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ग्लोबल संकेतों से रुपए में एक बार फिर दबाव संभव, क्या होगा गिरावट का असर

नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले रुपए में बढ़त का रुख देखने को मिल रहा है। घरेलू संकेतों के साथ डॉलर में दबाव से रुपया 3 महीने के उच्चतम स्तर पर आ गया है। हालांकि करंसी मार्केट मान रहा है कि आने वाले समय में रुपए पर एक बार फिर गिरावट देखने को मिल सकता है और यह 68 के स्तर से पार पहुंच सकता है।
 
 
क्यों आई रुपए में मजबूती
 
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक रुपए में मजबूती इमर्जिंग मार्केट में रुपए के फेवर में कैरी ट्रेड की वजह से देखने को मिली है। घरेलू इकोनॉमी में मिले संकेतों और सरकार के द्वारा उठाए गए कदमों से करंसी पर पॉजिटिव असर की उम्मीद बन गई है। इसके बाद ट्रेडर दूसरी इमर्जिंग मार्केट की करंसी से निकल कर रुपए में निवेश कर रहे हैं, जिससे  रुपए को सहारा मिला है। वहीं आईएफए ग्लोबल के सीईओ अभिषेक गोयनका के मुताबिक रुपए में मजबूती के लिए घरेलू संकेतों का असर अहम रहा है। सरकार के द्वारा उठाए कदमों से एक बार फिर विदेशी निवेशक मार्केट की तरफ मुड़ रहें हैं। जिसका फायदा करंसी को मिला है।   
 
 
 
एक बार फिर 68 के स्तर के पार पहुंच सकता है रुपया
 
अभिषेक गोयनका के मुताबिक डॉलर में आगे मजबूती के संकेत बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप की नीतियों से संकेत हैं कि अमेरिका में महंगाई बढ़ सकती है साथ ही निवेश का फ्लो भी बढ़ सकता है। इसका असर डॉलर में तेजी के रूप में देखने को मिलेगा। ऐसे में रुपए में आने वाले समय में एक बार फिर गिरावट आ सकती है। अभिषेक ने अनुमान दिया है कि छोटी से मध्यम अवधि में एक बार फिर रुपया 68 के स्तर को छू सकता है। वहीं अजय केडिया के मुताबिक मध्यम अवधि में ग्लोबल संकेतों को देखते हुए रुपए में गिरावट बढ़ सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा उठाए गए कदमों से 70 के स्तर तक गिरने की आशंका काफी कम हो गई है। पॉजिटिव संकेतों के साथ डॉलर के मुकाबले रुपया बढ़त पर 66.55 का स्तर छू सकता है। वहीं, गिरावट आने पर अजय का अनुमान है कि मध्यम अवधि में रुपया 68.5 के स्तर पर आ सकता है।
 
 
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