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अपैरल एक्सपोर्ट पर स्लोडाउन का असर, टारगेट पूरा करना होगा मुश्किल

नई दिल्ली। देश के अपैरल एक्सपोर्ट के लिए साल 2016-17 अच्छा नहीं रहने वाला है। यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों से ऑर्डर नहीं मिलने के कारण पिछले साल का टारगेट पूरा करना मुश्किल हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि ये सीजन इस बार पूरा स्लोडाउन के कारण फ्लैट रहने वाला है।
 
अपैरल एक्सपोर्ट पर पड़ा ब्रेक्जिट असर
 
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के चेयरमैन एच के एल मग्गू ने moneybhaskar.com को बताया कि यूरोप से आने वाले ऑर्डर में ब्रेक्जिट का असर साफ नजर आ रहा है। 60 से 70 फीसदी एक्सपोर्टर को साल 2017-18 के लिए ऑर्डर नहीं मिले हैं। जिन्हें ऑर्डर मिले हैं उनके एक्सपोर्ट ऑर्डर में बीते साल की तुलना में कोई ग्रोथ नहीं है। ऑर्डर कम रहने के कारण एक्सपोर्टर कर्मचारियों की छंटनी कर रहे हैं।
 
साल 2017-18 के लिए नहीं मिले ऑर्डर
 
नोएडा में अपैरल एक्सपोर्टर अनिल मित्तल और एईपीसी के सदस्य ने बताया कि moneybhaskar.com ने बताया कि एक्सपोर्टर्स की इन्पुट कॉस्ट बढ़ी है लेकिन विदेशी बायर्स ने 1 फीसदी भी कीमतें बीते साल के मुकाबले नहीं बढ़ाई है। मौजूदा कॉस्ट पर एक्सपोर्टर के लिए ऑर्डर पूरा करना मुश्कि हो रहा है।

पाउंड के गिरने से एक्सपोर्टर उठा रहे हैं नुकसान
 
फियो के ईडी अजय सहाय ने Moneybhaskar.com को बताया कि पाउंड अपने 31 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने से अपैरल एक्सपोर्टर को 25 फीसदी तक का नुकसान हुआ है। पाउंड 103 के स्तर से 83 रुपए पर आ गया है। यानी बीते चार महीने में पाउंड के गिरने से उनके मार्जिन में 25 फीसदी की गिरावट आई है। ये बहुत बड़ा अंतर है।
 
टारगेट पूरा करना लग रहा है मुश्किल
 
मग्गु ने कहा कि अपैरल एक्सपोर्टर एसोसिएशन ने 2016-17 के लिए करीब 20 अरब डॉलर का टारगेट रखा है लेकिन इस बार पिछले साल 2015-16 का 17 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट टारगेट भी पूरा करना मुश्किल लग रहा है। इंडिया से अपैरल एक्सपोर्ट ब्राजील, अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और यूरोप के लिए सबसे ज्यादा होता है।
 
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