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परेशानी /बैंकों का एनपीए इस साल 2 से 6 प्रतिशत बढ सकता है, असेट क्वालिटी को सुधारने के लिए सरकार को देनी होगी पूंजी

सरकार ने 2020-21 के लिए सरकारी बैंकों को पूंजी देने की कोई योजना घोषित नहीं की थी सरकार ने 2020-21 के लिए सरकारी बैंकों को पूंजी देने की कोई योजना घोषित नहीं की थी

  • दो साल में बैंकिंग सिस्टम को 25 से 50 अरब डॉलर की होगी जरूरत
  • सरकारी बैंकों का भाव बुक वैल्यू की तुलना में 0.2 से 0.6 गुना डिस्काउंट पर

मनी भास्कर

May 28,2020 05:18:34 PM IST

मुंबई. भारत के बैंकिंग सिस्टम को 25 से 50 अरब डॉलर पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। इसका कारण यह है कि लिक्विडिटी के अभाव से कई बैंक प्रभावित हैं। साथ ही बैंकों का एनपीए यानी बुरे फंसे कर्ज में 2 से 6 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इस वजह से सरकार को इस साल सरकारी बैंकों को पूंजी देनी होगी ताकि इनकी असेट क्वालिटी में सुधार आ सके।

पूंजी नहीं मिली तो सरकारी बैंंकों को हो सकती है दिक्कत

अगर सरकार इस साल पूंजी नहीं देती है तो सरकारी बैंकों के लिए मुश्किल आ सकती है। हालांकि सरकारी बैंकों के पास पूंजी जुटाने का एक विकल्प जरूर है, पर बैंकों की असेट क्वालिटी पर तनाव और शेयर्स में गिरावट से यह मुश्किल काम दिख रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक सरकारी बैंकों का भाव बुक वैल्यू की तुलना में इस समय 0.2 से 0.6 गुना डिस्काउंट पर है। इसलिए पूंजी जुटाना दिक्कत वाला काम हो सकता है।

बैंकों को पहले से ही पूंजी की थी जरूरत

फिच रेटिंग के अनुसार कोविड-19 से पहले ही बैंकों को दो वर्ष के लिए कम से कम 25 से 50 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत का अनुमान था। इस समय क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट और असेट क्वालिटी खराब होने की आशंका से और ज्यादा पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। हर एक बैंक की उधारी के आधार पर उनका एनपीए 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है।

सरकारी बैंकों को 13 अरब डॉलर की जरूरत

क्रेडिट सुइस के अनुसार भारत के बैंकिंग सेक्टर को 20 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत है। इसमें से सरकारी बैंकों को 13 अरब डॉलर की जरूरत होगी। क्रेडिट सुइस ने बताया कि जोखिम में वृद्धि और रेटिंग डाउनग्रेड बढ़ने के कारण 2020-21 में भारतीय बैंकों की असेट क्वालिटी पर दबाव बढ़ेगा। लंबा लॉकडाउन और मोराटोरियम बढ़ने के कारण ब्रोकरेज हाउस क्रेडिट कास्ट के अनुमान में 20 से 60 प्रतिशत की वृद्धि किए हैं। निजी बैंक हालांकि इस स्थिति से थोड़ा मजबूती से निपट सकते हैं, लेकिन सरकारी बैंकों की निर्भरता सरकार पर बढ़ जाएगी।

निजी बैंकों का कैपिटल रेशियो ठीक-ठाक है

क्रेडिट सुइस के मुताबिक निजी बैंकों की टियर-1 कैपिटल रेशियो 13 प्रतिशत पर है, जो ठीक ठाक है। विश्लेषकों के मुताबिक सरकार का राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत के लक्ष्य से बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो सकता है। सरकारी बैंक के एक अधिकारी के मुताबिक सरकार पीएसयू बैंकों को हाल में पूंजी के मामले में आत्मनिर्भर बनने का निर्देश दिया था। लेकिन इस स्थिति में यह काम मुश्किल लग रहा है।

बता दें कि सरकार ने 2020-21 के लिए सरकारी बैंकों को पूंजी देने की कोई योजना घोषित नहीं की थी। जबकि वर्तमान स्थिति के मद्देनजर सरकार इस मामले में फिर से सोच सकती है।

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