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मु्द्रा स्‍कीम के टारगेट बताने में वित्‍त मंत्री कर गए ‘खेल’, दिया पिछले साल का हवाला

 
नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने छोटे कारोबारियों को लोन देने वाली स्‍कीम मुद्रा की घोषणा में ‘खेल’ कर दिया। उन्‍होंने घोषणा की कि बजट 2017-18 में मुद्रा स्‍कीम का टारगेट दोगुना किया जाता है, लेकिन उन्‍होंने यह टारगेट पिछले साल के मुकाबले किया है, जबकि इस साल के टारगेट के मुकाबले केवल 35 फीसदी की वृद्धि की गई है। दिलचस्‍प बात यह है‍ कि सरकार मुद्रा स्‍कीम का साल 2016-17 का टारगेट हासिल करने से कोसों दूर है। साल खत्‍म होने में केवल दो माह का समय बचा है और अब तक सरकार 50 फीसदी टारगेट ही हासिल कर पाई है।
 
क्‍या है घोषणा
 
वित्‍त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के उन कारोबारियों को लोन दिया गया है, जिनको लोन नहीं मिलता था। पिछले साल का टारगेट 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपए था और टारगेट से अधिक लोन छोटे कारोबारियों को दिया गया। इसलिए साल 2017-18 के बजट में इसे बढ़ा कर दोगुना यानी 2 लाख 44 हजार करोड़ किया जाता है। इसमें महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को प्रमुखता दी जाएगी।
 
क्‍या है खेल
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुद्रा स्‍कीम की लॉन्चिंग साल 2015 में की थी और उस समय टारगेट रखा गया था, 1 लाख 22 हजार करोड़ रुपए। 31 मार्च 2016 तक मुद्रा स्‍कीम के तहत 1 लाख 32 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया गया। इसके बाद बजट में साल 2016-17 का टारगेट रखा गया, 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए, जिसका वित्‍त मंत्री ने इस बार जिक्र तक नहीं किया। ऐसे में, यदि अब टारगेट बढ़ा कर 2 लाख 44 हजार करोड़ रुपए रखा गया है तो इसका आशय है कि सरकार ने टारगेट में लगभग 35 फीसदी ही बढ़ोतरी की है।
 
टारगेट से कोसों दूर
 
साल 2016-17 के मुद्रा स्‍कीम के 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए के टारगेट को अचीव करने में मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। बजट के दौरान पेश किए 2016-17 की अचीवमेंट्स के डॉक्‍यमेंट्स बताते हैं कि मुद्रा स्‍कीम के तहत 81 हजार 721 करोड़ रुपए का लोन ही सेंक्‍शन किया गया। जबकि मुद्रा की वेबसाइट बताती है कि 27 जनवरी 2017 तक 97 हजार 574 करोड़ रुपए का लोन दिया जा चुका है, जबकि 1 लाख 314 करोड़ रुपए का लोन सेंक्‍शन हुआ है। जिसका मतलब है कि सरकार को दो माह के दौरान अभी लगभग 83 हजार करोड़ रुपए का लोन देना है।
 
क्‍या है वजह
 
साल 2016-17 का टारगेट हासिल करने में सबसे अधिक दिक्‍कत नोटबंदी बताई जा रही है। मुद्रा के सीइओ जीजी मेमन ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में कहा था कि नोटबंदी की वजह से टारगेट हासिल करने में दिक्‍कतें आ रही हैं, क्‍योंकि बैंक लोन देने की ओर ध्‍यान नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि उन्‍होंने दावा किया था कि 31 मार्च तक टारगेट हासिल कर लिया जाएगा, लेकिन बैंक अभी भी पूरी तरह मुद्रा पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं। 

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