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सरकारी योजनाओं के कारण जमीन हुई महंगी तो देने होंगे टैक्स, पॉलिसी तैयार

नई दिल्‍ली. अगर किसी गवर्नमेंट स्कीम के चलते आपकी प्रॉपर्टी के दाम बढ़ जाते हैं, तो उसके एवज में आपको टैक्स देना होगा। ऐसी पॉलिसी का फ्रेमवर्क केंद्र ने तैयार कर लिया है और ज्‍यादातर राज्‍यों ने सहमति भी दे दी है। अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्‍ट्री ने मंगलवार को वेल्‍यू कैप्‍चर फाइनेंसिंग (वीसीएफ) पॉलिसी राज्‍यों के सामने रखी। सहमति के बाद ये तय किया गया कि 2019-20 तक पॉलिसी लागू कर दी जाए। 100 स्‍मार्ट सिटीज समेत 500 अमृत शहरों में लागू होगी पॉलिसी...
 

- मिनिस्ट्री के मुताबिक 2019-20 तक इस पॉलिसी को देश के सभी 100 स्मार्ट सिटीज और 500 अमृत शहरों में लागू कर दिया जाएगा।
- अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्‍टऱ वैंकेया नायडू की अध्‍यक्षता में एक बैठक में लगभग सभी राज्‍यों के अधिकारी शामिल हुए। 
- बैठक में बताया गया कि देश की जीडीपी में म्‍युनिसिपल सेक्‍टर से मिलने वाले रेवेन्‍यू का शेयर मात्र 0.75 फीसदी है, जबकि साउथ अफ्रीका में 6, ब्राजील में 5 और पोलेंड में 4.50 फीसदी है। इसलिए राज्‍य सरकारों को म्‍युनिसिपल बॉडी के रेवेन्‍यू बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए। 
- बैठक में वेल्‍यू कैप्‍चर फाइनेंस पॉलिसी का फ्रेमवर्क राज्‍यों को बताया गया। सोर्सेज के मुताबिक, गुजरात, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, अरुणाचल प्रदेश, गोवा ने जानकारी दी कि वे वीसीएफ मॉडल को लागू करने के लिए तैयार हैं।
 
इस तरह लागू होगी वीसीएफ पॉलिसी
- अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्‍ट्री ने राज्‍यों के सामने वीसीएफ मॉडल को लागू करने का टारगेट रखा है।
- इसके मुताबिक, 2017-18 में हर राज्‍य में वीसीएफ पॉलिसी और रूल्‍स बनाए जाएंगे। 
- 2018-19 में यह पॉलिसी 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लागू कर दी जाएगी। 
- 2019-20 में यह पॉलिसी सभी 100 स्‍मार्ट सिटीज सहित 500 अमृत (अटल मिशन फॉर रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) शहरों में लागू कर दी जाएगी। 
- मिनिस्‍ट्री ने राज्‍यों से कहा है कि तय टारगेट के मुताबिक यदि यह पॉलिसी लागू की गई तो केंद्र की ओर से राज्‍यों को इन्‍सेंटिव दिया जाएगा।
 
क्‍या है वेल्‍यू कैप्‍चर फाइनेंस?
- कई देशों में सरकारें वेल्‍यू कैप्‍चर फाइनेंसिंग मॉडल पर पब्लिक के लिए इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स तैयार करती है। 
- जिसका प्रिंसिपल है कि पब्लिक इन्‍वेस्‍टमेंट से बनने वाले इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर से फायदा लेने वाले लोगों को सरकार को टैक्स भी देना चाहिए। 
- केंद्र के ऑर्गनाइजेशन नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) ने म्युनिसिपल बॉडी की इनकम बढ़ाने के लिए वीसीएफ पॉलिसी तैयार की है।
 
वीसीएफ में कौन-कौन से टैक्स लग सकते हैं?
- राज्‍य अपने शहरों में इनमें से कोई एक, दो या मल्‍टीपल टैक्‍स लगाने का फैसला ले सकते हैं।
1# बेटरमेंट चार्ज: यह चार्ज उन इलाकों में लगाया जा सकता है, जहां सरकार लैंड पुलिंग पॉलिसी के तहत लोगों से जमीन लेती है और वहां इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलप करके कुछ हिस्‍सा वापस दे देती है। इसके बाद सरकार लैंड ऑनर से बेटरमेंट चार्ज वसूल सकती है।
 
2# लैंड वैल्‍यू टैक्‍स: सरकार के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलप करने की वजह से कीमत बढ़ जाने के बावजूद यदि ओनर लम्‍बे समय तक जमीन पर कुछ बनाता नहीं है तो सरकार लैंड वैल्‍यू टैक्‍स लगा सकती है।
 
3# इंपैक्‍ट फीस: जहां सरकार ने बड़े इन्‍वेस्‍टमेंट एलान किया, उस एरिया में होने वाले नए कंस्‍ट्रक्‍शन पर इम्‍पैक्‍ट फीस लगाई जाएगी, जो डेवलपमेंट चार्ज के अलावा होगा। फीस कुल सरकारी इन्‍वेस्‍टमेंट और उससे एरिया की लैंड कॉस्‍ट में होने वाली बढ़ोतरी के बेस पर तय होगी।
 
4# फीस फॉर चेंजिंग लैंड यूज: यदि किसी सरकारी योजना के शुरू होने के बाद वहां लैंड यूज चेंज होता है। जैसे कि एग्रीकल्‍चर लैंड को नॉन एग्रीकल्‍चर लैंड में बदला जाता है तो लैंड ओनर से फीस वसूली जा सकती है।

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