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बिहार का बजट पेश, शिक्षा, सड़क और बिजली पर जोर

बिहार का बजट पेश, शिक्षा, सड़क और बिजली पर जोर
पटना। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बाद 2017-18 वित्तीय वर्ष का बजट विधानसभा में पेश किया गया। बिहार के फाइनेंस मिनिस्‍टर अब्दुल बारी सिद्दीकी ने सोमवार को महागठबंधन सरकार की ओर से 2017-18 का बजट पेश किया। इस 1 लाख 60 हजार करोड़ के सरप्लस बजट में शिक्षा, गावों के विकास, बिजली और सड़क को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है।
इसके अलावा कृषि, जल संसाधन, शहरी विकास और समाज कल्याण पर भी मुख्य रूप से जोर दिया गया है। सबसे खास बात यह रही है कि सरकार ने किसी भी क्षेत्र में नया टैक्स बढ़ा कर जनता पर बोझ नहीं डाला है।  वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने भाषण सिर्फ 22 मिनट में खत्म कर दिया।
 
शिक्षा पर अधिक जोर
 
बजट में शिक्षा को सबसे अधिक अधिक तरजीह दी गई है। पिछले वर्ष 21897 करोड़ रुपए की तुलना में वर्ष 2017-18 में 25251 करोड़ रुपए शिक्षा पर खर्च होंगे। पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के माध्यम से सड़कों के निर्माण पर इस वर्ष 14 हजार करोड़ खर्च किए जाएंगे। पहली बार सड़कों के रखरखाव और मरम्मत के लिए 1037 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। समाज कल्याण पर 5949 करोड़ रुपये खर्च होंगे। महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग पर खर्च होने वाली राशि पिछले वर्ष की तुलना में 992 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए जा रहे हैं।
 
नोटबंदी का बिहार पर पड़ा असर
 
वित्त मंत्री ने कहा कि अभी बिहार देश में सबसे तेज विकास दर वाले राज्यों में से एक है। नोटबंदी का बिहार पर भी असर पड़ा है। अगर केंद्र से राज्य को पर्याप्त सहायता मिलती, बिहार को प्रधानमंत्री द्वारा घोषित विशेष पैकेज मिल जाता, केंद्रीय योजनाओं का फंडिंग पैटर्न राज्यहित में होता और विशेष राज्य का दर्जा मिल गया होता तो हमारे बजट में चार चांद लग जाता। लेकिन इसके बावजूद हम बिहार पर नोटबंदी का असर नहीं आने देंगे।

 

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