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नोटबंदी से 20-30 फीसदी गिरा बिजनेस, मोदी का ऐलान नहीं देगा फायदा

नई दिल्‍ली। नोटबंदी का सबसे बड़ा नुकसान छोटे कारोबारियों को हुआ है, यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नववर्ष की पूर्व संध्‍या पर एमएसएमई सेक्‍टर के लिए कई घोषणाएं कींं, लेकिन ये घोषणाएं छोटे कारोबारियों के लिए नाकाफी साबित हो सकती हैं। कारोबारियों का कहना है‍ कि नोटबंदी से जितना नुकसान हुआ है, उसके मुकाबले घोषणाएं कम हैं। खासकर छोटे कारोबारियों को लोन देने के मामले में बैंकों का परफॉरमेंस अच्‍छा नहीं है, इसलिए प्रधानमंत्री को घोषणाएं लागू कराने पर भी ध्‍यान देना होगा।
 
लोन ही नहीं देते बैंक
 
प्रधानमंत्री ने क्रेडिट गारंटी 1 करोड़ से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए करने की घोषणा की है, लेकिन कारोबारियों का कहना है कि बैंक बिना गारंटी के लोन देने को तैयार ही नहीं होते। इंटिग्रेटिड एसोसिएशन्‍स ऑफ माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (आईएमएसएमई) ऑफ इंडिया के चेयरमैन राजीव चावला ने कहा कि यह घोषणा वकाई बहुत बढि़या है, लेकिन सरकार को इसकी मॉनिटरिंग करनी चाहिए। बैंक 1 करोड़ रुपए का लोन देने में आनाकानी करते हैं तो वे 2 करोड़ रुपए का लोन देंगे या नहीं, इस पर सरकार को नजर रखनी होगी।
 
प्रोडक्‍शन गिरा, कैसे बढ़ेगी सीसी लिमिट
 
प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि कैश क्रेडिट (सीसी) लिमिट 20 से बढ़ाकर 25 फीसदी की जाएगी, जबकि डिजिटल ट्रांजैंक्‍शन करने वालों की लिमिट 30 फीसदी की जाएगी। सीसी लिमिट टर्नओवर के आधार पर दी जाती है, लेकिन नोटबंदी की वजह से 20 से 30 फीसदी टर्नओवर कम होने की पूरी संभावना है। ऐसे में यदि सीसी लिमिट बढ़ने के बावजूद कारोबारियों को कम लोन मिलेगा। इंडियन इंडस्‍ट्रीज एसोसिएशन, नोएडा के प्रेसिडेंट एनके खरबंदा ने कहा कि प्रोडक्‍शन और डिमांड सामान्‍य होने तक इस घोषणा का कोई फायदा नहीं मिलेगा।
 
माइक्रो सेक्‍टर को फायदा नहीं
 
नोटबंदी का सबसे अधिक नुकसान माइक्रो सेक्‍टर को हुआ है। प्रधानमंत्री ने जो घोषणाएं की हैं, वे लोन से संबंधित नहीं है, लेकिन अभी भी देश का 80 फीसदी माइक्रो सेक्‍टर बैंकों से जुड़ा नहीं है। मतलब, इन कारोबारियों को बैंक लोन नहीं देते, जिसमें रेहड़ी पटरी लगाने वाले से लेकर छोटे दुकानदार शामिल हैं। ये कारोबारी साहूकारों, दोस्‍तों, परिजनों से लेकर लोन लेकर अपना व्‍यापार करते हैं, लेकिन नोटबंदी की वजह से इन कारोबारियों को ऐसा लोन नहीं मिल रहा है। चावला ने कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री ने मुद्रा स्‍कीम लॉन्‍च की थी, लेकिन अभी तक उसका दायरा ऐसे कारोबारियों तक नहीं पहुंचा है। डिमोनिटाइजेशन के बाद यह बेहद जरूरी हो गया है कि इन कारोबारियों को मुद्रा स्‍कीम के दायरे में लाया जाए।
 
बजट से है और उम्‍मीद
 
हालांकि एमएसएमई सेक्‍टर को उम्‍मीद है कि अभी सरकार कुछ और घोषणाएं कर सकती है। लघु उद्योग भारती के राष्‍ट्रीय महासचिव जितेंद्र गुप्‍ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने यह तो दिखा दिया है कि उन्‍हें  छोटे कारोबारियों की चिंता है। उम्‍मीद है कि  अब वह बजट में भी छोटे कारोबारियों के लिए और महत्‍वपूर्ण घोषणाएं करेंगे। 
 

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