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टैक्सेबल नहीं है इनकम फिर भी फाइल करें ITR, इसके ये हैं पांच फायदे

 
नई दि‍ल्ली। आम तौर पर टैक्सेबल ब्रैकेट में आने वाले लोग ही इनकम टैक्‍स रिटर्न फाइल करते हैं। जिनकी इनकम टैक्सेबल ब्रैकेट में नहीं होता है, वे इनकम टैक्‍स रिटर्न (आईटीआर) फाइल नहीं करते हैं। हालांकि इससे बचना चाहिए। इनकम टैक्सेबल नहीं होने पर भी आईटीआर फाइल करना चाहिए। आज हम आपको बता रहे हैं कि इनकम टैक्सेबल नहीं होने पर आईटीआर फाइल करने के क्‍या फायदे हैं।
 
बैंक लोन या वीजा लेना आसान
 
अगर आपकी इनकम टैक्‍सेबल नहीं है और आप आईटीआर फाइल करते हैं तो बैंक से लोन या वीजा मिलना असान हो जाएगा। बैंक लोन देने से पहले इनकम टैक्‍स रिटर्न की डिमांड सबसे पहले करता है। इसी तरह वीजा के लिए अप्‍लाई करने पर अथॉरिटी द्वारा आईटीआर की मांग सबसे पहले की जाती है। बैंक लोन सेक्‍शन से पहले लोन लेने वाले व्‍यक्ति का तीन साल का आईटी रिटर्न मांगता है। आईटी रिटर्न यह दर्शाता है कि आपका ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर है। बैंक आपके आईटी रिटर्न को देखते हुए आसानी से लोन दे देता है। वीजा लेने में इनकम टैक्‍स रिटर्न की कॉपी मांगी जाती है। इनकम टैक्‍स की कॉपी नहीं होने पर बैंक से लोन लोन लेना या वीजा मिलना थोड़ा मुश्किल होता है।
 
टीडीएस क्लेम करने के लिए
 
अगर, आपको किसी भी सोर्स से हुई इनकम पर टीडीएस काटा गया है तो इसे क्‍लेम करने का एकमात्र जरिया है आईटीआर। बैंक आपके डिपॉजिट पर मिलने वाले इंटरेस्ट (10,000 रुपए से अधिक) पर टीडीएस काटा हो या रेंटल इनकम पर टीडीएस कटा हो, इसे प्राप्‍त करने के लिए आपको इनकम टैक्‍स फाइल करना होगा। इनकम टैक्‍स फाइल कर आप टीडीएस कटौती को क्‍लेम कर अपना पैसा वापस प्राप्‍त कर सकते हैं।
 
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