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‘अगले साल भी नहीं होगा रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में सुधार’

‘अगले साल भी नहीं होगा रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में सुधार’
 
 
नई दिल्‍ली। ऊंची कीमतें और प्रोजेक्‍ट्स के डिले होने के कारण हाउसिंग सेल्‍स के सुस्‍त रहने के कारण अगले फिसकल में रियल्‍टी सेक्‍टर का आउटलुक नेगेटिव रहेगा। इंडिया रेटिंग्‍स एंड रिसर्च ने यह अनुमान लगाया है। इंडिया रे‍टिंग्‍स के मुताबिक, कैश फ्लो के नेगेटिव रहने से डेट लेवल बढ़ेगा और रियल एस्‍टेट सेक्‍टर का क्रेडिट प्रोफाइल कमजोर होगा।
 
इस एजेंसी ने जारी की रिपोर्ट
 
इंडिया रेटिंग्‍स ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि फाइनेंशियल ईयर (2017-18) में रियल एस्‍टेट सेक्‍टर का आउटलुक नेगेटिव ही रहेगा, क्‍योंकि रेसिडेंशियल यूनिट्स की सेल में चल रही सुस्‍ती खत्‍म होने के आसार नहीं हैं।
 
कैश फ्लो नेगेटिव रहेगा
 
एजेंसी ने कहा है कि सेल न होने के कारण कैश फ्लो नेगेटिव रहेगी और इससे पहले से ही सेक्‍टर के हाई डेट लेवल में और बढ़ोतरी होगी। इसके चलते सेक्‍टर का क्रेडिट प्रोफाइल और कमजोर हो जाएगा।
 
रेट बढ़ने से घटी सेल
 
एजेंसी ने कहा है कि साल 2013-14 से रेसिडेंशियल यूनिट्स की सेल में लगातार गिरावट हो रही है, क्‍योंकि उस समय से हाउसिंग यूनिट्स के प्राइस काफी हाई हैं और यह एंड-यू‍जर्स के लिए अफोर्डेबल नहीं रहे।
 
प्रोजेक्‍ट डिले होने से घटा विश्‍वास
 
इसके अलावा अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन प्रोजेक्‍ट्स के कंप्‍लीशन में भी लगातार देरी हो रही है, जिसकी वजह से सेक्‍टर पर कंज्‍यूमर का विश्‍वास घट रहा है। इसके साथ ही, जो लोग इन्‍वेस्‍टमेंट के लिए रेसिडेंशियल यूनिट्स को खरीदते थे, नोटबंदी की वजह से उसकी संभावना भी न के बराबर हो गई है। इतना ही नहीं, सरकार के नए बेनामी प्रॉपर्टी एक्‍ट की वजह से यह इन्‍वेस्‍टमेंट प्रभावित हो रहा है।
 
लिक्विडिटी पर पड़ेगा असर
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि रियल एस्‍टेट रेग्‍युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्‍ट (रेरा) की वजह से अगले फिसकल के पहले हाफ में लिक्विडिटी पर भी असर पड़ेगा।  

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