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ट्रेडर्स का 2000 टन स्टील पोर्ट पर फंसा, 8 फरवरी से बीआईएस नार्म्स हुए लागू

नई दिल्ली. स्टील पर स्टेनलेस स्टील क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (बीआईएस) एक्सटेंड नहीं होने से छोटी स्टील कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। कारोबारियों का करीब 2,000 टन स्टील पोर्ट पर फंस गया है। कारोबारियों के अनुसार जिस तरीके से पिछले 4 बार से स्टील बीआईएस एक्सटेंड हो रहा था। उसे देखते हुए उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें राहत मिल जाएगी जिसकी वजह से कई कारोबारियों ने बिना बीआईएस वाला स्टील इंपोर्ट कर लिया है। उनके अनुसार स्टील मिनिस्ट्री से क्लीयर ऑर्डर नहीं होने की वजह से कस्टम डिपार्टमेंट क्लीयरेंस नहीं दे रहा है।
 
क्या है बीआईएस ऑर्डर
 
सरकार के नया स्टेनलेस स्टील क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर 2016 जारी किया, जिसके तहत स्टील की मैन्युफैक्चरिंग,  इंपोर्ट, स्टोरेज, सेल और डिस्ट्रिब्यूशन के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) के तहत रजिस्टर कराना जरूरी है। बीआईएस स्टैंडर्ड पर खरा नहीं उतरने वाले स्टील का प्रोडक्शन, इंपोर्ट, स्टोरेज, सेल और डिस्ट्रिब्यूशन नहीं कर सकते। 
 
स्टील बीआईएस ऑर्डर की डेडलाइन एक्सटेंड नहीं होने से बढ़ी दिक्कतें
 
मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने moneybhaskar.com को बताया कि स्टील ट्रेडर्स और एमएसएमई ने बिना इंडियन बीआईएस स्टैंडर्ड मानक वाला स्टील इंपोर्ट कर रखा था। अब बीआईएस लागू होने से पोर्ट पर क्लीयर नहीं हो रहा है। जो माल शिपमेंट में है उस पर सवालिया निशान लग गया है। इससे एमएसएमई सेक्टर का करीब 2,000 टन का माल दांव पर लगा हुआ है।  
 
एमएसएमई एसोसिएशन बना रही है प्रेशर
 
एसोसिएशन डेडलाइन बढ़ाने की मांग कर रही हैं। उनके अनुसार बीआईएस लेने वाली कंपनियां कम है। ट्रेडर और कारोबारी विरोध कर रहे हैं और वह इसे छह महीने के लिए आगे बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं। स्टील एसोसिएशन मंत्रालय को डेडलाइन बढ़ाने का प्रेशर बना रही है। स्टील मंत्रालय पहले ही चार बार बीआईएसकी डेडलाइन बढ़ा चुकी है।
 
 
क्यू बढ़ी परेशानी - बीआईएस के लिए नहीं आई ज्यादा एंट्री
 
दुनिया में करीब 200 से अधिक स्टील कंपनियां हैं। अभी तक 8 स्टील मिलों को ही बीआईएस सर्टिफिकेट मिला है। इसमें से 4 इंडियन स्टील प्लांट ने बीआईएस सर्टिफिकेशन लिया है। सेल, बीआरजी और जिंदल के दो प्लांट ने बीआईएस प्लांट ने बीआईएस लिया है। सरकार के बीआईएस लागू करने से है तो स्टील बीआईएस लेने वाली कंपनियों की मोनोपोली हो गई है और वह स्टील और महंगा कर रही हैं।
 
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