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बिल्डर्स की शिकायत करना हुआ आसान, छोटे बायर्स की सुनवाई करेगा कंज्यूमर कमीशन

 
नई दिल्‍ली। अगर आपने एक करोड़ रुपए से कम कीमत के फ्लैट के लिए बिल्‍डर्स के पास पैसा जमा कराया, लेकिन बिल्‍डर ने आपको फ्लैट पर कब्‍जा नहीं दिया तो तो आप नेशनल कंज्‍यूमर डिस्‍प्‍यूट्स रिड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) से शिकायत कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में स्‍पष्‍ट किया है कि एक करोड़ से कम कीमत के होम बायर्स मिलकर एनसीडीआरसी में अपना केस लड़ सकते हैं। कोर्ट ने नोएडा के आम्रपाली सफायर और गुरुग्राम के यूनिटेक एंथिया प्रोजेक्‍ट के बायर्स को यह राहत दी है।
क्‍या है मामला
 
यह धारणा है कि एनसीडीआरसी केवल उन मामलों की सुनवाई करता है, जिनका क्‍लेम एक करोड़ रुपए से अधिक हो। इसे कम अमाउंट के क्‍लेम जिला कंज्‍यूमर फोरम या स्‍टेट कमीशन में सुने जाते हैं। लेकिन हाल ही में दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छोटे फ्लैट बायर्स मिलकर शिकायत कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट प्रियांजलि सिंह ने www.moneybhaskar.com को  बताया कि कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन एक्‍ट की धारा 12बी में यह भी प्रोविजन है कि कोई रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन या कंज्‍यूमर्स एसोसिएशन भी एनसीडीआरसी में याचिका दायर कर सकती है, बेशक उनके सदस्‍यों के क्‍लेम 1 करोड़ रुपए से नीचे हों, लेकिन सबके क्‍लेम मिलाकर 1 करोड़ रुपए से अधिक हो। इसी तरह एक्‍ट की धारा 12सी में यह व्‍यवस्‍था है कि एक ही क्‍लास या कैटेगिरी के कंज्‍यूमर्स भी मिलकर अपनी याचिका दायर कर सकते हैं।
 
क्‍या है यूनि‍टेक मामला
 
प्रियांजलि सिंह, जो यूनिटेक के खिलाफ दायर एक मामले की एडवोकेट भी हैं ने बताया कि गुरुग्राम के सेक्टर 70 में एंथिया फ्लोर प्रोजेक्ट को लेकर पिछले साल बायर्स ने एनसीडीआरसी में याचिका दायर की थी। लेकिन याचिका की प्रेयर के आधार पर एनसीडीआरसी ने बायर्स को एक ही क्‍लास का मानने से इंकार कर दिया था। इसके चलते उन्‍होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा। सिंह ने कहा कि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक एनसीडीआरसी में प्रेयर में थोड़ा सा बदलाव करना है, जिसमें लिखा जाएगा कि यह केस एंथिया के बायर्स के लिए बेनिफिट के लिए है। इसके लिए कोर्ट ने 4 सप्‍ताह का समय दिया है और एक बार प्रेयर एडमिट होने के बाद एनसीडीआरसी से कहा गया है कि वह 4 माह के भीतर अपना फैसला सुनाए।
 
क्‍या था आम्रपाली बायर्स का मामला
 
पैसे लेने के बावजूद फ्लैट न दिए जाने के चलते आम्रपाली सफायर प्रोजेक्‍ट के 43 बायर्स ने एनसीडीआरसी में याचिका दायर की थी। हालांकि उनके फ्लैट्स की कीमत 30 से 50 लाख रुपए थी, लेकिन अगस्‍त 2016 में एनसीडीआरसी के मैंबर जस्टिस वीके जैन ने उनकी याचिका को यह कहकर स्‍वीकार कर लिया था कि वे एक साथ मिलकर अपनी याचिका दायर कर रहे हैं, इसलिए उनकी याचिका पर सुनवाई होगी, लेकिन आम्रपाली ने एनसीडीआरसी के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि बायर्स का क्‍लेम 1 करोड़ रुपए से कम है, इसलिए एनसीडीआरसी में सुनवाई हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली की याचिका खारिज करते हुए कहा कि बायर्स मिलकर याचिका दायर कर सकते हैं।  
 
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