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भारत व्यापारिक जंग में चीन को यूं दे सकता है मात /कारोबार शुरू करने की सहूलियत और कॉन्ट्रैक्ट को लागू करने में अपनी रैंकिंग सुधार कर भारत चीन से निकल सकता है आगे : एसबीआई

भारत यदि शुद्ध वस्तु निर्यातक देश बनना चाहता है, तो उसके पास मैन्यूफैक्चरिंग का एक बड़ा आधार होना चाहिए। बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग आधार बनाने के लिए कारोबार शुरू करने की सहूलियत और कॉन्ट्रैक्ट को लागू करने की रैंकिंग ठीक करना जरूरी है भारत यदि शुद्ध वस्तु निर्यातक देश बनना चाहता है, तो उसके पास मैन्यूफैक्चरिंग का एक बड़ा आधार होना चाहिए। बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग आधार बनाने के लिए कारोबार शुरू करने की सहूलियत और कॉन्ट्रैक्ट को लागू करने की रैंकिंग ठीक करना जरूरी है

  • नया कारोबार शुरू करने के मामले में चीन की रैंकिंग 27 है, जबकि इस मामले में भारत की रैंकिंग 136 है
  • कॉन्ट्रैक्ट एनफोर्समेंट में चीन की रैंकिंग 5 है, जबकि भारत की रैंकिंग 163 है

मनी भास्कर

Jul 08,2020 06:28:44 PM IST

नई दिल्ली. भारत कारोबार को शुरू करने की सहूलियत और कॉन्ट्र्रैक्ट लागू करने में अपनी रैंकिंग सुधार कर चीन को व्यापारिक जंग में मात दे सकता है। यह बात भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपनी ताजा एसबीआई ईकोरैप रिपोर्ट में कही। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ल्ड ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में दो पारामीटर्स- ईज ऑफ स्टार्टिंग अ बिजनेस और कान्ट्रैक्ट एनफोर्समेंट में भारत और चीन की रैंकिंग देखकर यह समझा जा सकता है कि भारत दुनिया का मैन्यूफैक्चरिंग हब क्यों नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत यदि शुद्ध वस्तु निर्यातक देश बनना चाहता है, तो उसके पास मैन्यूफैक्चरिंग का एक बड़ा आधार होना चाहिए। बड़े मैन्यूफैक्चरिंग आधार बनाने के लिए ये दोनों चीजें ठीक करनी होगी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक नया कारोबार शुरू करने के मामले में चीन की रैंकिंग 27 है, जबकि इस मामले में भारत की रैंकिंग 136 है। वहीं कॉन्ट्रैक्ट एनफोर्समेंट में चीन की रैंकिंग 5 है, जबकि भारत की रैंकिंग 163 है।

कारोबारी सहूलियत के सिर्फ एक मामले में चीन से बेहतर है भारत

भारत कारोबारी सहूलियत के सिर्फ एक मामले में चीन से बेहतर है। वह है कर्ज हासिल करना। इस मामले में भारत की रैंकिंग चीन से काफी बेहतर है। भारत का गेटिंग क्रेडिट रैंक 25 है, जबकि चीन का रैंक इस मामले में 80 है। कारोबारी सहूलियत के अन्य सभी मामले में चीन भारत से काफी मजबूत स्थिति में है। चीन की कारोबारी सहूलियत रैंकिंग 31 है, जबकि भारत की 63 है।

1950 के दशक में चीन से ज्यादा निर्यात करता था भारत

एसबीआई के ग्रुप चीफ इकॉनोमिक एडवाइजर डॉ. सौम्या कांति घोष द्वारा लिखी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन ने अलग-अलग ग्रोथ मॉडल अपनाया है। 1950 के दशक में भारत का निर्यात चीन से ज्यादा था। चीन निर्यात पर ज्यादा ध्यान देकर भारत से आगे निकल गया। दूसरी ओर भारत ने अपने विकास पर ज्यादा ध्यान दिया। इसका असर दोनों देशों के आज के निर्यात आंकड़े पर साफ देखा जा सकता है। डब्ल्यूटीओ के आंकड़ों के मुताबिक 2019 में चीन का कुल वस्तु निर्यात 2,499 अरब डॉलर का था। भारत का निर्यात 324 अरब डॉलर का था।

भारत के पास कॉस्ट एडवांटेज है, लेकिन चीन का परास्त करने के लिए क्षमता सुधारनी होगी

एसबीआई ने रिपोर्ट में कहा कि भारत में आयात करने से ज्यादा सस्ता है भारत से निर्यात करना। इसके बावजूद सीमा और नियामकीय अनुपालन में चीन के मुकाबले भारत में ज्यादा समय लगता है। इसलिए व्यापारी चीन को अधिक तरजीह देते हैं। हमारे पास लागत लाभ है, लेकिन चीन को परास्त करने के लिए हमें क्षमता सुधारनी होगी।

भारत सर्विस सेक्टर में चीन को दे सकता है कड़ी टक्कर

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का सर्विस निर्यात भारत से ज्यादा है, लेकिन भारत सर्विस सेक्टर में चीन को कड़ी टक्कर दे सकता है। भारत का टेलीकम्युनिकेशंस, कंप्यूटर और इंफोर्मेशन सर्विस निर्यात चीन के मुकाबल काफी ज्यादा है। हालांकि चीन भी तेजी से भारत की बराबरी में पहुंचने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी आईटी ताकत के बल पर सर्विस सेक्टर पर ज्यादा ध्यान देकर अपने कुल व्यापार संतुलन को बेहतर बना सकता है।

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भारत यदि शुद्ध वस्तु निर्यातक देश बनना चाहता है, तो उसके पास मैन्यूफैक्चरिंग का एक बड़ा आधार होना चाहिए। बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग आधार बनाने के लिए कारोबार शुरू करने की सहूलियत और कॉन्ट्रैक्ट को लागू करने की रैंकिंग ठीक करना जरूरी हैभारत यदि शुद्ध वस्तु निर्यातक देश बनना चाहता है, तो उसके पास मैन्यूफैक्चरिंग का एक बड़ा आधार होना चाहिए। बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग आधार बनाने के लिए कारोबार शुरू करने की सहूलियत और कॉन्ट्रैक्ट को लागू करने की रैंकिंग ठीक करना जरूरी है

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