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परेशानी /इश्यूअर्स द्वारा जानकारी नहीं देने पर देश में रेटिंग फर्म की क्रेडिट स्कोर वापस लेने की मांग, आरबीआई को दिए गए डाक्यूमेंट

कोरोना और अन्य वजह से मंदी ने क्रेडिट रेटिंग को पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है कोरोना और अन्य वजह से मंदी ने क्रेडिट रेटिंग को पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है

  • इश्यूअर्स को असहयोग की कैटिगरी में रखने के 12-15 महीने बाद क्रेडिट स्कोर वापस लेने की सिफारिश
  • आधे से ज्यादा क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां इश्यूअर्स को सहयोग नहीं देनेवाली कैटिगरी में गिनी जा रही हैं

मनी भास्कर

Jul 02,2020 08:46:50 PM IST

मुंबई. देश में रेटिंग फर्म क्रेडिट स्कोर वापस लेने की मांग कर रही हैं। यह मांग उन इश्यूअर्स से की गई है जो रेटिंग के असेसमेट को सपोर्ट करने के लिए पर्याप्त जानकारी प्रदान नहीं कर रहे हैं। अगर रेटिंग एजेंसी इस फैसले पर अमल करती हैं तो इससे देश की लगभग आधी रेटिंग प्रभावित हो सकती हैं।

साल 2018 में डिफॉल्ट के बाद यह कदम उठाया गया

रेटिंग प्रदान करने वाली प्रमुख एजेंसियों के अनुसार, वर्तमान में स्थिति यह है कि रेटिंग पूरी तरह से जारीकर्ताओं (इश्यूअर्स) के क्रेडिट हेल्थ को नहीं दिखा पा रही है। इससे संबंधित डॉक्यूमेंट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को बुधवार को सौंपा गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि साल 2018 में एक टॉप रेटिंग वाली कर्ज देनेवाली कंपनी डिफॉल्ट हो गई थी।

देश की अर्थव्यवस्था को चार दशकों में सबसे अधिक झटका

इस तरह की रेटिंग में वृद्धि कोरोनावायरस से पहले भी आया था। इसने भारत की अर्थव्यवस्था को चार दशकों से सबसे अधिक और जोरदार झटका दिया है। मंदी ने क्रेडिट रेटिंग की सटीकता को पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है। इससे यह होगा कि देश के बैंकों की पूंजी की स्थिति को अच्छी तरह समझा जा सकेगा। साथ ही एक बड़े बैंक को बेल आउट की जरूरत ना पड़े।

भारत में सबसे ज्यादा बैड लोन अनुपात

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, भारत के पास पहले से ही दुनिया में सबसे ज्यादा बैड लोन का अनुपात है। 1999 के बाद अब महामारी के साथ और भी खराब दौर आने वाला है। आधे से ज्यादा क्रेडिट रेटिंग एजेंसियाँ जारीकर्ता को सहयोग नहीं देने वाली श्रेणी में गिन रही हैं। आरबीआई को भेजे गए डाक्यूमेंट के अनुसार, वहां रेटिंग की संख्या में उछाल आया है जहां कंपनियां असेसमेंट के लिए पर्याप्त जानकारी प्रदान नहीं करती हैं। साथ ही रेटिंग फर्म की फीस का भुगतान करना बंद कर देती हैं।

यह अनुपात दो वर्षों में दोगुना बढ़कर मार्च 2020 तक 47 प्रतिशत से अधिक हो गया है। बैंक लोन ऐसी रेटिंग का 95 प्रतिशत योगदान करते हैं।

कंपनियों को सर्वोत्तम उपलब्ध जानकारी का उपयोग करना होगा

रेटिंग कंपनियां सिफारिश करती हैं कि जारीकर्ता को असहयोग की श्रेणी में रखे जाने के 12 से 15 महीने बाद वे क्रेडिट स्कोर वापस ले लें। बाजार नियामक सेबी के 2016 के सर्कुलर के मुताबिक, रेटिंग फर्म द्वारा असहयोग करने पर भी इन कंपनियों का असेसमेंट जारी रखना होगा। उन्हें सर्वोत्तम उपलब्ध जानकारी का उपयोग करना होगा।

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