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कैशलेस सैलरी पेमेंट पर छोटे कारोबारियों ने हाथ खड़े किए, कहा- अभी नहीं हैं तैयार

 
नई दिल्‍ली। लोकसभा में पेमेंट ऑफ वेजेज (अमेंडमेंट) बिल के पास होते ही उसका विरोध भी शुरू हो गया है। छोटे कारोबारियों के संगठनों का कहना है कि बिल के प्रावधानों को लागू करना उनके लिए संभव नहीं है और यदि राज्‍यों ने इस लागू करने की जल्‍दबादी की तो वे इसका विरोध करेंगे।
 
क्‍या है बिल में प्रावधान
 
वेजेज पेमेंट एक्‍ट 1936 के मुताबिक, सभी प्रकार की सैलरी या वेजेज का भुगतान कैश में किया जाएगा, लेकिन यदि इम्‍पलायर चेक से पेमेंट करना चाहता है तो उसे वर्कर्स की लिखित अनुमति लेनी होगी। अब इसमें संशोधन करते हुए कहा गया है कि सैलरी बैंक खाते में ट्रांसफर या चेक से पेमेंट करने के लिए वर्कर्स से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। बिल 2017 में यह अमेंडमेंट भी किया गया है कि केंद्र या राज्‍य सरकार कुछ विशिष्‍ट औद्योगिक या संस्‍थान को यह निर्देश दे सकते हैं कि उनके इम्‍पलायर अपने कर्मचारियों को केवल चेक या बैंक ट्रांसफर से सैलरी का पेमेंट करना होगा।
 
संगठनों ने जताया विरोध
 
फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (फिस्‍मे) के महासचिव अनिल भारद्वाज ने मनीभास्‍कर से कहा कि फिस्‍मे सभी मोड से पेमेंट करने के निर्देश का स्‍वागत करता है, लेकिन हमें डर है कि इंडस्‍ट्री को केवल चेक या बैंक से पेमेंट करने को बाध्‍य किया जा सकता है। हमारी सरकार से अपील है कि पहले वर्कर्स को इस बात के लिए तैयार करे कि वे चेक से पेमेंट ले लेंगे। भारद्वाज ने कहा कि अभी भी कई इंडस्‍ट्री ऐसी हैं, जहां डेली वेजेज या प्राइस वेजेज वर्कर्स रोजाना कैश पेमेंट लेता है। उससे आप कहें कि वह रोज चेक ले तो वह खुद मना कर देगा। इसी तरह मंथली वेजेज लेने वाले वर्कर्स भी चेक नहीं लेते। ऐसे में, अगर किसी राज्‍य सरकार ने चेक या बैंक से पेमेंट मेंडेटरी कर दिया तो उसका विरोध किया जाएगा।
 
अकाउंट नहीं खोल रहे हैं बैंक
 
एसएमई संगठनों का कहना है कि बैंक कर्मचारियों के खाते खोलने में भी दिक्‍कतें कर रहे हैं। मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन ऑफ फरीदाबाद (एमएएफ) के पूर्व प्रेसिडेंट नरेश वर्मा ने कहा कि बैंक वर्कर्स के खाते नहीं खोल रहे हैं। बैंक कहते हैं कि कंपनी मालिक को अपने वर्कर्स की गारंटी देनी होगी, माइग्रेंट वर्कर्स की गारंटी कैसे दी जा सकती है। डीएलएफ इंडस्‍ट्रीज एसोसिएशन, फरीदाबाद के प्रेसिडेंट जेपी मल्‍होत्रा ने कहा कि बैंक जीरो बैलेंस में खाते नहीं खोल रहे हैं, ऐसे में वर्कर्स मिनिमम बैलेंस पर खाते खुलवाने के लिए तैयार नहीं हैं। अब जब खाते ही नहीं खुलेंगे तो कैशलेस सैलरी पेमेंट कैसे कर सकते हैं।
 
अगली स्‍लाइड में पढ़ें – और क्‍या कह रहे हैं संगठन 
 
 

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