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चीन के कपटी व्यापार नीति का असर /वियतनाम के साथ भारत का व्यापार 2018 में 21,000 करोड़ रुपए सरप्लस में था, 2020 में 16,555 करोड़ रुपए डिफिसिट में आया

सिंगापुर और हांगकांग के बाद वियतनाम तीसरा एशियाई देश है, जिसके साथ भारत का व्यापार सिर्फ तीन साल में सरप्लस से घाटे में आ गया सिंगापुर और हांगकांग के बाद वियतनाम तीसरा एशियाई देश है, जिसके साथ भारत का व्यापार सिर्फ तीन साल में सरप्लस से घाटे में आ गया

  • 2017-18 से वित्त वर्ष 2020 के बीच वियतनाम से आयात 37,625 करोड़ रुपए से बढ़कर 54,933 करोड़ रुपए पर पहुंच गया
  • इस दौरान वियतनाम को भारत का निर्यात 58,695 करोड़ रुपए से गिरकर 38,378 रुपए पर आ गया

मनी भास्कर

Jul 10,2020 06:10:24 PM IST

नई दिल्ली. सिंगापुर और हांगकांग के बाद वियतनाम तीसरा एशियाई देश है, जिसके साथ भारत का व्यापार सिर्फ तीन साल में सरप्लस से घाटे में आ गया। वियतनाम के साथ भारत का व्यापार कारोबारी साल 2017-18 में 2.8 अरब डॉलर (करीब 21,000 करोड़ रुपए) सरप्लस में था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कारोबारी साल 2019-20 में उसके साथ भारत का व्यापार 2.2 अरब डॉलर (करीब 16,555 करोड़ रुपए) के डिफिसिट में आ गया।

कारोबारी साल 2017-18 में भारत ने वियतनाम से 5 अरब डॉलर (करीब 37,625 करोड़ रुपए) का आयात किया था। यह बढ़कर पिछले कारोबारी साल में 7.3 अरब डॉलर (करीब 54,933 करोड़ रुपए) पर पहुंच गया। इस दौरान वियतनाम को भारत का निर्यात 7.8 अरब डॉलर (करीब 58,695 करोड़ रुपए) से गिरकर 5.1 अरब डॉलर (करीब 38,378 रुपए) पर आ गया।

अमेरिका से ट्र्रेड वार के बीच अन्य देशों में अपने सामानों की बिक्री बढ़ा रहा है चीन

कारोबारी साल 2018 से कारोबारी साल 2020 के बीच चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वार जैसी स्थिति रही। ऐसे में चीन ने अपने कुछ सामानों को अमेरिका से निकालकर कुछ अन्य देशों में खपाने की कोशिश की। हाल में भारत भी चीन पर अपना व्यापार घाटा कम करने के लिए दबाव बनाता रहा है।

आसियान और हांगकांग के जरिये भारत में सामान बेच रहा है चीन

जानकारों के अनुमान के मुताबिक भारतीय दबाव के कारण चीन आयातित सामानों पर स्रोत देश के नियमों का दुरुपयोग करते हुए आसियान देशों और हांगकांग के जरिये भारत में सामान बेचने लगा है। वियतनाम आसियान का सदस्य है। भारत का आसियान के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है।

वियतनाम से ऐसे सामानों का भी बढ़ा आयात, जिनका मुख्य आपूर्तिकर्ता चीन है

भारत में 2014-15 के बाद से वियतनाम से कई ऐसे सामानों का आयात बढ़ा है, जिसका वह प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। इस दौरान वियतनाम से कई ऐसे सामाना का भी आयात बढ़ा है, जिनका मुख्य आपूर्तिकर्ता देश चीन है। पिछल कारोबारी साल में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 48 अरब डॉलर का था। किसी अन्य देशों से होकर भारत में सामान बेचने से वह चीन के व्यापार में दिखाई नहीं पड़ता है।

सिंगापुर और हांगकांग के साथ भी सरप्लस से डिफिसिट में आया भारत

सिंगापुर और हांगकांग के साथ भी भारत हाल में सरप्लस से डिफिसिट में आ गया है। कारोबारी साल 2018 सिंगापुर के साथ भारत 2.7 अरब डॉलर के सरप्लस में था। कारोबारी साल 2019 में भारत 4.7 अरब डॉलर के डिफिसिट में आ गया। हांगकांग के साथ भारत कारोबारी साल 2018 में 4 अरब डॉलर के सरप्लस में था। कारोबारी साल 2019 में भारत हांगकांग के साथ 5 अरब डॉलर के डिफिसिट में आ गया। यह डिफिसिट कारोबारी साल 2020 में बढ़कर 6 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

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सिंगापुर और हांगकांग के बाद वियतनाम तीसरा एशियाई देश है, जिसके साथ भारत का व्यापार सिर्फ तीन साल में सरप्लस से घाटे में आ गयासिंगापुर और हांगकांग के बाद वियतनाम तीसरा एशियाई देश है, जिसके साथ भारत का व्यापार सिर्फ तीन साल में सरप्लस से घाटे में आ गया

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