  • सूत्रों के मुताबिक कंपनी का मूल्यांकन काफी ज्यादा लगाया गया है
  • सेबी की मंजूरी के बाद भी नहीं आ पाया था कंपनी का आईपीओ

मनी भास्कर

May 28,2020 08:19:00 PM IST

मुंबई. रिलायंस जनरल इंश्योरेंस के कर्जदाता बीमा कंपनी में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वैश्विक फंड्स और स्ट्रेटेजिक निवेशकों के साथ बात की जा रही है। रिलायंस जनरल इंश्योरेंस एक समय अनिल अंबानी की कंपनी थी। कर्जदाताओं के एक कंसोर्टियम ने खरीदारों की तलाश के लिए जे एम फाइनेंशियल को इनवेस्टमेंट बैंकर नियुक्त किया है।

कंपनी का वैल्यूएशन 4,000 करोड़ रुपए

सूत्रों के मुताबिक पिछले हफ्ते में संभावित खरीदारों को इंफार्मेशन मेमोरंडम दिया गया था। इसमें 4,000 से 4,500 करोड़ रुपए का मूल्य डाला गया था। विदेशी नियमों के मुताबिक नॉन-रेसीडेंट्स कोई बीमा कंपनी में 49 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं खरीद सकती है। प्रस्तावित खरीदार को इरडा के पास से फिट एंड प्रॉपर सर्टिफिकेट लेना होगा। इसमें ड्यू डिलिजेंस किया जाएगा और संभावित खरीदार की वित्तीय क्षमता का आंकलन किया जाएगा।

पहले से कंपनी के शेयर रखे गए थे गिरवी

27 फरवरी को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (सैट) ने कर्जदाताओं को निप्पोन इंडिया म्यूचुअल फंड और क्रेडिट सुइस को रिलायंस जनरल इंश्योरेंस के शेयर को जब्त करने की मंजूरी दी थी। इस शेयर को अनिल अंबानी के ग्रुप ने गिरवी रखा था। मार्च 2018 में रिलायंस होम फाइनेंस और निप्पोन इंडिया का 400 करोड़ रुपए और 1,200 करोड़ रुपए का बांड्स क्रेडिट सुइस ने जारी किया था, जिसके लिए रिलायंस जनरल का शेयर गिरवी रखा गया था। लेकिन इस पैसे को बाद में नहीं चुकाया गया था।

अनिल अंबानी कई बार विदेशी पार्टनर लाने की कोशिश किए थे

बीमा नियामक इरडा ने दिसंबर 2019 में गिरवी रखे गए एंफोर्समेंट को अवैध करार दिया था। कारण कि इसके लिए रेगुलेटर से मंजूरी नहीं ली गई थी और यह ट्रांसफर विदेशी निवेश के नियमों का उल्लंघन कर रहा था। इससे पहले अनिल अंबानी ने कई बार विदेशी पार्टनर को लाने का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी। अक्टूबर 2017 में रिलायंस कैपिटल ने सेबी के समक्ष आईपीओ के लिए डाक्यूमेंट फाइल किया था। सेबी आईपीओ के लिए मंजूरी तो दी थी, लेकिन 2018 नवंबर में मंजूरी की तारीख समाप्त हो गई।

दिसंबर में आईसीआईसीआई के साथ हुई थी चर्चा

पिछले हफ्ते अनिल अंबानी ने कर्ज घटाने के लिए बीमा कंपनी में रिलायंस कैपिटल का हिस्सा बेचने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज और पिरामल समूह से संपर्क किया था। इससे पहले दिसंबर में भी कंपनी ने आईसीआईसीआई ग्रुप के साथ चर्चा की थी, लेकिन इसमें भी रेगुलेटर का मामला आने से बात नहीं बन पाई। एक सूत्र ने बताया कि फिलहाल रिलायंस जनरल का काफी ज्यादा भाव मांगा जा रहा है। इस भाव पर सौदा होना मुश्किल है।

हाल में दो लिस्टेड जनरल बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल और न्यू इंडिया इंश्योरेंस का भाव 56,300 करोड़ रुपए और 19,000 करोड़ रुपए आंका गया था।

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