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  • Govt Launches 'Shoonya' To Promote Adoption Of EV For Final Mile Deliveries

सरकार ने लॉन्च किया 'शून्य':शहरों में डिलीवरी के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही सरकार; अभियान में ई-कॉमर्स कंपनियां, OEM, लॉजिस्टिक्स कंपनियां होंगी शामिल

नई दिल्लीएक महीने पहले
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सांकेतिक तस्वीर। - Money Bhaskar
सांकेतिक तस्वीर।

डिलीवरी वाली गाड़ियों में शून्य प्रदूषण वाले क्लीन फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 'शून्य' नाम के एक अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत शहरों में इलेक्ट्रिक व्हीकल के इस्तेमाल को सपोर्ट देने के लिए सरकार कंज्यूमर और इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करेगी। नीति आयोग ने कहा कि इस कार्यक्रम से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का चलन बढ़ेगा और उनको लेकर उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा होगी।

महिंद्रा, टाटा, जोमैटो, बिग बास्केट, ब्लूडार्ट, हीरो इलेक्ट्रिक आगे

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने अपनी अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियां, फ्लीट एग्रीगेटर, ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चर्स (OEM) और लॉजिस्टिक्स कंपनियां कंज्यूमर डिलीवरी के लिए EV का इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिशों में लगी हैं।

सरकार के शून्य अभियान को सपोर्ट देने के लिए बैठक में महिंद्रा इलेक्ट्रिक, टाटा मोटर्स, जोमैटो, अशोक लीलैंड, सन मोबिलिटी, लाइटनिंग लॉजिस्टिक्स, बिग बास्केट, ब्लूडार्ट, हीरो इलेक्ट्रिक और स्विगी जैसी दिग्गज शामिल हुईं। आने वाले समय में और कंपनियों को अभियान में शामिल होने का न्योता दिया जाएगा।

'शून्य' से लोगों को EV के फायदों के बारे में बताया जाएगा

अभियान के तहत ऑनलाइन ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा, जिससे पता चलेगा कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां कितने किलोमीटर चल रही हैं, कितना कम कार्बन उत्सर्जन हो रहा है और क्लीन डिलीवरी व्हीकल से दूसरे किस तरह के फायदे हो रहे हैं।

अमिताभ कांत ने कहा कि 'शून्य' अभियान का मकसद इलेक्ट्रिक व्हीकल से स्वास्थ्य, पर्यावरण और आर्थिक लाभ के बारे में लोगों को बताना है। उन्होंने कहा कि ईकॉमर्स कंपनियों, ऑटोमोबाइल कंपनियों और लॉजिस्टिक्स फ्लीट ऑपरेटरों को शहरी इलाकों में प्रदूषण घटाने के मौकों की पहचान करनी चाहिए।

ट्रांसपोर्टेशन में लगी गाड़ियों से निकलता है 10% कार्बन डाई ऑक्साइड

देश में ट्रांसपोर्टेशन में लगी जितनी गाड़ियों से कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) निकलता है, उसका 10% हिस्सा शहरों में चलने वाली गाड़ियों का होता है। एक अनुमान के मुताबिक इन गाड़ियों से निकलने वाले CO2 में 2030 तक 114% उछाल आ सकता है।

अगर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को भी जोड़ लिया जाए तो ट्रेडिशनल गाड़ियों से 15-40% कम CO2 निकलता है। सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए चौतरफा इन्सेंटिव देना शुरू किया है।

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