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कमर्शियल प्रॉपर्टी पर नहीं दिखा नोटबंदी का असर, छह माह में रेंट बढ़ने की उम्‍मीद

 
नई दिल्‍ली। नोटबंदी का असर रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में तो बड़ा असर पड़ा है, लेकिन कमर्शियल रियल एस्‍टेट पर कोई असर नहीं पड़ा, बल्कि कमर्शियल रियल एस्‍टेट पर इन्‍वेस्‍टमेंट करने वालों के लिए नोटबंदी ने अच्‍छे संकेत दिए हैं। नोटबंदी के बाद से ऑफिस और रिटेल मार्केट का रेंट बढ़ रहा है। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले छह माह में कमर्शियल स्‍पेस के रेंट में अच्‍छी खासी ग्रोथ हो सकती है।
 
नहीं दिखा असर, रेंट में मार्जिनल वृद्धि
 
जेएलएल, इंडिया के चेयरमैन एवं कंट्री हेड अनुज पुरी भी मानते हैं कि कॉमर्शियल लीजिंग मार्केट पर डिमोनिटाइजेशन का कोई असर नहीं पड़ा। वहीं, प्रॉपर्टी कंसलटेंट सीबीआरई की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 के चौथे क्‍वार्टर ( अक्‍टूबर से दिसंबर) के दौरान रेंट में मार्जिनल ग्रोथ देखी गई। तीसरे क्‍वार्टर के मुकाबले चौथे क्‍वार्टर में 2 से 8 फीसदी की वृद्धि हुई। इनमें एनसीआर के मह‍रौली-गुरुग्राम रोड, बंगलुरु के रेसिडेंसी रोड के साथ साथ मुंबई, कोलकाता में भी रेंट में वृद्धि हुई।
 
एनसीआर में यहां हुई ग्रोथ
 
दिल्‍ली के कनॉट प्‍लेस सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्‍ट में भी अक्‍टूबर से दिसंबर के बीच रेंटल एक्टिविटी में ग्रोथ देखी गई। इसी तरह नेहरू प्‍लेस, साकेत और जसोला के सेकेंडरी बिजनेस डिस्ट्रिक्‍ट में भी ऑफिस लीजिंग में थोड़ी बहुत ग्रोथ हुई। ऑफिस लीजिंग के मामले में गुड़गांव ने सब शहरों को पीछे छोड़ दिया। वहीं, रिटेल सेक्‍टर में भी दिल्‍ली-एनसीआर में कॉमर्शियल स्‍पेस की डिमांड बढ़ी है। जेएलएल के मुताबिक, कई ग्‍लोबल रिटेलर ब्रांड भारत में आ रहे हैं, जिनकी पहली पसंद दिल्‍ली एनसीआर ही है। ऐसे में, यहां रेंट में वृद्धि की पूरी संभावना है।
 
छह माह में ग्रोथ की उम्‍मीद
 
प्रॉपर्टी कंसलटेंट नाइट फ्रेंक की ताजा रियल एस्‍टेट इंडेक्‍स रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि सर्वे में 88 फीसदी स्‍टेक होल्‍डर्स ने माना कि कमर्शियल रियल एस्‍टेट मार्केट के लीजिंग वोल्‍यूम में छह माह के भीतर ग्रोथ होगा, या वोल्‍यूम समान रहेंगे।
 
क्‍या है वजह
 
नाइट फ्रेंक, इंडिया के नेशनल डायरेक्‍टर (ऑक्‍यूपायर सोल्यूशन्‍स) विरल देसाई ने ‘मनीभास्‍कर’ को बताया कि कमर्शियल लीजिंग मार्केट में डिमोनिटाइजेशन का असर इसलिए नहीं पड़ा, क्‍योंकि डिमोनिटाइजेशन का फेज बहुत छोटा था। लगभग 50 दिन में हालात सामान्‍य होने लगे थे। जबकि यदि किसी को लीज कैंसिल करनी हो तो कम से कम 3 माह पहले उसकी सूचना देनी होती है और शिफ्टिंग में लगभग 6 माह का समय लगता है। 50 दिन में हालात सामान्‍य होने लगे, इसलिए इसका नेगेटिव इम्‍पैक्‍ट कमर्शियल लीजिंग मार्केट पर नहीं दिखा। बल्कि जो कमर्शियल स्‍पेस खरीदने की सोच रहा था, उन्‍होंने भी फिलहाल लीज पर लेने का फैसला किया, जिससे रेंट में मार्जिनल इंक्रीज हुआ। 

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