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GST को लेकर ट्रेडर्स अभी भी कन्फ्यूज, इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए होलसेल ट्रेडर्स ने नहीं की तैयारी

नई दिल्ली। गुड्स और सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) 1 जुलाई 2017 से लागू हो सकता है लेकिन अभी तक देश के थोक बाजार के कारोबारी तकनीकी स्तर पर तैयार नहीं है। जीएसटी को लेकर अभी तक ट्रेडर्स और कारोबारी संगठनों में कन्फ्यूजन बना हुआ है। ट्रेडर्स एसोसिएशन सरकार से मांग कर ही है कि सरकार ट्रेडर्स को कंप्यूटर लगाने के लिए प्रोत्साहित करे और कंप्यूटर लगाने के लिए ट्रेडर्स को सब्सिडी दी जाए।
 
तकनीकी स्तर पर ट्रेडर्स नहीं है तैयार
 
ट्रेडर्स एसोसिएशन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को बताया कि  ट्रेडर्स जीएसटी के लागू होने का इंतजार कर रही है। लेकिन तकनीकी स्तर पर देश के थोक बाजार के कारोबारी जीएसटी के लिए तैयार नहीं है। सदर बाजार, चांदनी चौक, खारी बावली जैसे मार्केट के ट्रेडर्स अभी तक कंप्यूटर पर काम नहीं करते। वह सही तरीके से अकाउंट भी मेंटेन नहीं करते। ऐसे में उन ट्रेडर्स को जागरूक बनाने के लिए सरकार का काम करना होगा।
 
राज्य करें ट्रेडर्स को शिक्षित
 
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के जनरल सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि राज्य सरकार को अपने सिस्टम को ऑनलाइन करने में समय लगेगा। ट्रेडर्स को यूपी, बिहार, ओडिसा, गुजरात, हिरयाणा जैसे राज्यों में वैट के सिस्टम को लेकर दिक्कतें सबसे ज्यादा आती है। अभी राज्य सरकारों को अपने ऑनलाइन सिस्टम को बेहतर बनाना होगा। तभी वह ट्रेडर्स कम्यूनिटी को जीएसटी को लेकर तकनीकी स्तर पर शिक्षित कर पाएंगी।
 
सरकारकंप्यूटर लगाने के लिए दे सब्सिडी
 
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि सरकार थोक व्यपारियों और छोटे ट्रेडर्स को जीएसटी को लेकर जागरूक करे। ताकि, ट्रेडर्स जीएसटी आने पर परेशान न हो और अपने अकाउंटिग सिस्टम में उसे आसानी से शामिल कर सके। सरकार ट्रेडर्स को कंप्यूटर लगाने के लिए प्रोत्साहित करे और कंप्यूटर लगाने के लिए सब्सिडी दे।
 
ट्रेडर्स अभी तक इन प्वाइंट पर जीएसटी को लेकर है कन्फ्यूज
 
ट्रेडर्स की सबसे बड़ी परेशानी स्टॉक को लेकर है। 1 जुलाई 2017 को जो स्टॉक व्यापारियों के पास होगा और जिस पर पहले से ही वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स दिया जा चुका है, उस स्टॉक का जीएसटी में क्या होगा? क्या व्यापारियों को उसका इनपुट क्रेडिट मिलेगा? यदि नहीं मिला तो ट्रेडर्स को नुकसान होगा।
 
इनपुट क्रेडिट पर है कन्फ्यूजन
 
इनपुट क्रेडिट आसानी से मिले, यह सिस्टम होना जरूरी है। हालांकि, जीएसटी प्रावधानों के मुताबिक दो ट्रेडर्स के बीच हुए सौदे में यदि एक भी ट्रेडर लापरवाही या कोई गलती करता है तो इसका खामियाजा दूसरे ट्रेडर को भी भुगतना पड़ेगा। यानी दूसरे ट्रेडर को इनपुट क्रेडिट तभी मिलेगा, जब दोनों व्यापारियों के रिटर्न आपस में मेल खाएंगे।
 
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