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आपका सच्‍चा साथी है प्रॉविडेंट फंड

आपका सच्‍चा साथी है प्रॉविडेंट फंड
नई दिल्ली।अगर आप ने अभी नौकरी की शुरुआत की है और सैलरी से इम्‍लाइज प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) के मद में निश्चित रकम कटना आपको गैर जरूरी चीज लगता है तो आपके लिए इसके फायदों के बारे में जानना जरूरी है। यह रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों और टैक्‍स बचाने के लिए सेविंग का सबसे पुराना ऑप्‍शन है।
 
क्‍या है ईपीएफ
ईपीएफ एक सोशल सिक्‍युरिटी स्‍क्‍ीम है जिसे इंप्‍लाईज को लॉंग टर्म सेविंग, इन्‍वेस्‍टमेंट और रिटायरमेंट बेनेफिट मुहैया कराने के लिए बनाया गया है। स्‍कीम के तहत इंप्‍लाई और एम्‍प्‍लॉयर द्वारा नियमित और मंथली कंट्रीब्‍यूशन के जरिए एक कॉर्पस बनाया जाता है। इम्‍प्‍लाई के रिटायरमेंट के समय यह कॉर्पस उसे दिया जाता है। कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन ईपीएफओ इस स्‍कीम का फायदा अपने मेंबर्स को देता है। स्‍कीम के तहत 20 से अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्‍थान के लिए ईपीएफओ में खुद को रजिस्‍टर्ड कराना और अपने इम्‍पलाईज का पीएफ काटना कानूनी तौर पर अनिवार्य है।
 
कैसे काम करती है ईपीएफ स्‍क्‍ीम
ईपीएफ के तहत हर माह इंप्‍लाइज की सैलरी का 12 फीसदी  इंप्‍लाई और एम्‍पलॉयर दोनों की ओर से ईपीएफ और ईपीएस में जाता है। इम्‍प्‍लाई का समूचा कंट्रीब्‍यूशन ईपीएफ में जाता है और यह टैक्‍स फ्री होता है। वहीं एम्‍पलॉयर के कंट्रीब्‍यूशन में से 3.67 फीसदी ईपीएफ में जाता है जबकि शेष 8.33 फीसदी इंप्‍लाइज पेंशन स्‍कीम में जाता है।
 
ईपीएफ स्‍कीम के फायदे
ईपीएफ में इंप्‍लाईज को सोशल सिक्‍युरिटी बेनेफिट के साथ कई फायदे मिलते हैं।
 
बनता है रिटायरमेंट फंड
इम्‍पलाई के कंट्रीब्‍यूशन, एम्पलायर के कंट्रीब्‍श्‍ूान और इस पर मिलने वाले सालाना इंटरेस्‍ट से रिटायरमेंट तक एक बड़ा फंड तैयार हो जाता है। लंबी अवधि के निवेश के तौर पर कंपाउंडिंग की ताकत के जरिए हर माह किया जाने वाला छोटा कंट्रीब्यूशन भी बड़े अमाउंट में बदल जाता है रिटायरमेंट के बाद यह इम्‍पलाई को फाइनेंशिल सिक्‍युरिटी मुहैया कराता है।
 
अनिवार्य सेविंग और निवेश
आम तौर पर लोग लंबी अवधि के लिए निवेश और रिटायरमेंट प्‍लानिंग को नजर अंदाज कर देते हैं। लेकिन इस स्‍क्‍ीम की वजह से इंप्‍लाई की सैलरी से एक निश्चिम रकम हर माह कटती है और लंबी अवधि के लिए निवेश की जाती है। स्‍कीम के जरिए अपने आप रिटायरमेंट प्‍लानिंग हो जाती है। ऐसे में अगर आप अलग से कोई सेविंग नहीं करते हैं तब भी आपके पास रिटायरमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ऑप्‍शन रहता है।
 
टैक्‍स फ्री रिटर्न
ईपीएफ पर मिलने वाला रिटर्न टैक्‍स फ्री होता है। मैच्‍योरिटी पर ईपीएफ विद्ड्राअल भी टैक्‍स फ्री है। ऐसे में यह स्‍क्‍ीम इप्‍लाई को टैक्‍स फ्री रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने की अनुमति देती है।
 
आसान है विदड्रॉअल
ईपीएफ एक रिटायरमेंट स्‍कीम है और इसे रिटायरमेंट के बाद विद्ड्राअल के लिए तैयार किया गया है। अगर आप पहले ही काम करना बंद कर देते हैं और ईपीएफ अकाउंट से पैसा निकालना चाहते हैं तो आप ईपीएफ में अपना कंट्रीब्‍यूशन और इस पर मिला इंटरेस्‍ट निकाल सकते हैं। एम्‍पलॉयर का कंट्रीब्यूशन 58 वर्ष की उम्र पूरी होने पर ही निकाला जा सकता है। इसके अलावा ईपीएफ स्‍कीम 7 साल की नौकरी पूरी कर लेने पर ईपीएफ से पैसा निकालने की अनुमति देती है। इसके तहत इंप्‍लाई घर खरीदने, शादी, एजुकेशन और मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में ईपीएफ से कुछ रकम निकाल सकता है। यह सुविधा वह लाइफ में तीन बार हासिल कर सकता है।
 
पेंशन की गारंटी देती है ईपीएफ स्‍कीम
हर माह एम्‍प्‍लॉयर के कंट्रीब्‍श्‍ूान का 8.33 फीसदी इंप्‍लाइज पेंशन स्‍कीम में जाता है। रिटायरमेंट के बाद इंप्‍लाई को पेंशन मिलती है। 

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