Home »SME »Industry Voice» 25 To 40 Per Cent Workers Were Sacked By MSMEs

नोटबंदी के कारण इंडस्‍ट्री में कम हुई मैन पावर, 25 से 40 फीसदी वर्कर्स की छंटनी

 
नई दिल्‍ली। नोटबंदी की वजह से इंडस्‍ट्री में मैन पावर कम हो गई है। खासकर एसएमई सेक्‍टर में वर्कर्स की बड़े स्‍तर पर छंटनी कर दी गई है। इंडस्‍ट्री सूत्रों का कहना है कि नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव जैसे इंडस्ट्रियल सिटीज में 25 से 40 फीसदी तक कॉन्‍ट्रेक्‍ट वर्कर्स की छंटनी कर दी गई है। इसके चलते उनका प्रोडक्‍शन डाउन हो गया है, लेकिन वे अपने परमानेंट वर्कर्स से ही काम चला रहे हैं।
 
इन सेक्‍टर पर पड़ा असर
 
नोटबंदी की वजह से वर्कर्स की छंटनी सबसे अधिक असर टैक्‍सटाइल, आटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, स्‍टील और कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर पर पड़ा है। फरीदाबाद में आटोमोबाइल पार्ट्स बनाने वाले एक प्रमुख कारोबारी ने बताया कि उनके यहां कुल 100 वर्कर्स थे, जिसमें से 40 ऐसे वर्कर थे, जो कॉन्‍ट्रेक्‍ट पर थे। उन्‍हें कैश में सैलरी दी जाती थी, लेकिन नोटबंदी के बाद जब बैंकों से कैश नहीं मिला तो उन वर्कर्स को सैलरी देने में बड़ी दिक्‍कत हुई। इसलिए उन वर्कर्स को कहा गया है कि वे फिलहाल घर पर रहें, अगर आने वाले दिनों में जरूरत पड़ी तो उन्‍हें बुलवाया जाएगा। उन्‍होंने माना कि इससे प्रोडक्‍शन पर असर पड़ा है, लेकिन डिमांड कम होने के कारण अभी उन्‍हें दिक्‍कत नहीं हो रही है और अगर डिमांड बढ़ गई तो वे अपने परमानेंट वर्कर्स से ओवरटाइम करा कर प्रोडक्‍शन पूरा करेंगे।
 
 
बैंकिंग सिस्‍टम से देंगे सैलरी
 
शनिवार को सात तारीख है, ज्‍यादातर एसएमई सात तारीख को ही सैलरी देते हैं। दो माह से सैलरी देने में दिक्‍कत हो रही थी, लेकिन इस बार ज्‍यादातर वर्कर्स की सैलरी बैंक में ट्रांसफर की जाएगी। कारोबारियों का कहना है कि कैश में सैलरी कॉन्‍ट्रेक्‍ट वर्कर्स को दी जाती थी, लेकिन फिलहाल इन वर्कर्स को हटा दिया गया है। ऐसे वर्कर्स की संख्‍या अलग अलग सेक्‍टर में 25 से 40 फीसदी तक थी।
 
लोन मिलने के बाद हो सकते हैं हालात सामान्‍य
 
नोएडा में भी बड़े स्‍तर पर वर्कर्स की छंटनी की गई है। नोएडा के एक कारोबारी ने कहा कि सभी वर्कर्स को रोल पर नहीं रखा जाता था, नोटबंदी होने के बाद यह हालात बन गए कि वर्कर्स को रोल पर लिए बिना सैलरी नहीं दी जा सकती और अचानक इतने वर्कर्स को रोल पर नहीं लिया जा सकता, इसलिए उन्‍हें अपने वर्कर्स को निकालना पड़ा। उन्‍होंने कहा कि उन्‍होंने लगभग 25 फीसदी वर्कर्स निकाल दिए हैं। अब तब ही स्थिति सामान्‍य होगी, जब बैंक उन्‍हें लोन दें और उसके बाद वे नए सिरे से वर्कर्स को भर्ती करें।
 
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