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तमिलनाडु का मामला /तीन महीने से एसबीआई की फर्जी शाखा चला रहा था पूर्व बैंक अधिकारी का बेटा, पुलिस ने प्रिंटिंग प्रेस मालिक समेत तीन लोगों को पकड़ा

पिछले तीन महीने में फर्जी शाखा से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ, जिस कारण कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। (प्रतीकात्मक तस्वीर) पिछले तीन महीने में फर्जी शाखा से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ, जिस कारण कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

  • एसबीआई की दूसरी शाखा के ग्राहक ने किया खुलासा
  • आरोपी व्यक्ति की प्रिंटिंग प्रेस में ही छपती थीं बैंक की रसीदें

मनी भास्कर

Jul 11,2020 04:00:55 PM IST

नई दिल्ली. तमिलनाडु पुलिस ने एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बीते तीन महीने से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की फर्जी शाखा चला रहा था। गिरफ्तार किए गए तीन लोगों में एक पूर्व बैंक अधिकारी का बेटा भी शामिल है।

बैंक अधिकारी का बेटा ही मास्टरमाइंड

यह मामला तमिलनाडु के कुडलोर जिले के पनरुती शहर का है। पुलिस इंस्पेक्टर अंबेथकर ने इस मामले की पुष्टि की है। पुलिस इंस्पेक्टर के मुताबिक, इस गिरोह का मास्टरमाइंड कमल बाबू एक पूर्व बैंक अधिकारी दंपति का बेरोजगार बेटा है। कमल बाबू के पिता का दस साल पहले निधन हो गया था, जबकि उसकी मां 2 साल पहले ही एक बैंक से रिटायर हुई है। इसमें मामले में गिरफ्तार किया गया दूसरा व्यक्ति प्रिंटिंग प्रेस का मालिक है जो बैंक संबंधी रसीद, चालान और अन्य कागजात की छपाई करता था। तीसरा व्यक्ति रबर स्टांप बनाने का कार्य करता है।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

तीन महीने पुरानी इस फर्जी ब्रांच का खुलासा तब हुआ जब एक एसबीआई ग्राहक ने अपनी बैंक शाखा के मैनेजर को इसकी जानकारी दी। बैंक मैनेजर ने जोनल ऑफिस से इस शाखा के बारे में जानकारी मांगी। जोनल ऑफिस से बताया गया कि पनरुति शहर में एसबीआई की केवल दो ब्रांच हैं और तीसरी शाखा नहीं खोली गई है।

फर्जी ब्रांच में असली सेटअप

इसके बाद एसबीआई के अधिकारियों ने उस फर्जी शाखा का दौरा किया। फर्जी शाखा का नजारा देखकर एसबीआई अधिकारियों के होश उड़ गए। इस फर्जी शाखा में पूरा असली शाखा जैसे सेटअप था। ब्रांच में असली शाखा जैसा पूरा सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर लगा हुआ था। इसके बाद एसबीआई अधिकारियों ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। गनीमत यह रही कि पिछले तीन महीने में इस फर्जी शाखा से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ, जिस कारण कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है।

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पिछले तीन महीने में फर्जी शाखा से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ, जिस कारण कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)पिछले तीन महीने में फर्जी शाखा से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ, जिस कारण कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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