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लॉकडाउन का असर /कई वेंडर्स जीएसटी का नहीं कर पा रहे हैं भुगतान, बड़ी कंपनियों को क्रेडिट मिलने में हो सकती है दिक्कत

वेंडर सरकार को जीएसटी का भुगतान नहीं करता है तो खरीदार को इनपुट टैक्स क्रेडिट देने से मना कर दिया जाएगा वेंडर सरकार को जीएसटी का भुगतान नहीं करता है तो खरीदार को इनपुट टैक्स क्रेडिट देने से मना कर दिया जाएगा

  • एसएमई कंपनियों से बड़ी कंपनियां खरीदती हैं कच्चे माल, पर अब सावधानी बरत रही हैं
  • कई कंपनियां दो महीने के लिए विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान रोक रही हैं

मनी भास्कर

May 30,2020 05:22:00 PM IST

मुंबई. कई छोटी और मध्यम कंपनियों (एमएसएमई) इस समय कोविड-19 संकट के कारण परेशानी का सामना कर रही हैं। साथ ही कुछ दिवालिया भी हो रही हैं। लेकिन इनकी वजह से बड़ी कंपनियों के सामने भी समस्या आ रही है। क्योंकि छोटी कंपनियों से बड़ी कंपनियां रॉ मटेरियल खरीदती हैं। ऐसे में अगर छोटी कंपनियां जीएसटी नहीं भरती हैं तो बड़ी कंपनियों को क्रेडिट मिलना मुश्किल हो जाएगा।

क्रेडिट का दावा तभी हो सकता है, जब वेंडर्स ने टैक्स का भुगतान किया हो

जीएसटी फ्रेमवर्क के मुताबिक, बड़ी कंपनियां क्रेडिट का दावा तभी कर सकती हैं, जब उनके सप्लायर्स और वेंडर्स ने टैक्स का भुगतान कर दिया हो। जीएसटी कानून की धारा 16 में कहा गया है कि अगर कोई वेंडर सरकार को जीएसटी का भुगतान नहीं करता है तो खरीदार को इनपुट टैक्स क्रेडिट देने से मना कर दिया जाएगा। सभी क्षेत्रों में एक बड़े सप्लायर बेस वाली कंपनियां अब अपने विक्रेताओं के पास पहुंच रही हैं। वह यह जांच कर रही हैं कि उनकी तरफ से कोई डिफॉल्ट की गई है या नहीं।

वर्तमान माहौल में डिफॉल्ट की आशंका बढ़ गई है

ई एंड वाई में टैक्स पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि सप्लायर द्वारा टैक्स का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यवसायों पर डाली गई अतिरिक्त लायबिलिटी ही चिंता का विषय रही है। क्योंकि इसका पता करने में कठिनाइयाँ आती हैं। वर्तमान में फैले फाइनेंशियल फ्लू के कारण विक्रेताओं द्वारा डिफॉल्ट की आशंकाएं बढ़ गई हैं। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने एसएमई सेक्टर की कमर तोड़ दी है।

अचानक कारोबार बंद होना शुरू हो गए

कोरोनावायरस के कारण लगे प्रतिबंध से कारोबार अचानक बंद होना शुरू हो गए। इसने छोटी कंपनियों को पाई-पाई के लिए मोहताज कर दिया। उद्योग से मांग खत्म होने के साथ कच्चे माल और लेबर की कमी ने कई लोगों के लिए अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया। उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि कई बड़ी कंपनियां स्थिति को संभालने के लिए कुछ कदम उठा रही हैं। जबकि बड़े व्यवसाय जीएसटी भुगतान और छोटे व्यवसायों को प्रदान किए गए रिटर्न के लिए विस्तारित समय सीमा से उत्पन्न वेंडर डिफॉल्ट से खुद को बचाने के लिए क्षतिपूर्ति व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं।

कंपनियों ने वेंडर्स और सप्लायर्स से इंडेमनिटी लेटर मांगा है

डेलॉय इंडिया के पार्टनर एमएस मणि ने कहा कि पिछले कंप्लायंस ट्रैक रिकॉर्ड्स के आधार पर वेंडर चयन नीतियों का फिर से मूल्यांकन करने की भी जरूरत है। मामले से वाकिफ लोगों के मुताबिक कुछ कंपनियों ने अपने वेंडर्स और सप्लायर्स को क्षतिपूर्ति पत्र (indemnity letter) देने को कहा है। एक व्यक्ति ने कहा कि यह पत्र अनिवार्य रूप से एक कानूनी दस्तावेज है जो विक्रेताओं से समय पर जीएसटी का भुगतान करने के लिए कहता है। अगर जीएसटी डिफॉल्ट होता है या अगर किसी विक्रेता की देरी के कारण कंपनी को कोई ब्याज या जुर्माना लगाया जाता है तो उसे जिम्मेदार ठहराया जाता है।

जीएसटी पोर्टल पर सही चालान दिखना चाहिए

इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा तभी किया जा सकता है जब किसी वेंडर ने टैक्स चुकाया हो और जीएसटी पोर्टल पर सही चालान अपलोड कर दिया हो। चालान कंपनी की क्रेडिट पात्रता से मेल खाते हैं। यदि 90 प्रतिशत सटीक है या यदि 10 प्रतिशत चालान के साथ कोई समस्या है तो पूर्ण क्रेडिट की अनुमति है। विशेषज्ञों ने कहा कि कुछ बड़ी कंपनियां, खासकर ऑटोमोबाइल और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों की कंपनिया कोई चांस नहीं ले रही हैं। कुछ बड़ी कंपनियाँ दबाव की रणनीति के तहत दो महीने के लिए विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के लिए भुगतान रोक रही हैं।

बड़ी कंपनियों को सलाह देने वाले एक टैक्स एक्सपर्ट ने कहा, यह सुनिश्चित करना है कि वे समय पर जीएसटी का भुगतान करें और कंपनी टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने में सक्षम हो।

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