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माल्या को ब्रिटेन से वापस लाने की मिली इजाजत, मनी लॉन्डरिंग मामले में कोर्ट का आदेश

माल्या को ब्रिटेन से वापस लाने की मिली इजाजत, मनी लॉन्डरिंग मामले में कोर्ट का आदेश

मुंबई. शराब कारोबारी विजय माल्या को मनी लॉन्डरिंग के एक मामले में वापस भारत लाने की तैयारी शुरू हो गई हैं। एक स्पेशल कोर्ट ने इसके लिए एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) को भारत-यूके म्युचुअल लीगल असिस्टैंस ट्रीटी (एमएलएटी) पर अमल करने की मंजूरी दे दी है।  
 
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत सुनवाई कर रही स्पेशल कोर्ट ने पिछले सप्ताह ही भारत-ब्रिटेन संधि के तहत माल्या के खिलाफ आदेश जारी करने के एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट के अनुरोध को मंजूर किया था।
 
900 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के हैं आरोप
 
ईडी अधिकारियों ने कहा कि कोर्ट ने एजेंसी की जांच और आपराधिक मामले में एसेट्स की कुर्की के आधार पर उनके अनुरोध को मंजूर किया है। इस मामले में माल्या और उनकी अब बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइन्स पर आईडीबीआई बैंक के साथ करीब 900 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है।
 
EDने होम मिनिस्ट्री को भेजा ऑर्डर 
 ईडी के ऑफिशियल्स ने बताया, "हमने कोर्ट की तरफ से जारी ऑर्डर को अब होम मिनिस्ट्री को भेज दिया है, ताकि ब्रिटेन में उसके समकक्षों की मदद से आदेश पर आगे तामील हो सके।"    
कोर्ट के इस ऑर्डर के बाद अब नजर विदेश मंत्रालय पर है, जिसके एक्टिव होते ही माल्या की मुश्किल बढ़ सकती है।   विदेश मंत्रालय ने इसी आपराधिक मामले में सीबीआई जांच के आधार पर हाल ही में यूके से माल्या के प्रत्यर्पण की अपील की थी। बता दें कि प्रिवेन्शन ऑफ करप्शन एक्ट और इससे जुड़े आईपीसी के सेक्शंस के तहत सीबीआई भी इस लोन डिफॉल्ट मामले की जांच कर रही है। 
 
क्या है MLAT?
भारत और ब्रिटेन के बीच 1992 में म्युचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी हुई थी। इसके तहत दोनों देशों के बीच आपराधिक मामलों में आरोपी शख्स को ट्रांसफर किया जा सकता है। इसमें सबूत देने और जांच में सहयोग करने के मकसद से आरोपी की कस्टडी भी शामिल है। माना जा रहा है कि ईडी ने इसी पहलू को लीगल टूल के तौर पर इस्तेमाल किया है, जिसके आधार पर माल्या के प्रत्यर्पण की मांग की जाएगी।   

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