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वुडन हैंडीक्राफ्ट के 4,000 करोड़ के बिजनेस पर खतरा, इंटरनेशनल नियम से बढ़ी दिक्कत

नई दिल्ली। इंटरनेशनल बॉडी सीआईटीईएस के हाल में जारी नए नियमों ने देश के 4,000 करोड़ रुपए के वुडन हैंडीक्राफ्ट कारोबार के लिए परेशानियां बढ़ा दी हैं। दरअसल, नए नियमों से इंडियन एक्सपोर्टर्स के लिए अमेरिका और यूरोप में वुडन एक्सपोर्ट करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसलिए एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) ने भारत सरकार से इंटरनेशनल बॉडी के आगे इंडिया का पक्ष रखने और दखल देने की मांग की है।
 
क्या है सीआईटीईएस
 
कंन्वेशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेंजर स्पीसिज ऑफ वाइल्ड फाउना एंड फ्लोरा (सीआईटीईएस) एक इंटरनेशनल ट्रीटी है, जिसने 182 देशों के लिए नियमों में बदलाव किया है। सीआईटीईएस का मकसद लुप्त होने वाले वाइल्ड लाइफ और पेड़ों को सुरक्षित करना है।
 
इंटरनेशनल एजेंसी ने बढ़ाई मुश्किलें
 
इंटरनेशनल बॉडी सीआईटीईएस ने दलबर्जिया एसपीपी (शीशम और रोजवूड लकड़ी) को अपेंडिक्स टू के केटेगरी में डाल दिया है। सीआईटीईएस के ऐसा करने से इंडियन वुड एक्सपोर्टर के लिए एक्सपोर्ट करना मुश्किल हो गया है। उनके लिए अमेरिकी और यूरोपीय बाजार के लिए एक्सपोर्ट करना मुश्किल हो जाएगा। इससे हैंडीक्राफ्ट वुड एक्सपोर्टर का 4,000 करोड़ रुपए का कारोबार दांव पर लग गया है।
 
यूपी और राजस्थान के वुडन एक्सपोर्टर हैं परेशान
 
ईपीसीएच के सीओए राजेश कुमार जैन ने कहा कि यूपी और राजस्थान के एक्सपोर्टर्स का मिलियन डॉलर शिपमेंट होल्ड हो गई हैं। नोट बंदी के कारण पहले से परेशान एक्सपोर्टर को इंटरनेशनल बॉडी ने एक और झटका दे दिया है।
 
सरकार से दखल करने की मांग
 
ईपीसीएच के चेयरमैन दिनेश कुमार अपनी टीम के साथ मिनिस्टर ऑफ स्टेट एनवायरमेंट, फॉरेस्ट और क्लाइमेट चेंज अनिल माधव दवे इस मुद्दे को सुलझाने को लेकर मिले। कुमार ने भारत सरकार से इंटरनेशनल मंच पर इंडिया का पक्ष रखने और नियमों में बदलाव कराने की मांग की है। मिनिस्टर ने उनसे इस मामले में दखल देने और मदद करने का आश्वासन दिया है।
 
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