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मोदीजी कैसे मिलेंगी नौकरियां, जब नौकरी देने वाले सेक्टर्स का ऐसा बुरा है हाल

नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव के अपने घोषणा पत्र में वादा किया था, कि वह हर साल 2 करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा करेंगे। मोदी सरकार ने इस दिशा में कई अहम कदम भी उठाएं हैं। उसके बावजूद सबसे ज्यादा नौकरी देने वाले प्रमुख सेक्टर्स का बुरा हाल है। रि‍जर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वैलरी, फूड प्रोसेसिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर द्वारा बैंकों से कर्ज लेने की डिमांड नेगेटिव हो गई है। जिसका सीधा मतलब है कि कारोबारी एक्सपैंशन नहीं कर रहे हैं। जिसका सीधा असर नई नौकरियों के अवसर पर होगा।
 
क्या कहते हैं आंकड़े?
 
आरबीआई से moneybhaskar.com को मिली जानकारी के अनुसार मार्च 2016 से जनवरी 2017 की अवधि में प्रमुख इंडस्ट्री से कर्ज की डिमांड नेगेटिव हो गई है।
सेक्टर
 क्रेडिट ग्रोथ (फीसदी में)
मौजूदा नौकरियां (करोड़ में अनुमानित)
फूड प्रोसेसिंग
-12.8
15-20 लाख
टेक्सटाइल
-9.1
3.2 करोड़
लेदर
-4.7
25 लाख
इंजीनियरिंग
-4.5
10  लाख
जेम्स एंड ज्वैलरी
-7.3
25-30 लाख
इंफ्रास्ट्रक्चर
-6.5
4.5 करोड़
माइनिंग
-13.8
10-15 लाख
 
नेगेटिव ग्रोथ का क्या है मतलब
 
बैंकर सुनील पंत के अनुसार, बैंकों से क्रेडिट ग्रोथ नेगेटिव होने का सीधा मतलब है कि कारोबारी नए कर्ज नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह उनका एक्सपैंशन प्लान रोकना है। साथ ही मौजूदा बिजनेस के लिए भी काफी सतर्क रुख कंपनियां अपना रही है। जिस वजह से डिमांड नहीं आ रही है। अगर ऐसा होता है, तो सीधा इम्पैक्ट नई नौकरियों से लेकर मौजूदा नौकरियों पर पड़ेगा।
 
 
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